Border Diaries: कभी कभी कोई सीन, कोई डायलोग, कोई गाना तो कोई कोई संगीत। इतिहास रच जाते है। लेकिन अक्सर इतिहास के पीछे की कहानी को लोग नहीं जानते है। एक ऐसा ही इतिहास रचा था 1997 में आई सुपर डुपर हिट वॉर ड्रामा फिल्म बॉर्डर के गाने संदेश आते है। इस गाने को सोनू निगम और रूप कुमार राठौर ने अपनी आवाज दी थी। और खूबसूरत संगीत से सजाया था अनु मलिक।
24 घंटे की रिकॉर्डिंग के बाद रो पड़ा था पूरा स्टूडियो
करीब 24 घंटे तक इस गाने की रिकॉर्डिंग चली। लेकिन इस गाने को सुपरहिट बनाने में अनु मलिक को बड़ी कीमत चुकानी पड़ी थी। अपने इस वीडियो में हम जानेंगे कि कैसे अनु मलिक ने एक ऐतिहासिक गाने को तैयार किया। और आखिर क्यों रूप कुमार राठौर की आंखो में आ गए थे आंसू.. क्यों रोया था पूरा स्टूडियो फूट फूट कर जानेंगे क्य़ा है इस ऐतिहासिक गाने को बनाने की कहानी।
1997 में जब बॉर्डर फिल्म बन रही थी, तो इसमें कई दिग्गज सितारे थे, इतने सारे सितारों को एक साथ लाकर एक वॉर ड्रामा फिल्म बनाना फिल्म के निर्माता निर्देशक जे पी दत्ता साहब के लिए उनका ड्रीम प्रोजेक्ट था.. ऐसे में वो चाहते थे कि इस फिल्म के डॉयलोग से लेकर हर एक सीन यादगार रहे, जिसमें गाने भी शामिल थे। लेकिन सबसे बड़ी विडंबना जुड़ी थी संदेशे आते है गाने से इस गाने को जावेद अख्तर साहब ने लिखा था, और अनु मलिक के कंधो पर थी इस गाने को कंपोज करने की वहीं जेपी दत्ता साहब का डर था कि ये गाना लोग सुनेंगे ही नहीं क्योंकि ये गाना 9 मिनट 4 सेकेंड लंबा था।
सोनू निगम और अनु मलिक ने बिना सोए रिकॉर्ड किया गाना
लेकिन फिर भी अनु मलिक ने गाने को बनाने का फैसला किया और इस गाने के लिए सोनू निगम, जो कि उस वक्त अपने करियर के शुरुआती दौर में थे, और रूप कुमार राठौर को प्लेबैक करने के लिए चुना। गाने को गाने के लिए बैकग्राउंड में करीब 15 लोग लगे थे… ऐसे में अनु मलिक ने तय कर लिया था कि वो पूरे गाने को एक ही दिन में रिकॉर्ड करेंगे और फिर शुरु हुई रिकॉर्डिंग इसकी रिकॉर्डिंग सुबह करीब 9 बजे शुरु हुई थी, जिसे परफेक्ट बनाने के लिए अगले दिन सुबह 5 बजे तक रिकॉर्डिंग की गई थी।
अनु मलिक के गले में बहुत दर्द
अभी हाल ही में अनु मलिक ने एक इंटरव्यू में अपने अनुभव को शेयर करते हुए बताया कि रिकॉर्डिंग से पहले रूप कुमार राठौर काफी घबरा गए थे, उन्हें लग रहा था कि वो इस गाने में परफेक्शन नहीं ला पायेंगे, पूरे कोरस के दौरान वहां मौजूद हर एक शख्स आंखो में आंसू भर कर गाने की रिकॉर्डिंग देख रहा था। एक वक्त में राठौर बाहर चले गए तो अनु मलिक उनके पास गए और उनका हौसला बढ़ाया कि वो परफेक्ट है उस गाने के लिए..और वो गाना इतिहास रचेगा.. रिकार्डिंग फिर शुरु हुई। अन्नु मलिक लगातार गाना गा रहे थे, वो काफी जोर जोर से बोल रहे थे, जिसके कारण एक वक्त ऐसा आया कि अनु मलिक के गले में बहुत दर्द हो गया, उन्हें खांसी आने लगी तो वो तुरंत वॉशरूम में खुद को फ्रैस करने गए थे, लेकिन वहां उन्होंने देखा कि उनके मुंह से खून आने लगा है।
अनु मलिक की हालात खराब
उन्होंने उस वक्त किसी को ये बात नहीं बताई क्योंकि सब घबरा जाते, रिकॉर्डिंग पूरी करने के बाद अनु मलिक की हालात खराब होने लगी तो उन्हें अस्पताल जाना पड़ा। हालांकि लगातार चीखने और थकान के कारण उनकी हालत ऐसी हो गई थी। अनु मलिक ने कहा कि उपरवाले के करम से उनके गले को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन उन्हें इस बात का गर्व है कि संदेशे आते है गाना वाकई में बहुत बड़ा हिट साबित हुआ, जिसने वाकई में इतिहास रच दिया था। इस गाने के लिए जावेद अख्तर साहब को बेस्ट गीतकार का अवॉर्ड मिला था। करीब 29 साल हो चुके है लेकिन ये गाना आज भी उतना ही सदाबहार है, वेल आपको ये गाना कैसा लगता है हमें कमेंट करके जरूर बतायें।
