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मिसाल: 35 असफलताओं के बाद भी नहीं टूटा हौसला, फिर इस शख्स ने अपनी मंजिल तक पहुंचकर ही दिखाया!

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 14 Dec 2021, 12:00 AM | Updated: 14 Dec 2021, 12:00 AM

कभी-कभी कोई इंसान जब कामयाबी को पाने के लिए जी-तोड़ मेहनत करे और तब भी कामयाब न हो पाए तो क्या उसकी हिम्मत टूट नहीं जाएगी। अगर आपको भी ऐसा लगता है तो शायद गलत लगता है, क्योंकि आज हम जिस शख्स का जिक्र करने जा रहे हैं वो मिसाल है समाज के आगे अपनी कड़ी मेहनत से असफलता को सफलता में बदल देने के मामले में। एक ऐसा शख्स जिनका अटूट हौसला समाज को ये बताता है कि असफलता तो आएंगी, लेकिन सफलता पाने के लिए हौसला बनाए रखना भी बेहद जरूरी है। हम बात 35 परीक्षाओं में फेल हुए एक IPS ऑफिसर की करने जा रहे हैं जिनका नाम है विजय वर्धन की।

बेसिकली ऑफिसर विजय वर्धन हरियाणा के सिरसा डिस्ट्रिक के रहने वाले हैं, जिनकी स्टोरी बेहद ही इंस्पायरिंग है। सिरसा में शुरुआती स्टडी के बाद वर्धन हायर स्टडीज के लिए दूसरे शहर हिसार चले आए और साल 2013 में उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स में अपनी इंजीनियरिंग पूरी की। वर्धन ने एक इरादा बनाया सिविल सर्विसेज जॉइन करने का लेकिन बार बार उनको इसमें असफलताओं का सामना करना पड़ा।लेकिन इरादा इतना पक्का था वर्धन का कि वो अपने लक्ष्य से पीछे कभी नहीं हटे।

UPSC की तैयारी में जुट गए विजय 

वर्धन UPSC की तैयारी के लिए हिसार से दिल्ली का रुखकर लिया और इस परीक्षा को क्वालिफाई करने के लिए उन्होंने जी तोड़ मेहनत करनी शुरू कर दी। UPSC की तैयारी के वक्त विजय वर्धन ने हरियाणा PCS, यूपी PCS, SSC सीजीएल जैसी लगभग 30 परीक्षाएं दी और इनमें से किसी में भी उनको कोई सफलता नहीं हाथ लगी। वो इन सब में फेल हुए लेकिन ऐ और बी ग्रेड की करीब 30 परीक्षाओं में फेल होने के बाद वर्धन को झटका तो जरुर लगा, लेकिन इराद पक्का ही रहा। फिर शुरू हुआ UPSC की परीक्षा में उनकी असफलताओं का सिलसिला। विजय वर्धन ने यूपीएससी की परीक्षा साल 2014 से देने की शुरू की थी।

एक,दो नहीं कई बार हुए असफल 

 रिपोर्ट्स की मानें तो विजय केवल प्री परीक्षा ही क्वालीफाई कर पाए थे, साल 2014 और 2015 में। मेन में असफल रहे। तीसरी बार विजय ने प्रिपरेशन को और रफ्तार दी और मेन एग्जाम भी पास कर लिया, लेकिन बस 6 अंक से मेन लिस्ट में अपना नाम दर्ज करवा पाने से रह गए। इतने में तो कोई साधारण शख्स हार मान ही लेगा, लेकिन इस असफलता के बाद भी विजय के इरादे नहीं बदले और उन्होंने 2017 में एक बार फिर एग्जाम दिया और इस बार उनका जीवन सफलताओं से भर गया। अबकी बार तो उन्होंने इंटरव्यू दिया। सफलता से वो अब भी दूर रहे।

 आखिरकार विजय की मेहनत लाई रंग

विजय के आसपास रहने वाले जितने भी लोग थे उन्होंने तो उम्मीद छोड़ दी थी कि विजय को UPSC की परीक्षा में कामयाबी मिलेगी भी, लेकिन विजय वर्धन पर कोई असर नहीं पड़ रहा था लोगों की बातों का। आखिरकार साल 2018 में वो हुआ जिसके लिए वो इतने साल से कड़ी मेहनत में लगे थे। आखिरकार विजय के कदमों में सफलता ने सरेंडर कर दिया और UPSC की परीक्षा में विजय ने 104वीं रैंक पा लिया।

ये स्टोरी विजय की तो बस कहने के लिए है, सही मायनों में ये सेटोरी एक जिद्दी मेहनती शख्स की है जिसने मंजिल को मजबूर कर दिया कि वो शख्स के कदमों में आकर झूक जाए। किस्मत की लोग बात करते हैं लेकिन किस्मत भी जब खेल खेलने लगे तो मेहनत को ही रंग लाना पड़ता है।

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