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India Russia Relations: ‘रिश्ते खत्म करने की कोशिश नाकाम’, रूस ने अमेरिका को घेरा, भारत को बताया असली दोस्त

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 15 Sep 2025, 12:00 AM | Updated: 15 Sep 2025, 12:00 AM

India Russia Relations: अमेरिका की ओर से भारत पर भारी टैरिफ लगाए जाने और रूस से तेल आयात बंद करने के दबाव के बीच अब रूस की प्रतिक्रिया सामने आई है। रविवार, 14 सितंबर 2025 को रूसी विदेश मंत्रालय ने साफ शब्दों में कहा कि भारत ने वैश्विक दबावों के बावजूद जो स्टैंड लिया है, वह काबिल-ए-तारीफ है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि भारत के साथ रूस के रिश्ते मजबूत हैं और उन्हें कमजोर करने की कोई भी कोशिश नाकाम साबित होगी।

ये बयान उस वक्त आया है जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए उसके आयात पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने का एलान कर दिया है। उनका कहना है कि अगर भारत रूस से तेल खरीदना बंद नहीं करता, तो ये टैरिफ जारी रहेंगे।

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रूस का भारत के लिए समर्थन- India Russia Relations

रूसी विदेश मंत्रालय ने RTV को दिए गए अपने आधिकारिक बयान में कहा कि, “हम भारत का शुक्रिया अदा करते हैं कि उसने धमकियों और दबावों के बावजूद रूस के साथ बहुआयामी सहयोग जारी रखा। भारत ने अपनी भूमिका बहुत स्पष्ट कर दी है। सच कहें तो इस स्थिति में इससे बेहतर कुछ सोचना भी मुश्किल है।”

रूस ने यह भी कहा कि भारत और रूस के रिश्ते भरोसे और पारदर्शिता पर आधारित हैं, और यह रिश्ता इतनी आसानी से टूटने वाला नहीं है। मंत्रालय के मुताबिक, “भारत और रूस के बीच संबंध आत्मविश्वास से आगे बढ़ रहे हैं, और इसमें बाधा डालने वाले सभी प्रयास असफल साबित होंगे।”

ट्रंप के आरोपों पर भारत का जवाब

डोनाल्ड ट्रंप ने बीते हफ्तों में कई बार भारत पर यह आरोप लगाया कि वह रूस से सस्ता तेल खरीदकर अप्रत्यक्ष रूप से यूक्रेन पर रूस के हमलों को आर्थिक सहारा दे रहा है। हालांकि, ट्रंप खुद रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने से अब तक बचते रहे हैं।

भारत ने अमेरिका के इन आरोपों और टैरिफ को अनुचित बताते हुए इसकी निंदा की है। भारत ने साफ किया है कि रूस से तेल आयात देश की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ा मामला है और वह इसे राजनीतिक दबाव में आकर नहीं छोड़ेगा। भारत ने यह भी याद दिलाया कि यूरोप और अमेरिका खुद भी रूस से विभिन्न रूपों में व्यापार कर रहे हैं।

मोदी का साफ संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में तियानजिन में आयोजित एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिका के टैरिफ के बीच चीन और रूस के साथ मजबूत संबंध बनाने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर निर्णय लेता है और आगे भी ऐसा ही करता रहेगा।

‘संप्रभुता सबसे ऊपर’

रूसी विदेश मंत्रालय ने बयान में यह भी जोड़ा कि भारत का यह रुख इस बात का प्रमाण है कि वह अपनी “रणनीतिक स्वायत्तता” के साथ कोई समझौता नहीं करेगा। भारत और रूस की दोस्ती सिर्फ रणनीतिक साझेदारी नहीं, बल्कि यह एक ऐतिहासिक और पारंपरिक रिश्ता है, जो इस सोच पर आधारित है कि हर देश की संप्रभुता सर्वोपरि होती है।

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