महिला की संपत्ति पर पुरुष का कोई हक नहीं, यहां समझिए क्या है कोर्ट के इस फैसले के मायने

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 29 Apr 2024, 12:00 AM | Updated: 29 Apr 2024, 12:00 AM

सुप्रीम कोर्ट ने एक शादीशुदा जोड़े की संपत्ति से जुड़े एक मामले में अहम टिप्पणी की। शीर्ष अदालत ने कहा कि एक पति का अपनी पत्नी के ‘स्त्रीधन’ पर कोई नियंत्रण नहीं है और भले ही वह संकट के समय इसका उपयोग कर सकता है, लेकिन उसका नैतिक दायित्व है कि वह इसे अपनी पत्नी को लौटाए। कोर्ट ने एक महिला को उसके खोए हुए सोने के बदले 25 लाख रुपये लौटाने का निर्देश देते हुए अपने फैसले में यह अहम बात कही।

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क्या था मामला?

ये मामला केरल का है। पत्नी का आरोप था कि उसके पति ने शादी की पहली रात ही उसके सारे गहने यानि स्त्रीधन सुरक्षित रखने के नाम पर अपनी मां को दे दिए।  फिर मां और बेटे ने मिलकर अपना कर्ज चुकाने के लिए उसके सारे गहने इस्तेमाल कर लिए। कोर्ट ने महिला के आरोपों को सही पाया और उसके पति को स्त्रीधन लौटाने का आदेश दिया।

दरअसल, महिला ने अपने केस में बताया कि उसके घरवालों ने उसे शादी में तोहफे के तौर पर 89 सोने के सिक्के दिए थे। इसके अलावा पिता ने पति को 2 लाख रुपये का चेक भी दिया। संपत्ति के इस मुद्दे की शुरुआत में केरल के फैमिली कोर्ट में सुनवाई हुई, जहां महिला का दावा वैध पाया गया। इसके बाद केरल हाई कोर्ट ने फैसले को पलट दिया। केरल हाई कोर्ट के फैसले से असंतुष्ट महिला ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की, जिसने उसके दावे को बरकरार रखा।

स्त्रीधन क्या होता है?

शादी से पहले, शादी के दौरान और बाद में किसी महिला को उपहार में दी गई संपत्ति उसका ‘स्त्रीधन’ होती है। यह उसकी पूरी संपत्ति है और वह इसके साथ जो चाहे कर सकती है।

दहेज से कितना अलग है स्त्रीधन

दहेज और स्त्रीधन दो बिल्कुल अलग चीजें हैं। हालांकि दहेज लेना और देना दोनों ही गैरकानूनी हैं, लेकिन स्त्रीधन कानूनी तौर पर लिया और दिया जा सकता है। यह एक प्यार भरा उपहार है। यही कारण है कि इस पर महिला का पूरा अधिकार होता है और कोई भी इसे जबरन नहीं छीन सकता।

स्‍त्रीधन पर क्या हैं महिलाओं के हक

हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 और हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के तहत महिला को स्त्रीधन को रखने पूरा हक है। वह चाहे जैसे उसका इस्तेमाल कर सकती है। वह उसे किसी को भी दे सकती है या फिर बेच सकती है। ससुराल पक्ष, यहां तक कि पति का भी उस पर कोई अधिकार नहीं होता।

अगर महिला ने अपना स्त्रीधन ससुराल में किसी के पास रखा है, जैसे सास, ससुर या पति तो वह ही उस स्त्रीधन का संरक्षक माना जाएगा। जैसा कि केरल केस में हुआ था। जब भी कोई महिला अपना स्त्रीधन वापस मांगती है तो उसे वापस करने से इनकार नहीं किया जा सकता। वहीं, अगर ससुराल वाले महिला का स्त्रीधन जबरन अपने पास रख लें और मांगने पर वापस न करें तो महिला ‘अमानत में खयानत’ का मामला दर्ज करा सकती है।

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