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Gas Cylinder Guidelines: कहीं आपकी रसोई का भी चूल्हा न हो जाए ठंडा! दुनिया में छिड़ी जंग के बीच सरकार ने जारी की गैस सिलिंडर की नई गाइडलाइंस

Shikha Mishra | Nedrick News New Delhi Published: 10 Mar 2026, 10:09 AM | Updated: 10 Mar 2026, 10:09 AM

Gas Cylinder Guidelines:  दुनिया भर में जंग छिड़ रखी है, जिसका खामियाजा अब भारत को भी चुकाना पड़ रहा है। युद्ध की यह आग अब देश की रसोई तक पहुंचने लगी है। गैस सिलेंडरों की किल्लत इसी का नतीजा है, जिसे देखते हुए सरकार अब यह सुनिश्चित करने में जुटी है कि संकट के इस दौर में किसी का चूल्हा न बुझे। इसी मकसद से सरकार ने नई गाइडलाइंस जारी की हैं, ताकि प्राथमिकता के आधार पर हर घर तक सिलेंडर पहुंचाया जा सके।

दरअसल ईरान-अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारत में भी दिखाई देने लगा है। युद्ध की वजह से मिडिल ईस्ट का अहम समुद्री रास्ता होर्मुज स्ट्रेट बंद हो गया है। इसी रास्ते से भारत में बड़ी मात्रा में LPG और नेचुरल गैस आती है। रास्ता बंद होने से सप्लाई पर दबाव बढ़ गया है। इसी स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार के पेट्रोलियम मंत्रालय ने गैस के बंटवारे के लिए नई प्रायोरिटी लिस्ट जारी की है। मतलब अगर गैस की कमी हुई तो पहले किस सेक्टर को गैस दी जाएगी और किस सेक्टर में कटौती होगी, यह तय कर दिया गया है।

इन सेक्टरों में नहीं होगी गैस की कमी

सरकार ने साफ किया है कि आम लोगों से जुड़े जरूरी सेक्टरों में गैस सप्लाई पूरी रखी जाएगी। यानी इन क्षेत्रों में 100 प्रतिशत गैस मिलेगी और कोई कटौती नहीं होगी। इनमें अस्पताल (Hospitals), शैक्षणिक संस्थान (Educational Institutions), और सेना (Defence) जैसे अति-आवश्यक क्षेत्र शामिल हैं। सरकार की पहली प्राथमिकता यह है कि स्वास्थ्य और सुरक्षा जैसी सेवाओं पर वैश्विक संकट का कोई असर न पड़े।

PNG (Piped Natural Gas): यह गैस सीधे पाइपलाइनों के जरिए घरों तक पहुंचती है, जिसे स्टोर करने या बुक करने की जरूरत नहीं होती।
CNG (Compressed Natural Gas): इसे उच्च दबाव पर स्टोर किया जाता है और मुख्य रूप से कार, बस और ऑटो जैसे वाहनों में ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
LPG (Liquefied Petroleum Gas): यह वह गैस है जो सिलेंडरों में भरकर घरों तक पहुँचाई जाती है। भारत के लगभग 30 करोड़ परिवार अपनी रसोई के लिए इसी पर निर्भर हैं।

पाइपलाइन ऑपरेशन

गैस को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने वाली पाइपलाइनों को चलाने के लिए जरूरी ईंधन। सरकार का कहना है कि ये सेक्टर सीधे आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े हैं, इसलिए इन्हें सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी गई है ताकि लोगों को खाना बनाने या गाड़ी चलाने में परेशानी न हो। इसे प्राथमिकता इसलिए दी गई है ताकि देश के किसी भी कोने में गैस की आपूर्ति (Supply Chain) न टूटे।

इन सेक्टरों में होगी गैस कटौती (Industrial Rationing)

सरकार ने उद्योगों के लिए गैस की आपूर्ति में कटौती का फैसला लिया है। कंपनियों को उनके पिछले 6 महीनों की औसत खपत के आधार पर ही गैस आवंटित की जाएगी। चाय उद्योग और अन्य मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर – 80% गैस, फर्टिलाइजर (खाद) कंपनियां – 70% गैस, तेल रिफाइनरीज – 65% गैस यानी उद्योगों को पहले जितनी गैस मिलती थी, उससे कम गैस दी जाएगी। इसका सीधा मतलब है कि उद्योगों के हिस्से की गैस बचाकर उसे देश की आम जनता की रसोई तक पहुंचाया जाएगा।

होटल और रेस्टोरेंट सेक्टर में बढ़ी चिंता

कमर्शियल LPG सिलेंडर की सप्लाई अचानक कम होने से होटल और रेस्टोरेंट इंडस्ट्री में चिंता बढ़ गई है। महाराष्ट्र और कर्नाटक में रेस्टोरेंट एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि अगर गैस सप्लाई ठीक नहीं हुई तो कई होटल और खाने की दुकानें बंद करनी पड़ सकती हैं। बेंगलुरु में तो कई होटल और रेस्टोरेंट ने विरोध में कामकाज बंद भी कर दिया है।

कई राज्यों में कमर्शियल सिलेंडर पर रोक

स्थिति को देखते हुए कई राज्यों में व्यावसायिक सिलेंडरों की सप्लाई रोक दी गई है। पंजाब: 8 मार्च से पूरे राज्य में 19 किलो के कमर्शियल सिलेंडर और बड़े इंडस्ट्रियल सिलेंडरों की सप्लाई रोक दी गई।
हिमाचल प्रदेश: बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ जैसे बड़े औद्योगिक क्षेत्रों में कमर्शियल LPG की सप्लाई अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दी गई है।
उत्तर प्रदेश: कानपुर और गाजियाबाद में भी कमर्शियल सिलेंडरों की रीफिलिंग पर रोक लगा दी गई है।
झारखंड: झुमरीतिलैया में नई व्यवस्था के तहत अब उपभोक्ता 25 दिन बाद ही अगला सिलेंडर ले सकेंगे।

सरकार ने क्यों लिया यह फैसला

भारत अपनी LPG जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है और इसका बड़ा हिस्सा मिडिल ईस्ट से होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते आता है। युद्ध की वजह से इस रास्ते से आने वाली सप्लाई प्रभावित हुई है। इसी कारण कमर्शियल LPG यानी होटल और रेस्टोरेंट में इस्तेमाल होने वाली गैस की कमी सबसे पहले दिखाई देने लगी है।

घरेलू गैस बचाने के लिए नए नियम

घरेलू LPG की सप्लाई बनाए रखने के लिए सरकार और तेल कंपनियों ने कुछ नए नियम भी लागू किए हैं। अब घरेलू सिलेंडर 21 दिन की जगह 25 दिन बाद ही बुक किया जा सकेगा, डिलीवरी के समय OTP या बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन किया जा रहा है, जमाखोरी और दूसरी जगह भेजने पर रोक लगाने के लिए निगरानी बढ़ाई गई है। पेट्रोलियम मंत्रालय का कहना है कि फिलहाल देश में LPG का करीब 40 दिनों का स्टॉक मौजूद है।

इस बीच कालाबाजारी की भी कई शिकायतें सामने आई है। कुछ जगहों पर LPG की कालाबाजारी की खबरें भी सामने आ रही हैं। यूपी के कानपुर में जहां एजेंसियों से सिलेंडर नहीं मिल रहा, वहां कुछ लोग 1400 से 1500 रुपये में सिलेंडर बेच रहे हैं।

सरकार की नजर स्थिति पर

सरकार का कहना है कि हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से गैस आयात बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। लेकिन अगर मिडिल ईस्ट का संकट लंबे समय तक चला तो इसका असर उद्योगों और कारोबार पर पड़ सकता है, जैसे चाय बागानों में उत्पादन कम होना या खाद कंपनियों का काम प्रभावित होना।

Shikha Mishra

shikha@nedricknews.com

शिखा मिश्रा, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत फोटोग्राफी से की थी, अभी नेड्रिक न्यूज़ में कंटेंट राइटर और रिसर्चर हैं, जहाँ वह ब्रेकिंग न्यूज़ और वेब स्टोरीज़ कवर करती हैं। राजनीति, क्राइम और एंटरटेनमेंट की अच्छी समझ रखने वाली शिखा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और पब्लिक रिलेशन्स की पढ़ाई की है, लेकिन डिजिटल मीडिया के प्रति अपने जुनून के कारण वह पिछले तीन सालों से पत्रकारिता में एक्टिव रूप से जुड़ी हुई हैं।

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