भारत के किन-किन हिस्सों में खाई जाती है ‘चापड़ा’ यानी चीटी की चटनी

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 21 Apr 2023, 12:00 AM | Updated: 21 Apr 2023, 12:00 AM

Chapra Chutney : भारत का हर राज्य किसी न किसी खाने की चीज के जाना जाता है. जहाँ महाराष्ट वड़ा-पाव के लिए पंजाब सरसों दा साग-मक्के दी रोटी के लिए, दिल्ली चाट के लिए और साउथ के राज्य इडली डोसा के लिए फेमस है तो वहीँ भारत की एक जगह है जो चापड़ा के लिए मशहूर है और ये चापड़ा लाल चींटी की चटनी है. जो कई जगह बनायीं और खाई जाती हैं. वहीं इस पोस्ट के जरिए हम आपको इस बात की जानकारी देने जा रहे हैं कि भारत के किन किन हिस्सों में ‘चापड़ा’ यानी चीटी की चटनी खाई और बनाई जाती है.

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इस जगह बनती है चीटी की चटनी

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रिपोर्ट के अनुसार, ‘चापड़ा‘ यानी चीटी की चटनी छत्तीसगढ़ के बस्तर में काफी मशहूर है और यहाँ पर जहां ये चटनी बनायीं और खाई जाती है तो ओडिशा, झारखंड जैसे और भी कई राज्य है जहाँ के घने जंगलों वाले आदिवासी इलाको में इस ‘चापड़ा’ यानी चीटी की चटनी को बनाते हैं और खाते हैं. इन इलाकों में रहने वाले लोग पेड़ों पर रहने वाली लाल रंग की चींटियों को इकठ्ठा करके चटनी बनाते है. इसी के साथ स्थानीय आदिवासी इसे खुद तो खाते ही है और साथ ही इस चटनी को बाजार में बेचकर अच्छी कमाई भी करते हैं.

ऐसे बनती है  चीटी की चटनी

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आदिवासियों के मुताबिक, जंगलों में साल के पेड़ों से इन चींटियों को जमा किया जाता है और इसके बाद उन्हें पीसा जाता है और स्वाद के मुताबिक इसमें मिर्च और नमक मिलाया जाता है, जिससे इसका स्वाद चटपटा हो जाता है और फिर ये आदिवासी लोग इसे बड़े ही चाव से खाते हैं.

जानिए क्या है इस चटनी के फायदे

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वहीं कहा गया है कि ये चटनी बहुत फायदेमंद भी होती हैं. जो कि आदिवासियों को कई बिमारियों से बचाने में मदद करती है, आदिवासियों का मानना है कि, इससे कई बीमारियों में आराम मिलता है और बिमारियों से लड़ने की रोग-प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है,  इन आदिवासियों की मानें, तो चापड़ा चटनी के सेवन से मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियां भी ठीक हो जाती है. और आदिवासियों के लिए ये प्रोटीन का सस्ता और आसानी से उपलब्ध होने वाला साधन भी है.इसी के साथ साधारण बुखार होने पर आदिवासी पेड़ के नीचे बैठकर इन लाल चीटों से खुदको कटवाते हैं,  जिससे बुखार उतर जाता है. वहीं जहाँ भारत का आदवासी समुदाय इस चापड़ा को खाता है तो वहीँ विदेशों में भी इस चटनी को बनाया और खाया जाता है.

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