जानें क्या कहती है IPC की धारा 42, स्थानीय विधि को लेकर कही गयी है ये बात

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 09 May 2024, 12:00 AM | Updated: 09 May 2024, 12:00 AM

भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) सीरीज में हम आपको IPC की धारा 42 के बारे में बताएंगे। IPC की ये धारा बहुत महत्वपूर्ण है इसलिए आपको इस धारा के बारे में जरूर जानना चाहिए। इस धारा में स्थानीय कानून पर चर्चा की गई है। आइए IPC की धारा 42 को विस्तार से जानते हैं।

और पढ़ें:  क्या कहती है आईपीसी की धारा 39 और क्या हैं सजा के प्रावधान? 

IPC की धारा 42 का विवरण

भारतीय दंड संहिता की धारा 42 हमें स्थानीय कानून का अर्थ समझाती है। आईपीसी की धारा 42 के अनुसार स्थानीय विधि वह विधि है जो भारत के केवल एक विशेष भाग पर ही लागू होता है। सरल शब्दों में कहें तो यह एक स्थानीय कानून है जो भारत के केवल एक हिस्से में ही प्रभावी या लागू होता है।

सरल भाषा में कहें तो मान लीजिए कि हरियाणा सरकार अपने राज्य में ‘हरियाणा भू-राजस्व अधिनियम’ कानून पारित करती है, तो वह कानून केवल हरियाणा के लोगों पर ही लागू होगा। यह कानून दूसरे राज्य या किसी अन्य क्षेत्र के लोगों पर लागू नहीं होगा।

वहीं, यह धारा केवल स्थानीय कानून की चर्चा करती है, इस धारा में किसी भी प्रकार की सजा का प्रावधान नहीं है।

क्या है भारतीय दंड संहिता

भारतीय दंड संहिता भारत के किसी भी नागरिक द्वारा किए गए विशिष्ट अपराधों को निर्दिष्ट और दंडित करती है। आपको बता दें कि यह बात भारतीय सेना पर लागू नहीं होती है। पहले जम्मू-कश्मीर में भारतीय दंड संहिता लागू नहीं होती थी। हालांकि, धारा 370 ख़त्म होने के बाद आईपीसी वहाँ भी लागू हो गया। पहले वहां रणबीर दंड संहिता (आरपीसी) लागू होती थी।

अंग्रेजों द्वारा लागू की गई थी भारतीय दंड संहिता

भारतीय दंड संहिता ब्रिटिश काल में लागू की गई थी। आईपीसी की स्थापना 1860 में ब्रिटिश भारत के पहले विधि आयोग के प्रस्ताव पर की गई थी। इसके बाद 1 जनवरी, 1862 को इसे भारतीय दंड संहिता के रूप में अपनाया गया। वर्तमान दंड संहिता, जिसे भारतीय दंड संहिता 1860 के नाम से जाना जाता है, से हम सभी परिचित हैं। इसका खाका लॉर्ड मैकाले ने तैयार किया था। समय के साथ इसमें कई बदलाव हुए हैं।

अगर पुलिस अधिकारी FIR लिखने करें मना

वहीं अगर कोई पुलिस अधिकारी कभी भी आपकी कोई FIR लिखने से इनकार करता है तो यह सीधे तौर पर गैरकानूनी होगा। अगर FIR दर्ज नहीं हुई तो आप एसपी से शिकायत कर सकते हैं। अगर आपकी शिकायत को नजरअंदाज किया जाता है तो आप कोर्ट में किसी भी मजिस्ट्रेट से शिकायत कर सकते हैं। क्योंकि यदि कोई लोक सेवक कानूनी गलती करता है तो वह न्यायालय द्वारा क्षमा योग्य नहीं है।

और पढ़ें: जानिए क्या कहती है आईपीसी की धारा 36 और क्या है सजा का प्रावधान 

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