Lucknow crime update: 9 सालों से मन में सुलग रहा था गुस्सा, खुला खुनी नीले ड्रम का राज

Shikha Mishra | Nedrick News Lucknow Published: 25 Feb 2026, 10:29 AM | Updated: 25 Feb 2026, 10:29 AM

Lucknow crime update: 9 साल की नफरत और खौफनाक अंत: बेटे के मन में सालों से सुलग रहा था गुस्सा, आज ‘नीला ड्रम’ हत्याकांड से खुला राज उत्तर प्रदेश की राजधानी नवाबों का शहर लखनऊ में शराब कारोबारी मानवेंद्र सिंह की उनके ही बेटे अक्षत प्रताप सिंह द्वारा हत्या किए जाने का मामला सामने आने के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। इस घटना के बाद बच्चों की परवरिश, पारिवारिक रिश्तों और मानसिक दबाव को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।

क्या है पूरा मामला

आशियाना के सेक्टर एल में रहने वाले 49 वर्षीय मानवेंद्र सिंह शराब कारोबारी होने के साथ पैथोलॉजी भी चलाते थे। आरोप है कि उनके 21 वर्षीय बेटे अक्षत ने 20 फरवरी की सुबह करीब 4:30 बजे पिता को लाइसेंसी राइफल से गोली मार दी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

हत्या के बाद आरोपी ने शव को छिपाने की कोशिश की। उसने शव के टुकड़े कर दोनों हाथ और पैर पारा इलाके के सदरौना क्षेत्र में फेंक दिए, जबकि सिर सहित धड़ घर में नीले ड्रम से बरामद हुआ। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर हत्या और सबूत मिटाने की धाराओं में केस दर्ज किया है।

रिश्तों में पहले से थी दरार

मीडिया द्वारा मिली जानकारी के मुताबिक बताया जा रहा है कि पिता-पुत्र के बीच पिछले कई वर्षों से तनाव चल रहा था। वर्ष 2017 में अक्षत की मां की आत्महत्या के बाद बेटे के मन में पिता के प्रति नाराजगी बढ़ गई थी। परिवार के लोगों का कहना है कि पारिवारिक कलह के कारण मां ने जहर खाकर जान दे दी थी, जिसके लिए अक्षत पिता को जिम्मेदार मानता था। इसी के साथ मानवेंद्र की एक महिला से नजदीकियों की चर्चा और देर रात पार्टी से लौटने को लेकर भी दोनों के बीच विवाद होता रहता था।

नीट की तैयारी को लेकर दबाव

अक्षत पिता के कहने पर नीट की कोचिंग कर रहा था, लेकिन वह डॉक्टर नहीं बनना चाहता था। पूछताछ में उसने बताया कि पिता लगातार परीक्षा पास करने का दबाव बना रहे थे। इसी दबाव के चलते तीन साल पहले वह घर छोड़कर चला गया था और एक नोट भी लिखा था कि वह अपनी राह खुद बनाना चाहता है। बाद में पिता उसे वापस घर ले आए थे।

आर्थिक और करियर को लेकर मतभेद

बताया जा रहा है कि मानवेंद्र ने तीन साल पहले बेटे और बेटी के खाते में पांच-पांच लाख रुपये जमा किए थे। इसके बाद अक्षत के खर्च बढ़ गए थे। पिता चाहते थे कि वह नौकरी करे, जबकि अक्षत रिसॉर्ट और रेस्टोरेंट का कारोबार शुरू करना चाहता था। इस बात को लेकर भी विवाद रहता था।

हत्या के बाद शव ठिकाने लगाने की कोशिश

पूछताछ में आरोपी ने बताया कि हत्या के बाद वह शव को कार में डालकर गोमती नदी में फेंकना चाहता था, लेकिन वजन ज्यादा होने से ऐसा नहीं कर पाया। इसके बाद आरी खरीदकर शव के टुकड़े कर दिए और धड़ को नीले ड्रम में छिपा दिया।

बहन को धमकाकर रखा बंद

घटना के समय अक्षत की छोटी बहन कृति घर में मौजूद थी। गोली की आवाज सुनकर वह कमरे में पहुंची, लेकिन आरोपी ने उसे जान से मारने की धमकी देकर चुप करा दिया और चार दिन तक कमरे में बंद रखा।

पुलिस की कार्रवाई

डीसीपी मध्य के अनुसार, 21 फरवरी को मानवेंद्र की गुमशुदगी की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की। पूछताछ में मामला खुला और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। शव के सभी हिस्से बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए गए हैं। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। यह घटना न सिर्फ एक जघन्य अपराध के रूप में सामने आई है, बल्कि परिवार में बढ़ते तनाव, बच्चों पर करियर का दबाव और संवाद की कमी जैसे मुद्दों को लेकर भी सवाल खड़े कर रही है।

Shikha Mishra

shikha@nedricknews.com

शिखा मिश्रा, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत फोटोग्राफी से की थी, अभी नेड्रिक न्यूज़ में कंटेंट राइटर और रिसर्चर हैं, जहाँ वह ब्रेकिंग न्यूज़ और वेब स्टोरीज़ कवर करती हैं। राजनीति, क्राइम और एंटरटेनमेंट की अच्छी समझ रखने वाली शिखा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और पब्लिक रिलेशन्स की पढ़ाई की है, लेकिन डिजिटल मीडिया के प्रति अपने जुनून के कारण वह पिछले तीन सालों से पत्रकारिता में एक्टिव रूप से जुड़ी हुई हैं।

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