मसूरी में मौजूद है गुरु नानक देव जी की कुंडली, इतिहासकार ने की संरक्षित करने की मांग

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 10 Dec 2024, 12:00 AM | Updated: 10 Dec 2024, 12:00 AM

Guru Nanak Dev Ji Kundali: सिख धर्म के प्रथम गुरु और संस्थापक गुरु नानक देव जी की जयंती देश-दुनिया भर के सिख समुदाय के लिए खास अवसर होती है। गुरु नानक की शिक्षाओं और उनके जीवन के योगदान को याद करते हुए हर साल उनकी जयंती धूमधाम से मनाई जाती है। इसी बीच मसूरी में एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण धरोहर सामने आई है, जो न सिर्फ सिख धर्म के अनुयायियों बल्कि पूरे भारत के लिए गर्व की बात है। मसूरी में गुरु नानक देव जी की जन्म कुंडली मौजूद है (Kundali of Guru Nanak), जिसे अब संरक्षित करने की मांग की जा रही है।

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गुरु नानक देव जी की कुंडली: ऐतिहासिक महत्व- Guru Nanak Dev Ji Kundali

मसूरी के प्रसिद्ध इतिहासकार गोपाल भारद्वाज (Famous historian Gopal Bhardwaj) ने हाल ही में इस ऐतिहासिक दस्तावेज का जिक्र किया और बताया कि उनके पूर्वजों ने गुरु नानक देव जी की जन्म कुंडली बनाई थी, जो आज भी उनके पास सुरक्षित है। यह कुंडली न केवल सिख धर्म, बल्कि भारतीय इतिहास और संस्कृति के लिए भी एक महत्वपूर्ण धरोहर मानी जाती है। गोपाल भारद्वाज ने इस कुंडली को संरक्षित करने की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है।

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उन्होंने यह भी कहा कि उनके परिवार के सदस्य, विशेष रूप से उनके पिता और पूर्वजों ने भारतीय राजनीति और धर्म के कई महत्वपूर्ण हस्तियों की जन्म कुंडलियों का निर्माण किया था। इन हस्तियों में कुछ प्रमुख भारतीय नेताओं और धर्मगुरुओं के नाम शामिल हैं। आज भी इन कुंडलियों की असल प्रतिलिपियां उनके पास मौजूद हैं। गोपाल भारद्वाज ने अपने परिवार और पूर्वजों के इस कार्य को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि गुरु नानक देव जी की जन्म कुंडली को मसूरी गुरुद्वारा समिति को उपहार स्वरूप दिया जाएगा, ताकि यह धरोहर सभी के लिए उपलब्ध हो सके।

सरकार की अनदेखी: इतिहास को संरक्षित करने की जरूरत

इतिहासकार गोपाल भारद्वाज ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार की अनदेखी के कारण मसूरी और अन्य जगहों के ऐतिहासिक महत्व को संरक्षित नहीं किया जा सका है। उन्होंने कई बार मसूरी नगर पालिका और राज्य सरकार से अनुरोध किया कि ऐतिहासिक धरोहरों को संरक्षित करने के लिए एक म्यूजियम का निर्माण किया जाए। उनका कहना था कि यदि इन धरोहरों को संरक्षित किया जाता है, तो न केवल स्थानीय समुदाय को गर्व महसूस होगा, बल्कि देश और दुनिया भर के पर्यटक और शोधकर्ता भी इन ऐतिहासिक अवशेषों का लाभ उठा सकेंगे।

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गोपाल भारद्वाज का यह भी कहना था कि मसूरी का इतिहास बहुत समृद्ध है और यहां से जुड़े ऐतिहासिक घटनाएं, संस्कृति और धार्मिक पहलू देश के अन्य हिस्सों से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। यदि इन ऐतिहासिक तथ्यों और धरोहरों को संरक्षित नहीं किया जाता है, तो यह भारतीय संस्कृति और इतिहास का बड़ा नुकसान होगा।

मसूरी में गुरु नानक देव जी की जन्म कुंडली: भविष्य के लिए एक धरोहर

गुरु नानक देव जी की जन्म कुंडली न केवल सिख धर्म के अनुयायियों के लिए, बल्कि भारतीय संस्कृति और इतिहास के लिए भी महत्वपूर्ण है। यह दस्तावेज़ उन धार्मिक विचारों और शिक्षाओं की साक्षी है, जिनसे पूरे विश्व को शांति और सद्भावना का संदेश मिलता है। इनका संरक्षित होना न केवल सिख धर्म की पहचान को सम्मान देने वाला कदम होगा, बल्कि भारतीय संस्कृति और धर्म के प्रति हमारी जिम्मेदारी को भी दर्शाएगा।

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