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कर्नाटक हिजाब विवाद में मलाला यूसुफजई ने ऐसा क्या कह, जो उन पर बरस पड़े भाजपा के नेता? जानें पूरा मामला

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 09 Feb 2022, 12:00 AM | Updated: 09 Feb 2022, 12:00 AM

कर्नाटक में जारी हिजाब विवाद ने इस वक्त पूरे देश में तूल पकड़ा हुआ है। सोशल मीडिया पर तमाम लोग इस पर तरह तरह की प्रतिक्रियाएं देते नजर आ रहे हैं। वहीं अब ये मुद्दा बाहर के देशों में भी सुर्खियां बटोरने लगा है। दरअसल, पाकिस्तान की सोशल एक्टिविस्ट मलाला यूसुफजई भी इस मामले में कूद पड़ी है। मलाला ने हिजाब विवाद को लेकर रिएक्शन देते हुए इसे भयावह बताया। साथ ही साथ उन्होंने भारत के नेताओं से अपील भी की।

मलाला ने हिजाब विवाद पर क्या कहा?

कर्नाटक के उड्डपी से शुरू हुए हिजाब विवाद में पाकिस्तानी सोशल एक्टिविस्ट और नोबेल पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई की भी एंट्री हो गई है। मलाला ने सोशल मीडिया के जरिए इस विवाद को भयावह बताया और भारतीय नेताओं से अपील की है कि वो भारतीय मुस्लिम महिलाओं को हाशिए पर जाने से रोकें।

मामले को लेकर मलाला ने ट्वीट करते हुए कहा- “हिजाब पहनकर लड़कियों को कॉलेज जाने से रोकना भयावह है। महिलाओं के कम या ज्यादा कपड़े पहनने पर आपत्ति जताई जा रही है। भारतीय नेताओं को मुस्लिम महिलाओं को हाशिए पर जाने से रोकना चाहिए।

हिजाब को लेकर विवाद का क्या है पूरा मामला?

पूरे विवाद की शुरुआत उस वक्त हुई थी, जब जनवरी में उड्डपी के एक सरकारी कॉलेज में 6 छात्राओं ने हिजाब पहनकर कॉलेज गई थी। विवाद इसी बात को लेकर था कि कॉलेज प्रशासन की तरफ से हिजाब पहनने को मना किया गया। बावजूद इसके लड़कियां हिजाब पहनकर कॉलेज गईं। कॉलेज प्रबंधन ने प्रतिबंध लगाने के पीछे नए यूनिफार्म लॉ का हवाला दिया। उड्डपी के कॉलेज से शुरू हुआ ये विवाद अब उडुपी के अन्य सरकारी कॉलेजों में भी फैल चुका है। 

बीजेपी नेता मलाला के बयान पर भड़के

हालांकि हिजाब विवाद को लेकर मलाला की टिप्पणी कुछ लोगों को पसंद नहीं आई। खासतौर पर बीजेपी के नेताओं ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई। बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने कहा- “अफगानिस्तान, ईरान, पाकिस्तान में हिजाब नहीं पहनने पर मुस्लिम लड़कियों की हत्या की जा रही है। पाकिस्तान में सिर्फ हिंदू होने की वजह से हिंदू, सिख लड़कियों को मारा जा रहा है। उन्होंने वास्तविक मुद्दों पर कभी एक शब्द भी नहीं बोला। मलाला एक कट्टरपंथी इस्लामी जिहादी एजेंडा चला रही है।

वहीं, BJP नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने भी मलाला से सवाल करते हुए पूछा कि उन्होंने पाकिस्तान में नाबालिग हिंदू सिख लड़कियों के जबरन धर्म परिवर्तन जैसे मुद्दों पर कभी बात क्यों नहीं की। सिरसा ने कहा- “अजीब है! मलाला ने पाकिस्तान में नाबालिग हिंदू सिख लड़कियों के जबरन धर्मांतरण जैसे अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर कभी बात नहीं की, लेकिन आज वो तथ्यों की पुष्टि किए बिना ट्वीट कर रही है!

हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई

बता दें कि हिजाब विवाद का मामला बढ़ते बढ़ते हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है। जज ने बीते दिन पर सुनवाई करते हुए कहा था कि हम कानून के मुताबिक चलेंगे, किसी के जुनून या भावनाओं से नहीं। जो संविधान कहेगा, हम वही करेंगे। संविधान ही हमारे लिए भगवदगीता है। इस मामले पर कोर्ट में सुनवाई जारी है। 

कौन हैं मलाला युजूफजई?

बता दें कि मलाला का जन्म पाकिस्तान में हुआ। वो एक जानी मानी सामाजिक कार्यकर्ता है। साल 2012 में मलाला तालिबान की गोली का शिकार हो गई थीं। तब उनकी उम्र काफी कम थीं। मलाला हमेशा ही पाकिस्तान की महिलाओं के अधिकारों को लेकर आवाज उठाती हैं। उनके द्वारा किए गए कामों को देखते हुए 2014 में मलाला को नोबेल शांति पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। 

मलाला 1997 में पाकिस्तान के खैबर पख्‍तूनख्‍वा प्रांत की स्वात घाटी में पैदा हुई। उनके पिता का नाम जियाउद्दीन यूसुफजई है। स्वात घाटी में साल 2007 से लेकर 2009 तक तालिबानियों का खूब आतंक देखने को मिला था। तब तालिबान के आतंकियों के डर की वजह से लड़कियों ने स्कूल जाना बंद कर दिया। 

बात साल 2008 की है, जब स्वात घाटी को तालिबान ने अपने कब्जे में ले लिया और वहां कई चीजों पर बैन लगा दिया। साल के अंत तक वहां पर कई स्कूलों को बंद करा दिया। जिसके बाद मलाला के पिता उनको  पेशावर ले गए और वहां नेशनल प्रेस के सामने भाषण दिया जिसका शीर्षक था- हाउ डेयर द तालिबान टेक अवे माय बेसिक राइट टू एजुकेशन? उनका ये भाषण काफी लोकप्रिय हुआ। उस वक्त मलाला केवल 11 साल की थीं। 

2009 में मलाला ने ‘गुल मकई’ के नाम से BBC के लिए डायरी लिखी। इसमें उन्होंने तालिबान के अत्याचारों के बारे में बताया। दिसंबर 2009 में मलाला के पिता ने उनकी पहचान को सार्वजनिक कर दिया था, जिसके बाद वो पहली बार दुनिया की नजर में आईं। 

जब हुई आतंकियों की गोली का शिकार

इसके बाद साल 2012 में तालिबान के आतंकी उस बस पर सवार हो गए थे, जिसमें मलाला अपने स्कूल जाया करती थीं। बस में उन्होंने पूछा कि मलाला कौन हैं? उस वक्त सब चुप रहे, लेकिन इन आतंकियों की निगाह मलाला की तरफ घूमी और उसे पहचान लिया। इसके बाद उन आतंकियों ने मलाला पर एक गोली चलाई जो उसके सिर में जा लगी। 9 अक्टूबर 2012 को मलाला को गोली मारी गई थीं। इस दौरान गंभीर रूप से घायल मलाला हुई मलाला को इलाज के लिए ब्रिटेन ले जाया गया। क्वीन एलिजाबेथ अस्पताल में उनका इलाज हुआ। जिसके बाद ठीक होकर वो देश लौटीं। 

पिछले साल ही मलाला शादी के बंधन में बंध गई। उन्होंने असर मलिक नाम के एक शख्स से निकाह कर लिया। 

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