Buddha Purnima 2025: गौतम बुद्ध ने अपने शिष्य को क्यों भेजा एक वेश्या के घर? जानें पूरी कहानी

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 12 May 2025, 12:00 AM | Updated: 12 May 2025, 12:00 AM

Buddha Purnima 2025: 12 मई 2025 को पूरे देश में बुद्ध पूर्णिमा का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। यह दिन खासतौर पर गौतम बुद्ध की जयंती के रूप में मनाया जाता है। गौतम बुद्ध ने अपने जीवन में कई महत्वपूर्ण शिक्षाएं दीं, जिनका आज भी हमारे जीवन में गहरा प्रभाव है। बुद्ध के जीवन की एक महत्वपूर्ण घटना, जो आज भी लोगों को प्रेरित करती है, वह है उनके शिष्य आनंद और एक वेश्या के बीच हुई घटना, जिसे बुद्ध ने बहुत ही शांति और समझदारी से सुलझाया।

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गौतम बुद्ध की शिक्षाओं का महत्व- Buddha Purnima 2025

गौतम बुद्ध ने हमेशा अपनी शिक्षाओं में तात्त्विक दृष्टिकोण को प्रमुख माना, जिसमें सही आचरण, आत्मसंयम, और अंतर्मन की शांति को प्राथमिकता दी गई। उनका मानना था कि अगर मनुष्य अपने भीतर की दुनिया को ठीक कर ले, तो बाहरी दुनिया भी खुद-ब-खुद ठीक हो जाती है। बुद्ध की यह घटना उनके इस सिद्धांत का बेहतरीन उदाहरण है, जहां उन्होंने अपने शिष्य आनंद को एक वेश्या के घर रहने की अनुमति दी, और इस निर्णय के पीछे की गहरी सीख को सिखाया।

Buddha Purnima 2025
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शिष्य आनंद को वेश्या के घर रहने की अनुमति

गौतम बुद्ध और उनके शिष्य अक्सर यात्रा करते रहते थे। उनका एक नियम था कि वे मॉनसून के दौरान एक जगह पर दो महीने से ज्यादा नहीं रुकते थे, ताकि किसी भी परिवार पर बोझ न पड़े। एक दिन शिष्य आनंद, जो बहुत ईमानदार और अनुशासनप्रिय था, एक वेश्या के घर ठहरने का आमंत्रण प्राप्त करता है। उस समय वेश्या का कार्य बहुत ही विवादास्पद था, और ऐसे में आनंद के लिए यह फैसला लेना कठिन था कि वह उस महिला के घर ठहरे या नहीं।

आनंद ने बुद्ध से अनुमति मांगी, और बुद्ध ने उसे मुस्कुराते हुए अनुमति दी। बुद्ध का कहना था कि अगर वह महिला आनंद को इस तरह सादगी और स्नेह के साथ आमंत्रित कर रही है, तो उसे इसका जवाब नहीं देना चाहिए। हालांकि, अन्य शिष्यों को यह बात समझ में नहीं आई। उन्होंने बुद्ध से सवाल किया कि वह अपने शिष्य को एक वेश्या के घर कैसे भेज सकते हैं। बुद्ध ने कहा कि उन्हें तीन दिनों में इसका उत्तर मिलेगा, और इसके बाद आनंद उस महिला के घर रहने चला गया।

तीन दिनों की घटनाएं और बुद्ध का उत्तर

पहले दिन से ही शिष्यों ने आनंद और उस वेश्या के घर से गाने-बजाने की आवाजें सुनीं। दूसरे दिन नाचने की आवाजें भी आईं, और तीसरे दिन शिष्य आनंद और वेश्या को एक साथ नाचते-गाते देख सकते थे। यह सब देखकर शिष्यों ने यह तय कर लिया था कि आनंद अब किसी भी हालत में भिक्षुओं के साथ यात्रा पर नहीं लौटेगा। सभी शिष्य अपने विचारों में थे कि आनंद शायद अब अपनी राह बदल चुका है।

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लेकिन अगले दिन, जब शिष्य अपने बीच चर्चाओं में व्यस्त थे, आनंद अपने साथ एक महिला भिक्षुणी को लेकर आया। यह वही महिला थी, जो पहले वेश्या के रूप में थी। वह अब भिक्षुणी बन चुकी थी। शिष्यों को यह देखकर बहुत आश्चर्य हुआ, लेकिन बुद्ध मुस्कराए और आनंद की पीठ थपथपाई। उन्होंने शिष्यों से कहा, “अगर आपका चरित्र मजबूत है, तो कोई भी आपको भ्रष्ट नहीं कर सकता। असल में, अगर आप स्वयं पवित्र हैं, तो आप किसी भी व्यक्ति को पवित्र बना सकते हैं।”

बुद्ध की शिक्षा: विश्वास और इच्छाशक्ति का महत्व

गौतम बुद्ध ने इस घटना से यह महत्वपूर्ण शिक्षा दी कि यदि किसी व्यक्ति की इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो वह किसी भी परिस्थिति के प्रभाव में नहीं आता। यह कहानी हमें यह सिखाती है कि हमें अपनी आंतरिक शक्ति पर विश्वास रखना चाहिए। बाहरी परिस्थितियां हमें प्रभावित करने वाली नहीं होतीं, जब तक हम अपनी इच्छाशक्ति और मनोबल को मजबूत रखते हैं।

इसके अलावा, बुद्ध की यह शिक्षा हमें यह भी बताती है कि हमें दूसरों के बारे में बिना किसी पूर्वाग्रह के विचार करना चाहिए। वेश्या, जो समाज के दृष्टिकोण से अपमानित मानी जाती थी, अंत में एक भिक्षुणी बन गई, जिसने खुद को सुधार लिया। यह सिद्ध करता है कि किसी को भी उनके अतीत के आधार पर आंकना गलत है। हमें हमेशा लोगों को उनके वर्तमान और भविष्य के आधार पर समझना चाहिए।

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