Israel-Iran war: मध्य पूर्व की सियासी आग अब सीमित टकराव नहीं रही। जो लड़ाई पहले ईरान बनाम अमेरिका और इजरायल तक मानी जा रही थी, वह अब पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले चुकी है। दुबई, अबू धाबी, रियाद, दोहा और मनामा जैसे शहर जो कभी लग्जरी और रॉयल लाइफस्टाइल के प्रतीक थे… आज मिसाइल अलर्ट और एयर डिफेंस सायरन की आवाज़ से गूंज रहे हैं। दुबई की पहचान माने जाने वाले Burj Khalifa को भी कथित तौर पर एक ईरानी मिसाइल ने लगभग निशाना बना लिया था।
12 देश सीधे जंग की जद में | Israel-Iran war
यह संघर्ष अब 12 देशों को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित कर चुका है अमेरिका, इजरायल, ईरान, बहरीन, सऊदी अरब, इराक, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, कुवैत, जॉर्डन, यमन और लेबनान। विशेषज्ञ इसे “12 राष्ट्रों का युद्ध” कह रहे हैं, जहां पारंपरिक सीमाएं धुंधली हो चुकी हैं और प्रॉक्सी नेटवर्क, सैन्य गठबंधन और क्षेत्रीय राजनीति सब एक साथ उलझ गए हैं।
ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को लेकर लंबे समय से तनाव था। इजरायल ईरान को अपनी सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा मानता रहा है, और अमेरिका उसका प्रमुख रणनीतिक सहयोगी है। जब अमेरिका–इजरायल ने संयुक्त सैन्य कार्रवाई शुरू की, तो यह साफ हो गया कि टकराव अब सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं रहेगा।
खामेनेई की मौत और “छाया युद्ध”
इस संघर्ष के बीच ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की पुष्टि हो चुकी है। हालांकि वे अब जीवित नहीं हैं, लेकिन उनकी क्षेत्रीय रणनीति और राजनीतिक महत्वाकांक्षा ने पूरे इलाके को अस्थिर कर दिया है। कुछ विश्लेषक इसे “खामेनेई की छाया युद्ध” कह रहे हैं जहां ईरान ने अपने प्रभाव को बढ़ाने के लिए वर्षों से प्रॉक्सी नेटवर्क तैयार किए।
शनिवार रात 11 बजे जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला किया, तब सुरक्षा विशेषज्ञों को लगा था कि जवाबी कार्रवाई सिर्फ इजरायल और खाड़ी में मौजूद अमेरिकी ठिकानों तक सीमित रहेगी। लेकिन ईरान ने अप्रत्याशित कदम उठाते हुए बहरीन, सऊदी अरब, इराक, यूएई, कतर, कुवैत और जॉर्डन तक मिसाइलें दाग दीं।
यूएई और सऊदी अरब को अपना मिसाइल डिफेंस सिस्टम सक्रिय करना पड़ा। कई जगहों पर धमाकों की आवाजें सुनी गईं और एयरस्पेस अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा।
होर्मुज स्ट्रेट और ऊर्जा संकट
ईरान ने अपनी ताकत दिखाने के लिए Strait of Hormuz को बंद करने की घोषणा की। यह दुनिया का सबसे अहम ऊर्जा मार्ग माना जाता है, जहां से वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का लगभग 20% गुजरता है।
शिपिंग डेटा के मुताबिक सैकड़ों जहाज इस जलडमरूमध्य के दोनों ओर रुक गए हैं। कम से कम 150 टैंकर… जो कच्चा तेल और एलएनजी लेकर जा रहे थे… खाड़ी के खुले समुद्र में लंगर डाले खड़े हैं।
ओमान ने बताया कि ‘स्काइलाइट’ नाम के एक टैंकर पर हमला हुआ, जिसमें चार नाविक घायल हुए। जहाज पर भारतीय और ईरानी क्रू मेंबर सवार थे। हमले की जिम्मेदारी स्पष्ट नहीं है, लेकिन यह उस वक्त हुआ जब ईरान ने रेडियो संदेशों के जरिए जहाजों को चेतावनी दी थी।
‘एक्सिस ऑफ रेसिस्टेंस’ की सक्रियता
ईरान के साथ यमन के हूती विद्रोही और लेबनान का हिजबुल्लाह खुलकर सामने आ गए हैं। ये संगठन ईरान की तथाकथित “एक्सिस ऑफ रेसिस्टेंस” का हिस्सा माने जाते हैं। गाजा में हमास और इराक-सीरिया की शिया मिलिशिया भी सक्रिय हो गई हैं।
ईरान इन समूहों के जरिए प्रॉक्सी वॉर लड़ता रहा है खुद सीधे शामिल हुए बिना अपने विरोधियों को कई मोर्चों पर उलझाता है। लाल सागर में जहाजों पर हमलों ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित किया है, जिससे यूरोपीय नौसेनाएं भी सतर्क हो गई हैं।
इजरायल और सऊदी का रुख
इजरायल के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ओरेन मार्मोरस्टीन ने आरोप लगाया कि ईरान नागरिक इलाकों को निशाना बना रहा है, जबकि इजरायल सिर्फ सैन्य ठिकानों पर हमला कर रहा है।
सऊदी अरब पर मिसाइल हमला अभूतपूर्व माना जा रहा है। सऊदी प्रेस एजेंसी के अनुसार, क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का फोन आया। ट्रंप ने सऊदी की सुरक्षा के लिए हरसंभव मदद देने का आश्वासन दिया और हमलों की निंदा की।
UN में ईरान का बयान
संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अमीर-सईद इरावानी ने कहा कि ईरान UN चार्टर के आर्टिकल 51 के तहत आत्मरक्षा का अधिकार इस्तेमाल कर रहा है। उनके मुताबिक, बड़े पैमाने पर हमलों के बाद जवाब देना ईरान का हक है।
मिडिल ईस्ट की यह आग अब सीमाओं से बाहर निकल चुकी है। गठबंधन टूट रहे हैं, नई दुश्मनियां जन्म ले रही हैं और ऊर्जा आपूर्ति से लेकर वैश्विक व्यापार तक सब कुछ प्रभावित हो रहा है। यह संघर्ष सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक स्थिरता के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है।
