Makar Sankranti Dharamraj Katha: जानिए मकर संक्रांति पर धर्मराज की पूजा का महत्व और गुणवती की प्रेरक कथा

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 06 Jan 2025, 12:00 AM | Updated: 06 Jan 2025, 12:00 AM

Makar Sankranti Dharamraj Katha: मकर संक्रांति हिंदू धर्म का प्रमुख त्योहार है, जो हर साल सूर्य देव के उत्तरायण में प्रवेश के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। इस साल मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाई जाएगी। इस पावन पर्व से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं हैं, जिनमें से एक महत्वपूर्ण कथा धर्मराज और गुणवती की है। इस कथा के माध्यम से मकर संक्रांति पर धर्मराज की पूजा और व्रत के महत्व को समझाया गया है।

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धर्मराज और गुणवती की कथा- Makar Sankranti Dharamraj Katha

कहानी की शुरुआत बबरुवाहन नामक राजा के राज्य से होती है, जहां एक धर्मपरायण ब्राह्मण हरिदास अपनी पत्नी गुणवती के साथ रहता था। गुणवती ने अपने जीवन को देवी-देवताओं की उपासना, व्रत, दान और अतिथि सेवा में समर्पित कर दिया था। वृद्धावस्था में उनकी मृत्यु के बाद धर्मराज के दूत उन्हें यमलोक ले गए।

Makar Sankranti Dharamraj Katha festival
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धर्मराज ने गुणवती की पुण्यकर्मों से प्रसन्न होकर कहा कि उसने जीवनभर अनेक देवी-देवताओं की पूजा की, लेकिन कभी धर्मराज की पूजा नहीं की। गुणवती ने क्षमा मांगते हुए धर्मराज से पूछा कि उनकी पूजा कैसे करनी चाहिए।

धर्मराज द्वारा व्रत का महत्व समझाना

धर्मराज ने बताया कि मकर संक्रांति के दिन से उनकी पूजा शुरू करनी चाहिए। इस पूजा में धर्म के 10 नियमों का पालन और एक साल तक व्रत कथा सुननी चाहिए। अगली मकर संक्रांति पर व्रत का उद्यापन करके धर्मराज और चित्रगुप्त की विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए।

धर्म के 10 नियम

  1. धीरज और संतोष रखना।
  2. मन और इन्द्रियों को वश में रखना।
  3. दुष्कर्मों से दूर रहना।
  4. मानसिक और शारीरिक शुद्धि का ध्यान रखना।
  5. बुरे विचारों को त्यागना।
  6. पूजा, पाठ और दान करना।
  7. सच बोलना और अच्छा व्यवहार करना।
  8. क्रोध न करना।
  9. व्रत और उसकी कथा सुनना।
  10. परोपकार और दान-पुण्य करना।

व्रत की प्रक्रिया

  • व्रत का उद्यापन करते समय धर्मराज और चित्रगुप्त की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा कर विधिपूर्वक हवन करना।
  • काले तिल के लड्डू का भोग लगाना।
  • ब्राह्मण भोज कराना और बांस की टोकरी में 5 सेर अनाज का दान करना।
  • जरूरतमंदों को गद्दा, कम्बल, वस्त्र आदि का दान करना।
  • गौदान करने का विशेष महत्व है।

गुणवती को मोक्ष की प्राप्ति

गुणवती ने धर्मराज के निर्देशों का पालन करते हुए यह व्रत किया और लोगों में इसका प्रचार भी किया। व्रत के प्रभाव से धर्मराज की कृपा हुई और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई।

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मकर संक्रांति पर धर्मराज की पूजा का महत्व

मकर संक्रांति पर धर्मराज की पूजा और व्रत का मुख्य उद्देश्य धर्म के मार्ग पर चलना, दान-पुण्य करना और मोक्ष प्राप्त करना है। यह कथा हमें जीवन में धर्म, सच्चाई और परोपकार का महत्व सिखाती है।

मकर संक्रांति केवल एक पर्व नहीं है, बल्कि यह हमें धर्म और सत्कर्मों के महत्व का बोध कराती है। धर्मराज और गुणवती की कथा इस त्योहार को और भी पावन और प्रेरणादायक बनाती है। इस मकर संक्रांति, धर्मराज की पूजा कर उनके बताए नियमों का पालन करें और जीवन को सार्थक बनाएं।

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