Jharkhand Ban Gutkha and Pan Masala: झारखंड में गुटखा और पान मसाले पर पूरी तरह से बैन, जानें वो किस्सा जब दो भारतीय गुटखा किंग ने पाकिस्तानियों को चटाई गुटखे की लत

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 19 Feb 2025, 12:00 AM | Updated: 19 Feb 2025, 12:00 AM

Jharkhand Ban Gutkha and Pan Masala: झारखंड सरकार ने राज्य में गुटखा और पान मसाले की बिक्री, भंडारण और सेवन पर पूरी तरह से बैन लगाने का ऐलान किया है। यह फैसला मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के ‘स्वस्थ झारखंड’ के सपने को साकार करने के उद्देश्य से लिया गया है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने इस बड़े कदम की घोषणा करते हुए कहा, “यह बैन केवल एक नियम नहीं, बल्कि झारखंड के युवाओं को नशे की जकड़ से बचाने की क्रांतिकारी पहल है।”

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स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि गुटखा और पान मसाले के सेवन से कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ता है। झारखंड सरकार का यह फैसला जन स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने और युवाओं को नशे से दूर रखने के प्रयासों का हिस्सा है। उन्होंने यह भी कहा कि इस नियम को कड़ाई से लागू किया जाएगा और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

Jharkhand Ban Gutkha and Pan Masala dawood
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बैन के पीछे का उद्देश्य- Jharkhand Ban Gutkha and Pan Masala

इस फैसले के पीछे सरकार का उद्देश्य युवाओं को तंबाकू और नशे की लत से बचाना है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, “झारखंड के युवाओं को नशे की चपेट से बाहर लाना हमारी प्राथमिकता है।” राज्य में गुटखा और पान मसाले का सेवन युवाओं में तेजी से बढ़ रहा था, जिससे कैंसर और अन्य घातक बीमारियों के मामले भी बढ़ रहे थे।

सरकार ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों से चर्चा के बाद इस फैसले को लागू किया है। राज्य सरकार ने स्वास्थ्य विभाग और पुलिस प्रशासन को निर्देश दिया है कि इस बैन को सख्ती से लागू किया जाए।

चर्चाओं में गुटखा बैन, लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया

झारखंड सरकार के इस फैसले के बाद राज्य में गुटखा और पान मसाले को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। कुछ लोगों ने सरकार के इस कदम की सराहना की है, जबकि कुछ लोगों ने इसे व्यापारिक स्वतंत्रता पर हमला बताया है। स्वास्थ्य संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे स्वास्थ्य के लिए एक ऐतिहासिक कदम बताया है।

वहीं, गुटखा व्यापारियों ने इस बैन को उनके व्यवसाय पर गहरा आघात बताया है। गुटखा विक्रेताओं का कहना है कि सरकार को उनके व्यवसाय को बंद करने से पहले वैकल्पिक रोजगार की व्यवस्था करनी चाहिए थी।

भारत में गुटखा उद्योग और दाऊद कनेक्शन: पाकिस्तान तक फैला जाल

गुटखा उद्योग के इतिहास को देखें तो यह केवल एक उत्पाद नहीं बल्कि कॉरपोरेट जंग और अंडरवर्ल्ड के कनेक्शन की कहानी है। भारत के दो गुटखा किंग की दाऊद इब्राहीम के साथ दुश्मनी और समझौते ने इस कारोबार को पाकिस्तान तक फैला दिया। दाऊद और उसके भाई अनीस इब्राहीम ने भारतीय गुटखा ब्रांड को पाकिस्तान में लॉन्च कर कराची को गुटखा हब बना दिया।

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1971 तक पाकिस्तान में पान चबाने का रिवाज था, लेकिन दाऊद और अनीस की चालाक रणनीति और भारतीय गुटखा किंग्स के बीच की कॉरपोरेट दुश्मनी ने गुटखे को पाकिस्तान में भी लोकप्रिय बना दिया।

‘डोंगरी से दुबई तक’ किताब के अनुसार, अनीस इब्राहीम ने भारतीय गुटखा किंग्स को धमकी और लालच देकर गुटखा बनाने की तकनीक पाकिस्तान में स्थापित की। मुंबई से मशीनें दुबई के रास्ते कराची भेजी गईं और कराची में गुटखा मैन्युफैक्चरिंग प्लांट की नींव पड़ी।

झारखंड सरकार का क्रांतिकारी कदम और आगे की चुनौती

वहीं, झारखंड सरकार का यह फैसला राज्य में स्वास्थ्य जागरूकता को बढ़ावा देने और युवाओं को नशे की लत से बचाने के लिए एक क्रांतिकारी पहल है। गुटखा और पान मसाले के सेवन पर पूरी तरह से बैन लगाकर राज्य सरकार ने स्वस्थ समाज और सुरक्षित भविष्य की दिशा में कदम बढ़ाया है।

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