Sikhism and Hinduism connection: सिख धर्म में सुप्रीम शब्द वाहेगुरु का क्या है मतलब, हिंदू धर्म से जुड़ा है गहरा कनेक्शन

Shikha Mishra | Nedrick News

Published: 09 Feb 2026, 07:03 AM | Updated: 09 Feb 2026, 07:03 AM

Sikhism and Hinduism connection: हमेशा से इस बात पर बहस होती रही है सिख धर्म हिंदू धर्म के प्रभाव से निकला है, और आज भी इस पर हिंदू धर्म का प्रभाव नजर आता है। वहीं प्रथम गुरु गुरु नानक देव जी खुद एक हिंदू खत्री परिवार से थे, लेकिन उन्होंने हिंदू धर्म की कई नीतियों से त्रस्त होकर एक ऐसे पंथ की शुरुआत की थी, जिसमें भगवान बंटे नहीं थे, जहां जातिवाद की बेड़ियों ने मानवता को नहीं बांटा हुआ था.. जिसे उन्होंने सिख धर्म कहा था।

सिखों ने ग्रन्थ को गुरमुखी लिपी में लिखा

हालांकि सिख धर्म के लिखे गए ग्रंथ हिंदी की देवनागरी नहीं बल्कि सिखों की गुरमुखी लिपी में लिखी गई। उनकी बोली भाषा हिंदी से अलग रही. और समय के साथ उनकी संस्कृति परंपरा भी बदलती गई। ईश्वर को याद करके हिंदू धर्म में तो कई नाम लिये जाते है लेकिन आपने सिखों को एक नाम लेते सुना होगा.. वो नाम है वाहेगुरु का… वाहेगुरू, जो पर परम शाक्ति को याद करने का प्रतीक है, मगर आप ये जानते है कि वाहेगुरु का असली मतलब क्या होता है, और कैसे ये सबसे अहम शब्द बन गया। अपने इस वीडियो में हम वाहेगुरू शब्द को लेकर क्या है इसके पीछे की कहानी, उसके बारे में जानेंगे।

वाहेगुरु शब्द ईश्वर से जोड़ने वाला शब्द

वाहेगुरु शब्द को लेकर अलग अलग मत है- वाहेगुरु, सिखों के लिए उस अद्भुत ईश्वर को याद करने का प्रतीक है, जो कि पूरी दुनिया में ज्ञान के प्रकाश को फैला कर अंधकार को दूर करता है। सिख समुदाय से जुड़े लोग वाहेगुरु शब्द को ईश्वर से जोड़ने वाला शब्द मानते है और इसका जप करते है। माना जाता है कि वाहुगुरु शब्द मन को शांति देता है। लेकिन वाहेगुरु शब्द का एक कनेक्शन हिंदू धर्म से भी जुड़ा है। सिख इतिहास की माने तो वाहेगुरु शब्द असल में चारों युगो में पालनकर्ता और सुप्रीमगोर्ड श्री हरि विष्णु के आगमन और उनके नामों से प्रेरित है। जैसे कि वा- विष्णु या वासुदेव से लिया गया है,. ह से हरि से लिया गया है, ग- शब्द गोबिंद से लिया गया और र शब्द राम से लिया गया।

अद्भुत और गुरू मतलब मार्गदर्शक

हालांकि इस मुद्दे पर अभी भी बहस जारी है, लेकिन हम इस बात को झुठला नहीं सकते है कि पवित्र श्री गुरु ग्रंथ साहिब में हरि शब्द का इस्तेमाल करीब 8344 से लेकर 9288 बार इस्तेमाल किया गया था, तो वहीं राम शब्द का इस्तेमाल भी 2533 से लेकर 5000 बार किया गया है। वहीं एक और मत है वाहेगुरु शब्द के पीछे, जिसके अनुसार – वाहे शब्ह वाह से लिया गया है जिसका मतलब होता है अद्भुत और गुरू मतलब मार्गदर्शक.. यानि की वाहेगुरु शब्द के इस्तेमाल से इंसान को अद्भुद मार्गदर्शन प्राप्त होता है। हरि और राम शब्द का इस्तेमाल अकाल पुरख, .यानि की सुप्रीम गोर्ड के लिए किया गया है, किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं लेकिन हिंदू धर्म में ये नाम किन्हें प्रदर्शित करते है वो हम जानते है।

कब हुआ था पहली बार इस्तेमाल  

हालांकि आपको शायद ये नही पता है कि वाहुगुरु शब्द का इस्तेमाल जन्मसाखी में तो हुआ है लेकिन श्री गुरु ग्रंथ साहिब में ये किसी भी गुरु की बाणियों में इस्तेमाल नहीं किया गया था। लेकिन जब आप अंग 1402-1403 पढ़ते है तो वहां आपको भट्ट गयांड द्वारा लिखी गई भट्ट सवैयों में पहली बार वाहेगुरु शब्द का इस्तेमाल देखने को मिले। भट्ट सवैयों में भाई गुरुदास जी बाणी लिखी गई है, जिसमें भट्ट गयांड ने गुरुदास जी की तारीफ करते हुए वाह गुरु शब्द का इस्तेमाल किया है।

वहीं गुरु ग्रंथ के अलावा गुरुदास जी के वारो, जो कि गुरुबाणी की कुंजी कहलाती है, वाहेगुरू शब्द के इस्तेमाल का उल्लेख मिलता है। सवैयो में वाह गुरु सर्वोच्च दिव्य ईश्वर को प्रदर्शित करता है, जिसमें ईश्वर की प्रशंसा की गई है। जपजी साहिब और आसा दी वार जैसे ग्रंथो में भी वाहेगुरु शब्द का इस्तेमाल करके ईश्वर की तारीफ की गई है।

सिखों के लिए सबसे पवित्र शब्द वाहेगुरू

वाहेगुरू शब्द आज के समय में सिखों के लिए सबसे पवित्र शब्द है, जिनका इस्तेमाल आम जीवन में भी सिख किया करते है, ये शब्द गुरु नानक देव जी की उस बात को आत्मसात करता है, जब उन्होंने सबका मालिक एक है कह कर केवल एक ही सुप्रीम ईश्वर को पूजने, उनका ध्यान करने का संदेश दिया था। बिना किसी भेदभाव के वाहेगुरु शब्द का इस्तेमाल हर एक सिख कर सकता है। जो जातिगत और सामाजिक भेदभाव को दूर करने का प्रमाण बन गया।

ईश्वर के नाम पर सिख धर्म में सबका अधिकार है, इसलिए जो सिख है वो वाहेगुरु बोलेगा ही.. न तो उनकी इश्वर बदलेगा और न ही उनकी आस्था। परमात्मा ही सबसे अलग है…परमात्मा ही सबसे खास है। वाहेगुरु शब्द को लेकर सिखो की भावनायें बेहद मजबूत है.. और वो हमेशा मजबूत ही रहेगी.. जो अलग अलग संप्रदाय के नाम पर बंटने वाली नही है..क्योंकिं गुरुओ ने इस एक शब्द से सभी सिखों को जोड़ दिया है। इस वीडियो को लेकर आपकी क्या राय है हमें कमेंट करके जरूर बतायें।

Shikha Mishra

shikha@nedricknews.com

शिखा मिश्रा, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत फोटोग्राफी से की थी, अभी नेड्रिक न्यूज़ में कंटेंट राइटर और रिसर्चर हैं, जहाँ वह ब्रेकिंग न्यूज़ और वेब स्टोरीज़ कवर करती हैं। राजनीति, क्राइम और एंटरटेनमेंट की अच्छी समझ रखने वाली शिखा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और पब्लिक रिलेशन्स की पढ़ाई की है, लेकिन डिजिटल मीडिया के प्रति अपने जुनून के कारण वह पिछले तीन सालों से पत्रकारिता में एक्टिव रूप से जुड़ी हुई हैं।

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