Electricity subsidy news: सावधान! बिजली सब्सिडी जल्द ही हो सकती है बंद, अब खाली घरों को भी भरना होगा फिक्स्ड चार्ज

Shikha Mishra | Nedrick News New Delhi Published: 13 Mar 2026, 06:59 AM | Updated: 13 Mar 2026, 06:59 AM

Electricity subsidy news: अगर आप काफी समय से दिल्ली से बाहर हैं, तो सावधान! आपकी बिजली सब्सिडी जल्द ही बंद हो सकती है। दिल्ली सरकार मुफ्त बिजली योजना को लेकर एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। अगर आप दिल्ली में रहते नहीं हैं, फिर भी सब्सिडी का लाभ ले रहे हैं, तो तैयार हो जाइए अब आपकी जेब पर बोझ बढ़ने वाला है! सरकार अब इस योजना में कुछ नए नियम लागू करने की तैयारी में है, जिसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा जिनके घरों में बिजली की खपत बहुत कम या बिल्कुल नहीं होती।

बंद मकानों पर लग सकता है फिक्स्ड चार्ज

दरअसल, सरकार अब ऐसे बिजली कनेक्शनों पर नजर रख रही है जिनका इस्तेमाल नहीं हो रहा। कई लोग ऐसे हैं जिनके घर लंबे समय से बंद पड़े हैं, लेकिन उनके नाम पर बिजली का मीटर लगा हुआ है। अभी तक नियम यह था कि अगर किसी घर में 200 यूनिट तक बिजली खर्च होती है, तो पूरा बिल माफ हो जाता है और इसमें फिक्स्ड चार्ज (Fixed Charge) भी शामिल होता है। यह रकम सरकार खुद बिजली कंपनियों को देती थी। लेकिन अब नए प्रस्ताव के तहत, अगर किसी घर की बिजली खपत लगातार कई महीनों तक शून्य रहती है, तो ऐसे उपभोक्ताओं की सब्सिडी रोकी जा सकती है। इसका मतलब है कि उन्हें अब अपनी जेब से फिक्स्ड चार्ज देना होगा (जो लोड के हिसाब से करीब 40 से 250 तक हो सकता है)। अनुमान है कि दिल्ली में कुल 44.5 लाख उपभोक्ता ‘जीरो बिल’ का लाभ ले रहे हैं, जिनमें से एक बड़ा हिस्सा इन खाली घरों का है।

कौन होते हैं ‘डोरमेंट’ उपभोक्ता

बिजली विभाग के विश्लेषण में पता चला कि साल के कुछ महीनों खासतौर पर सर्दियों में हजारों कनेक्शनों पर बिजली की खपत बिल्कुल नहीं होती। ऐसे कनेक्शन ‘डोरमेंट’ यानी निष्क्रिय माने जा रहे हैं। कई मामलों में लोग दिल्ली से बाहर रहते हैं या फिर घर बंद पड़ा रहता है।

इसके अलावा यह भी सामने आया है कि कुछ लोग ज्यादा सब्सिडी पाने के लिए एक ही घर में अलग-अलग बिजली कनेक्शन ले लेते हैं। यही वजह है कि साल 2020 से 2025 के बीच दिल्ली में बिजली उपभोक्ताओं की संख्या करीब 12 लाख बढ़ गई, जबकि पानी के उपभोक्ताओं की संख्या उतनी नहीं बढ़ी।

सब्सिडी पर बढ़ता जा रहा खर्च

सरकार के इस कदम के पीछे एक बड़ी वजह सब्सिडी का लगातार बढ़ता खर्च है। जब यह योजना 2015-16 में शुरू हुई थी, तब सरकारी खजाने पर करीब 1,442 करोड़ का बोझ था। लेकिन समय के साथ यह खर्च तेजी से बढ़ा है 2021-22 में यह 3,250 करोड़ तक पहुंच गया और 2025-26 में इसके 4,000 करोड़ से भी ज्यादा होने का अनुमान है। वर्तमान में दिल्ली में कुल 62 लाख से ज्यादा बिजली उपभोक्ता हैं, जिनमें से करीब 58.72 लाख लोग सब्सिडी का फायदा उठा रहे हैं। खर्च का यही बढ़ता ग्राफ सरकार को ‘डोरमेंट’ या बंद पड़े घरों की सब्सिडी पर फिर से विचार करने के लिए मजबूर कर रहा है।

तय होगी न्यूनतम खपत की सीमा

मौजूदा नियमों के अनुसार, 200 यूनिट तक बिजली खर्च करने पर बिल पूरी तरह माफ होता है। 201 से 400 यूनिट तक की खपत पर 50 प्रतिशत की छूट (अधिकतम 800 रुपये तक) मिलती है, जबकि 401 यूनिट से ज्यादा खर्च होने पर सब्सिडी नहीं मिलती।

अब अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही बिजली की न्यूनतम खपत की एक सीमा तय की जाएगी। अगर किसी उपभोक्ता की मासिक खपत उस तय सीमा से कम रहती है, तो उसे सब्सिडी के दायरे से बाहर किया जा सकता है। सरकार का कहना है कि इस बदलाव का मकसद उन लोगों को ही सब्सिडी देना है जिन्हें वास्तव में इसकी जरूरत है, ताकि सरकारी खजाने पर बढ़ते बोझ को भी कम किया जा सके।

Shikha Mishra

shikha@nedricknews.com

शिखा मिश्रा, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत फोटोग्राफी से की थी, अभी नेड्रिक न्यूज़ में कंटेंट राइटर और रिसर्चर हैं, जहाँ वह ब्रेकिंग न्यूज़ और वेब स्टोरीज़ कवर करती हैं। राजनीति, क्राइम और एंटरटेनमेंट की अच्छी समझ रखने वाली शिखा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और पब्लिक रिलेशन्स की पढ़ाई की है, लेकिन डिजिटल मीडिया के प्रति अपने जुनून के कारण वह पिछले तीन सालों से पत्रकारिता में एक्टिव रूप से जुड़ी हुई हैं।

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