Bihar Update: जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद को लेकर तस्वीर पूरी तरह साफ हो चुकी है। नामांकन की आखिरी तारीख 22 मार्च, रविवार को समाप्त हो गई, लेकिन इस पद के लिए केवल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ही नामांकन दाखिल किया। इस वजह से अब किसी भी तरह का चुनाव कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी और 24 मार्च को नीतीश कुमार को निर्विरोध राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित किया जाएगा।
नामांकन पत्रों की जांच सोमवार, 23 मार्च को होगी, जबकि नाम वापसी की आखिरी तारीख 24 मार्च तय की गई है। चूंकि कोई और उम्मीदवार नहीं है, इसलिए उसी दिन उन्हें आधिकारिक तौर पर जदयू का राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित कर दिया जाएगा।
चौथी बार संभालेंगे अध्यक्ष पद (Bihar Update)
नीतीश कुमार के लिए यह चौथी बार होगा जब वे पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालेंगे। इससे पहले वे 2016 में पहली बार अध्यक्ष बने थे, जब शरद यादव ने पद छोड़ा था। इसके बाद 2019 में उन्हें फिर से अध्यक्ष बनाया गया। 2020 में नीतीश कुमार ने स्वयं अध्यक्ष पद छोड़कर आरसीपी सिंह को जिम्मेदारी सौंप दी थी। इसके बाद आरसीपी सिंह के बाद ललन सिंह अध्यक्ष बने। लेकिन दिसंबर 2023 में ललन सिंह के इस्तीफे के बाद नीतीश कुमार ने फिर से पार्टी की कमान संभाली और तब से वे अध्यक्ष हैं।
नामांकन पहले ही दाखिल कर चुके थे
नीतीश कुमार ने 19 मार्च को दिल्ली के जंतर-मंतर स्थित जदयू कार्यालय में अपना नामांकन दाखिल किया था। उनके नामांकन पत्र दो सेटों में जमा किए गए थे, जिन्हें कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने चुनाव अधिकारी को सौंपा था।
राज्यसभा में भी निर्वाचित
इस बीच नीतीश कुमार राज्यसभा के लिए भी निर्वाचित हो चुके हैं और अगले महीने उनके दिल्ली जाने की चर्चा है। माना जा रहा है कि इस प्रक्रिया के बाद वे बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं, हालांकि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में उनकी भूमिका जारी रहेगी।
पार्टी में मजबूत पकड़
लगातार चौथी बार अध्यक्ष बनना यह दिखाता है कि जदयू में नीतीश कुमार की पकड़ अभी भी मजबूत है। पार्टी के अंदर उनके खिलाफ कोई चुनौती नहीं दिख रही है और संगठन पूरी तरह उनके नेतृत्व में एकजुट नजर आ रहा है।
नीतीश कुमार अब तक लगभग सात वर्षों तक जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके हैं। 2016 में शरद यादव के इस्तीफे के बाद वे पहली बार अध्यक्ष बने थे। इसके बाद 2019 में पुनः अध्यक्ष बनाए गए। 2020 में उन्होंने स्वयं अध्यक्ष पद छोड़कर आरसीपी सिंह को जिम्मेदारी सौंपी, फिर ललन सिंह के बाद दिसंबर 2023 में एक बार फिर पार्टी की कमान संभाली।
आगे का रास्ता
24 मार्च को निर्विरोध अध्यक्ष बनने के बाद नीतीश कुमार का कार्यकाल 2028 तक रहेगा। इसके साथ ही बिहार में मुख्यमंत्री पद पर नए चेहरे के आने की संभावनाएं भी बढ़ गई हैं। राज्यसभा में निर्वाचित होने और राष्ट्रीय अध्यक्ष बने रहने के कारण पार्टी के भीतर उनका नेतृत्व और अधिक मजबूत होगा।
जदयू के अंदर इस प्रकार की स्थिति यह स्पष्ट करती है कि पार्टी नेतृत्व में किसी भी प्रकार की विवाद या चुनौती फिलहाल नहीं दिख रही है और संगठन नीतीश कुमार के नेतृत्व में पूरी तरह एकजुट है।
