Afghanistan-Pakistan TTP Dispute: दुनिया के बड़े संघर्षों जैसे रूस-यूक्रेन युद्ध और ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल के हालिया तनावों के बीच, भारत के पड़ोस में भी एक और जटिल स्थिति बन रही है। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच रिश्ते कभी करीबी मित्रता पर आधारित थे, लेकिन अब इन दोनों देशों के बीच दुश्मनी की जमीन मजबूत हो गई है। पाकिस्तान की सेना ने अफगानिस्तान के तालिबान शासन के खिलाफ सक्रिय मुहिम छेड़ रखी है, जिससे सीमा पर तनाव लगातार बढ़ रहा है।
चीन का मध्यस्थता प्रयास और पाकिस्तान की नकारात्मक प्रतिक्रिया (Afghanistan-Pakistan TTP Dispute)
पाकिस्तान को लंबे समय से अपने “सबसे करीबी दोस्त” के रूप में चीन का समर्थन प्राप्त है। आर्थिक और रणनीतिक रूप से चीन पर पाकिस्तान काफी निर्भर है, लेकिन इस बार चीन का प्रस्ताव कि वह अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम और शांति स्थापित कराने में मदद करेगा … पाकिस्तान ने सिरे से खारिज कर दिया।
पाकिस्तानी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने स्पष्ट कहा है कि वह तालिबान शासन के साथ अपनी वर्तमान “गैर-संपर्क (नॉन-एंगेजमेंट)” नीति जारी रखेगा। पाकिस्तान का तर्क है कि तालिबान शासन ने अभी तक अफगानिस्तान में सक्रिय ‘तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP)’ और अन्य प्रतिबंधित आतंकी समूहों की उपस्थिति को लेकर ठोस कदम नहीं उठाए हैं। इस कारण, पाकिस्तान तालिबान के साथ बातचीत के लिए तैयार नहीं है।
यह कदम चीन के लिए खासा निराशाजनक है क्योंकि इससे उसकी महत्वाकांक्षी परियोजना बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) का फ्लैगशिप प्रोजेक्ट, चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC), अफगानिस्तान तक विस्तार नहीं कर पा रहा है। पिछले साल चीन ने कड़ी मेहनत के बाद पाकिस्तान और अफगानिस्तान के साथ समझौता कर CPEC को काबुल तक जोड़ने का प्रयास किया था, लेकिन द्विपक्षीय तनाव ने इस योजना पर ग्रहण लगा दिया।
चीन की शांति प्रयासों की पूरी कहानी
चीन ने हाल ही में अपने अफगानिस्तान मामलों के विशेष दूत को काबुल और इस्लामाबाद भेजकर दोनों देशों के बीच तनाव कम करने का प्रयास तेज किया। चीन के विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, विदेश मंत्री वांग यी ने अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री मौलवी अमीर खान मुत्ताकी से फोन पर वार्ता की और स्थिति का मूल्यांकन किया।
चीन के बयान में कहा गया कि उसका विशेष दूत लगातार दोनों देशों का दौरा कर रहा है ताकि मध्यस्थता संभव हो सके। चीन ने पाकिस्तान और अफगानिस्तान से अनुरोध किया है कि वे संयम बरतें, आमने-सामने बातचीत करें और शांति व युद्धविराम की ओर बढ़ें।
TTP विवाद बना मुख्य अड़चन
हालांकि, पाकिस्तान ने चीन के प्रस्ताव की सराहना की, लेकिन स्पष्ट कर दिया कि जब तक तालिबान ठोस कदम नहीं उठाता, तब तक कूटनीतिक संपर्क बहाल करना संभव नहीं है। पाकिस्तान का कहना है कि तालिबान शासन लंबे समय से TTP और अन्य आतंकवादी समूहों को पनाह दे रहा है।
तालिबान अधिकारियों ने चीनी दूत के सामने यह रुख अपनाया कि TTP का मामला पाकिस्तान का आंतरिक मामला है और अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल किसी पड़ोसी देश के खिलाफ नहीं हो रहा। पाकिस्तान ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि TTP को पनाह देने के ठोस सबूत मौजूद हैं, जिनमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की रिपोर्टें भी शामिल हैं।
पाकिस्तानी अधिकारियों ने चीनी प्रतिनिधियों को बताया कि जब तक तालिबान पाकिस्तान की सुरक्षा चिंताओं को दूर करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाता, तब तक बातचीत की कोई संभावना कम ही है।
और पढ़ें: Iran crisis: ईरान संकट के बीच भारतीयों की दरियादिली, मदद के लिए आगे आए लोग; दूतावास ने जताया आभार
