इस देश के कानूनी इतिहास में एक काला अध्याय माना जाता है ये किस्सा, जब 14 वर्षीय बच्चे को दी गई थी सजा-ए-मौत!
“सजा-ए-मौत” ये शब्द जब अदालत की चार दीवारी में पुकारा जाता है तो इसकी गूंज अपराधी तक नहीं आस पास के सभी लोगों के दिलों तक छू सी जाती है. हालांकि जब कोई व्यक्ति ऐसा खतरनाक या कहें कि घिनौना काम करता है तभी उसे अदालत द्वारा “सजा-ए-मौत” की सजा सुनाई जाती है. वहीं, आज...
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