Bangladesh Cricket Board warning: बांग्लादेश क्रिकेट इन दिनों मैदान से ज्यादा विवादों की वजह से चर्चा में है। हाल ही में टी20 वर्ल्ड कप के लिए टीम को भारत न भेजने के फैसले के बाद उठा बवाल अभी थमा भी नहीं था कि अब एक नया विवाद सामने आ गया है। इस बार मामला सीधे तौर पर बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) और सरकार के बीच टकराव का है, जिसने ICC बैन की आशंका को जन्म दे दिया है।
सरकारी दखल पर BCB की सख्त चेतावनी (Bangladesh Cricket Board warning)
बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने सरकार को साफ संदेश दिया है कि उसके आंतरिक मामलों में किसी भी तरह का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बोर्ड का मानना है कि अगर यह दखल जारी रहा, तो इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) कड़ा कदम उठा सकती है, जिसमें बैन जैसी कार्रवाई भी शामिल हो सकती है।
BCB की यह चिंता यूं ही नहीं है। इससे पहले ICC सरकारी हस्तक्षेप के कारण जिम्बाब्वे और श्रीलंका जैसे देशों के क्रिकेट बोर्ड पर प्रतिबंध लगा चुका है। ऐसे में बांग्लादेश क्रिकेट को भी इसी तरह के खतरे का सामना करना पड़ सकता है।
चुनाव विवाद से शुरू हुई पूरी कहानी
यह पूरा विवाद अक्टूबर 2025 में हुए BCB चुनावों से जुड़ा हुआ है, जिसमें अमीनुल इस्लाम को दोबारा अध्यक्ष चुना गया था। हालांकि, इस चुनाव प्रक्रिया पर शुरुआत से ही सवाल उठते रहे हैं। 11 मार्च 2026 को खेल मंत्रालय ने पांच सदस्यीय जांच समिति का गठन किया, जिसका काम इन चुनावों में कथित गड़बड़ी और सत्ता के दुरुपयोग की जांच करना है। इस समिति को 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।
BCB ने जांच समिति भंग करने की मांग की
जांच समिति के गठन के बाद BCB ने कड़ा रुख अपनाया है। बोर्ड का कहना है कि वह एक लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई संस्था है और उसके कामकाज में बाहरी दखल ठीक नहीं है। इसी के चलते BCB ने नेशनल स्पोर्ट्स काउंसिल से मांग की है कि इस समिति को तुरंत भंग किया जाए। साथ ही, बोर्ड ने खेल मंत्रालय के साथ सीधे संवाद की इच्छा जताई है, ताकि इस पूरे मामले को बातचीत के जरिए सुलझाया जा सके और गजट नोटिफिकेशन के असली मकसद और असर को समझा जा सके।
चुनाव प्रक्रिया पर उठे कई सवाल
BCB चुनाव को लेकर कई बड़े आरोप भी सामने आए हैं। बांग्लादेश के पूर्व कप्तान तमीम इकबाल ने दावा किया था कि अध्यक्ष अमीनुल इस्लाम ने चुनाव से पहले खेल मंत्रालय को पत्र लिखकर कुछ जिलों के काउंसलरों में बदलाव की मांग की थी। इसके अलावा, नामांकन की तारीखें भी दो बार बढ़ाई गईं, जिससे विवाद और गहरा गया। इन परिस्थितियों के चलते तमीम इकबाल ने 1 अक्टूबर 2025 को अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली थी। हालांकि, अमीनुल इस्लाम ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था।
ढाका लीग का बहिष्कार, संकट गहराया
विवाद यहीं नहीं रुका। ढाका के कई क्रिकेट क्लब अधिकारियों, जिन्हें कैटेगरी-2 वोटर माना जाता है, ने मौजूदा बोर्ड को अवैध करार दे दिया है। इसके विरोध में उन्होंने 2025-26 ढाका लीग का बहिष्कार भी शुरू कर दिया है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल बांग्लादेश क्रिकेट एक बड़े संकट के दौर से गुजर रहा है। एक तरफ सरकार जांच के जरिए पारदर्शिता लाने की बात कर रही है, तो दूसरी ओर BCB इसे अपने अधिकारों में दखल मान रहा है।
