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Lodhi Baba Dham: जहां पटरियां बिछाते वक्त आई थी रुकावट, आज भी रेलवे चढ़ाता है चढ़ावा – जानिए लोदी बाबा धाम की कहानी

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 10 Jul 2025, 12:00 AM | Updated: 10 Jul 2025, 12:00 AM

Lodhi Baba Dham: हमारे देश में कई ऐसे प्राचीन और रहस्यमयी मंदिर मौजूद हैं, जो न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि उनके साथ जुड़ी ऐतिहासिक घटनाओं ने भी इन्हें और दिलचस्प बना दिया है। एक ऐसा मंदिर है अमेठी जिले के गौरीगंज में स्थित लोदी बाबा धाम, जिसका इतिहास 200 साल पुराना है और यह आज भी अपने चमत्कारी प्रभाव और अद्भुत मान्यताओं के कारण प्रसिद्ध है। यह मंदिर न केवल हिंदू धर्म के अनुयायियों के लिए, बल्कि मुस्लिम समुदाय के लोगों के लिए भी आस्था का केंद्र है।

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लोदी बाबा का ऐतिहासिक संदर्भ- Lodhi Baba Dham

लोदी बाबा धाम का इतिहास एक रहस्यमय और दिलचस्प कहानी से जुड़ा हुआ है। जब वाराणसी-लखनऊ रेल खंड पर पटरियां बिछाई जा रही थीं, तब रेलवे अधिकारियों को एक अजीब समस्या का सामना करना पड़ा। दिन में जब पटरियां बिछाई जातीं, तो रात होते-होते वे रहस्यमय ढंग से अस्त-व्यस्त हो जाती थीं। पुल निर्माण के दौरान भी कई अड़चनें आईं और ट्रेनों में लगातार खराबी आ रही थी। इस असामान्य स्थिति को देखकर रेलवे अधिकारियों ने एक समाधान खोजने के लिए मंदिर में पूजा-पाठ करवाया और लोदी बाबा को चढ़ावा चढ़ाया। इसके बाद सभी समस्याएं हल हो गईं और रेल परियोजना सफलतापूर्वक पूरी हुई। तब से यह मान्यता बन गई और आज भी रेलवे विभाग इस मंदिर को नियमित रूप से चढ़ावा चढ़ाता है।

लोदी बाबा की कहानी

लोदी बाबा के बारे में मान्यता है कि वह एक प्रसिद्ध पहलवान थे। एक बार वे एक शादी समारोह में गए थे, जहां पारंपरिक रस्म के तहत खूंटा उखाड़ने की परंपरा थी। जब बाबा ने खूंटा उखाड़ा, तो वह उनके मुंह पर आ लगा और उनके मुंह से खून निकलने लगा। इसके बाद बाबा घोड़े पर सवार हो कर वर्तमान मंदिर की जमीन पर आकर लेट गए, जहां उनका निधन हो गया। उनके निधन के बाद, बाबा की स्मृति में दलित समाज के लोगों और क्षेत्रवासियों ने मिलकर इस स्थान पर मंदिर का निर्माण करवाया।

मंदिर का महत्व और परंपरा

लोदी बाबा धाम न केवल धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि यहां की मान्यताएं और चमत्कार भी इसे एक प्रमुख आस्थास्थल बनाते हैं। इतिहासकार अर्जुन पांडे के अनुसार, आज भी रेलवे विभाग इस मंदिर को चढ़ावा चढ़ाता है। मंदिर की यह परंपरा अब पांचवीं पीढ़ी द्वारा निभाई जा रही है, जो बाबा की पूजा और सेवा करती है।

यह मंदिर संतान प्राप्ति या अन्य किसी भी मनोकामना के लिए श्रद्धालुओं का आस्था का केंद्र है। मान्यता है कि यदि कोई व्यक्ति सच्चे दिल से यहां आकर प्रार्थना करता है, तो उसकी इच्छाएं अवश्य पूरी होती हैं। हर साल इस मंदिर में बड़ा मेला लगता है, जिसमें लोग दूर-दूर से दर्शन करने आते हैं और विशाल भंडारे का आयोजन भी किया जाता है।

मंदिर की धार्मिक विविधता

लोदी बाबा धाम को लेकर एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि यह मंदिर सिर्फ हिंदू धर्म के अनुयायियों का ही नहीं, बल्कि मुस्लिम समुदाय के लोगों का भी आस्थास्थल है। दोनों धर्मों के लोग यहां आकर बाबा के आशीर्वाद से अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की उम्मीद करते हैं। मंदिर में होने वाली पूजा और भंडारे में लोगों की भागीदारी इसका उदाहरण है कि यह स्थान सामाजिक और धार्मिक विविधताओं के बीच एकता का प्रतीक बन चुका है।

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