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LG Electronics IPO: एलजी इंडिया के 11,607 करोड़ रुपये के आईपीओ पर उठे सवाल, टैक्स विवाद और रॉयल्टी पेमेंट्स को लेकर चिंता बढ़ी

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 09 Oct 2025, 12:00 AM | Updated: 09 Oct 2025, 12:00 AM

LG Electronics IPO: दक्षिण कोरिया की दिग्गज कंपनी एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स की भारतीय इकाई LG Electronics India Pvt. Ltd. का ₹11,607 करोड़ का इनिशियल पब्लिक ऑफर (IPO) निवेशकों के बीच चर्चा में है। लेकिन अब इस IPO को लेकर इनगॉवर्न रिसर्च सर्विसेज ने कुछ गंभीर सवाल उठाए हैं, जिससे बाजार में हलचल बढ़ गई है।

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OFS है ये आईपीओ, सारा पैसा जाएगा कोरिया- LG Electronics IPO

दरअसल, एलजी इंडिया का यह IPO पूरी तरह Offer-for-Sale (OFS) है। यानी कंपनी इससे कोई नया फंड नहीं जुटा रही। एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंक. (कोरियाई प्रमोटर) अपनी हिस्सेदारी बेच रहा है और इससे आने वाली पूरी राशि सीधे दक्षिण कोरिया जाएगी। इस वजह से भारत में कंपनी की ग्रोथ या विस्तार के लिए कोई नया निवेश नहीं होगा।

₹4,717 करोड़ की टैक्स देनदारियां, नेटवर्थ का 73%

इनगॉवर्न की रिपोर्ट के मुताबिक एलजी इंडिया पर ₹4,717 करोड़ की संभावित टैक्स देनदारियां (Contingent Liabilities) हैं, जो कंपनी की कुल नेटवर्थ का लगभग 73% है। ये देनदारियां मुख्य रूप से इनकम टैक्स, एक्साइज और सर्विस टैक्स से जुड़े पुराने विवादों से संबंधित हैं।

कंपनी ने इन मामलों के लिए कोई रकम रिज़र्व में नहीं रखी है। एलजी इंडिया का तर्क है कि चूंकि ये केस अभी कानूनी प्रक्रिया में हैं, इसलिए भुगतान की जरूरत नहीं समझी गई है।

रॉयल्टी पेमेंट्स पर भी सवाल, ट्रांसफर प्राइसिंग की जांच की आशंका

रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि कंपनी द्वारा कोरियाई प्रमोटर को रॉयल्टी और तकनीकी सेवा शुल्क के रूप में किए जा रहे भुगतान ट्रांसफर प्राइसिंग नियमों के दायरे में आ सकते हैं। अभी भी सिर्फ रॉयल्टी से जुड़ी ₹315 करोड़ की आकस्मिक देनदारी दिखायी गई है, जो भविष्य में और बढ़ सकती है।

रॉयल्टी का भुगतान पिछले तीन वर्षों में कंपनी के रेवेन्यू का 1.63% से 1.90% तक रहा है, और कंपनी के पास अधिकार है कि वह इसे वार्षिक टर्नओवर का 5% तक बढ़ा सकती है वो भी शेयरधारकों की मंजूरी के बिना।

ब्रांड लाइसेंस रद्द होने का भी खतरा

इनगॉवर्न ने एक और बड़ा जोखिम बताया है अगर एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंक. चाहे, तो वो सिर्फ 6 महीने के नोटिस पर ब्रांड लाइसेंस को खत्म या संशोधित कर सकता है। यानी एलजी इंडिया को भारत में LG ब्रांड के नाम से प्रोडक्ट बनाने और बेचने का हक खत्म हो सकता है। इससे कंपनी के पूरे ऑपरेशन पर असर पड़ सकता है।

IPO के बाद भी 85% कंट्रोल प्रमोटर के पास रहेगा

IPO के बाद भी एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंक. की एलजी इंडिया में 85% हिस्सेदारी बनी रहेगी। इसका मतलब यह है कि बोर्ड के फैसलों और पार्टनरशिप डील्स पर कोरियाई प्रमोटर का प्रभाव बरकरार रहेगा। इनगॉवर्न के अनुसार, इससे अल्पसंख्यक निवेशकों के अधिकार सीमित हो सकते हैं और उनका मुनाफा प्रभावित हो सकता है।

आज 9 अक्टूबर को बंद हो रहा है आईपीओ

ये आईपीओ आज यानी 9 अक्टूबर शाम 5 बजे बंद हो रहा है। ऐसे में निवेशकों के पास बहुत कम वक्त बचा है फैसला करने का कि वो इस IPO में पैसा लगाएं या नहीं। इनगॉवर्न की रिपोर्ट इस बात पर जोर देती है कि निवेशकों को सिर्फ ब्रांड देखकर नहीं, बल्कि कंपनी के अंदरूनी हालात को देखकर निवेश करना चाहिए।

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