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Gajendra Chauhan: वृंदावन पहुंचे महाभारत के युधिष्ठिर, प्रेमानंद महाराज से लिया आशीर्वाद

Shikha Mishra | Nedrick News

Published: 04 Feb 2026, 09:47 AM | Updated: 04 Feb 2026, 09:47 AM

Gajendra Chauhan: उत्तर प्रदेश में मथुरा जिले में यमुना किनारे बसा वृंदावन इन दिनों बड़े-बड़े लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है। यहां प्रेमानंद महाराज के दर्शन के लिए देश की कई जानी-मानी हस्तियां पहुंच रही हैं। हाल ही में टीवी सीरियल महाभारत में युधिष्ठिर का किरदार निभा चुके मशहूर अभिनेता गजेंद्र चौहान भी वृंदावन पहुंचे और प्रेमानंद महाराज से मुलाकात की।

वृंदावन पहुंचते ही गजेंद्र चौहान ने प्रेमानंद महाराज को प्रणाम किया और उनका आशीर्वाद लिया। दोनों के बीच धर्म, महाभारत और जीवन से जुड़े कई गहरे विषयों पर बातचीत हुई, जिसका वीडियो और चर्चा अब सोशल मीडिया पर भी खूब देखी जा रही है। तो चलिए इस खबर से जानते है प्रेमानंद महाराज और गजेंद्र चौहान के बीच हुई बातचीत विस्तार में

आपने धर्म के स्वरूप का अभिनय किया

मीडिया द्वारा मिली जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है कि मुलाकात के दौरान गजेंद्र चौहान ( Gajendra Chauhan actor) ने प्रेमानंद महाराज ( Premanand Maharaj) को बताया कि उन्होंने महाभारत में युधिष्ठिर का रोल निभाया था। इस पर प्रेमानंद महाराज ने मुस्कराते हुए कहा कि आपने हमारे धर्म के सबसे बड़े स्वरूप का अभिनय किया है। युधिष्ठिर धर्म के अवतार थे, इसलिए उनका जन्म हुआ था। यह सुनकर गजेंद्र चौहान भावुक नजर आए।

इसके बाद अभिनेता ने महाभारत का एक प्रसिद्ध संवाद सुनाया, जो पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का भी पसंदीदा था। उन्होंने कहा “कोई भी पुत्र, कोई भी पिता, कोई भी परिवार, कोई भी प्रतिज्ञा और कोई भी परंपरा राष्ट्र से ऊपर नहीं हो सकती।” इस पर प्रेमानंद महाराज ने कहा, “बहुत सुंदर… राष्ट्र से ऊपर कुछ नहीं होता।” गजेंद्र चौहान ने आगे समझाया कि जैसे भीष्म ने भीष्म प्रतिज्ञा ली थी, लेकिन युधिष्ठिर कहते हैं कि जहां राष्ट्र की बात आए, वहां प्रतिज्ञा भी तोड़नी पड़े तो तोड़नी चाहिए।

श्रीराम और वनवास का दिया उदाहरण

प्रेमानंद महाराज से बातचीत के दौरान गजेंद्र चौहान ने महाभारत का एक और प्रसंग बताते हुए कहा कि जब पांचाली वनवास जाने को तैयार नहीं थीं, तब युधिष्ठिर ने उन्हें श्रीराम का उदाहरण दिया था। उन्होंने कहा था कि श्रीराम जानते थे कि सोने का मृग असली नहीं है, फिर भी वे उसके पीछे गए। इसी तरह जो होना है, वह हमारे कर्मों का फल है। न उसे रोका जा सकता है और न टाला जा सकता है। मर्यादा का पालन करना ही धर्म है, इसलिए वनवास पर जाना ही पड़ेगा।

गजेंद्र चौहान ने महाभारत के अलावा कई फिल्मों और टीवी शोज़ में काम किया है, लेकिन लोग आज भी उन्हें युधिष्ठिर के किरदार के लिए ही जानते हैं। वे आखिरी बार 2006 में फिल्म मेरे जीवन साथी में नजर आए थे।

कौन हैं प्रेमानंद महाराज?

प्रेमानंद महाराज एक प्रसिद्ध आध्यात्मिक संत और कथावाचक हैं, जो भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति और सनातन धर्म के प्रचार के लिए जाने जाते हैं। वे वृंदावन से जुड़े हुए हैं और राधा-कृष्ण भक्ति, नाम जप और वैराग्य पर विशेष जोर देते हैं। वहीं उनके प्रवचन बहुत ही सरल और आम बोलचाल की भाषा में होते हैं, इसलिए युवा हों या गृहस्थ जीवन जीने वाले लोग सभी उनसे आसानी से जुड़ जाते हैं। वे कहते हैं कि सच्चा सुख धन या पद में नहीं, बल्कि भगवान के नाम स्मरण में है। कलियुग में नाम जप को वे सबसे सरल साधना मानते हैं।

आज के समय में प्रेमानंद महाराज सोशल मीडिया पर भी काफी लोकप्रिय हैं। यूट्यूब, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर उनके छोटे-छोटे प्रवचन वीडियो लाखों लोग देखते हैं और उनसे प्रेरणा लेते हैं। कुल मिलाकर गजेंद्र चौहान और प्रेमानंद महाराज की यह मुलाकात न सिर्फ एक कलाकार और संत की भेंट थी, बल्कि धर्म, मर्यादा और राष्ट्र के महत्व पर गहरी सोच देने वाली बातचीत भी रही।

Shikha Mishra

shikha@nedricknews.com

शिखा मिश्रा, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत फोटोग्राफी से की थी, अभी नेड्रिक न्यूज़ में कंटेंट राइटर और रिसर्चर हैं, जहाँ वह ब्रेकिंग न्यूज़ और वेब स्टोरीज़ कवर करती हैं। राजनीति, क्राइम और एंटरटेनमेंट की अच्छी समझ रखने वाली शिखा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और पब्लिक रिलेशन्स की पढ़ाई की है, लेकिन डिजिटल मीडिया के प्रति अपने जुनून के कारण वह पिछले तीन सालों से पत्रकारिता में एक्टिव रूप से जुड़ी हुई हैं।

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