क्या आप यकीन करेंगे कि जिस सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर को हजारों लोग फॉलो करते थे, वह असल में एक सजायाफ्ता कातिल था? यह कहानी है सलीम वास्तिक (Salim Vastik) की, जो सालों तक अपनी पहचान बदलकर कैमरे के सामने समाज सुधार की बातें करता रहा।
लेकिन हाल ही में हुए एक हमले ने उसकी पोल खोल दी और पुलिस को उस खौफनाक सच तक पहुँचा दिया जिसे वह 31 साल से छुपा रहा था।
सच ही कहा गया है कि ‘कानून के हाथ लंबे होते हैं’ और सलीम खान उर्फ सलीम वास्तिक की गिरफ्तारी ने इसे एक बार फिर साबित कर दिया है। तो चलिए इस लेख के जरिए जानते हैं कैसे हिंदूवादी नेता की छवी के पीछे छिपे इस अपराधी का भांडा फूटा।
पुलिस की कार्रवाई
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक बेहद चौंकाने वाला मामला सुलझाया है। 31 साल पुराने (1995) के किडनैपिंग और मर्डर केस में उम्रकैद की सजा पाए और पिछले 24 सालों से फरार चल रहे आरोपी सलीम खान उर्फ सलीम वास्तिक (Salim Vastik) को आखिरकार गिरफ्तार कर लिया गया है।
क्या थी 1995 की वारदात?
पुलिस के मुताबिक सलीम खान (Salim Vastik) ने 1995 में मार्शल आर्ट ट्रेनर रहते हुए अपने ही छात्र, 13 साल के संदीप बंसल का अपहरण किया था। आरोपी ने बच्चे की रिहाई के बदले 30 हजार रुपये की फिरौती मांगी थी।
बताया जाता है कि परिवार ने पैसे देने की कोशिश भी की थी, लेकिन पकड़े जाने के डर से आरोपी ने बेरहमी से बच्चे का गला रेतकर उसकी हत्या कर दी और शव मुस्तफाबाद के एक नाले में फेंक दिया।
सजा और शातिराना फरारी
इस जघन्य अपराध के लिए 1997 में कोर्ट ने सलीम को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। लेकिन साल 2000 में वह पैरोल (जमानत) पर बाहर आया और फिर कभी वापस नहीं लौटा।
हैरानी की बात तो यह है कि उसने न सिर्फ अपनी पहचान बदली, बल्कि शातिर तरीके से खुद को सरकारी दस्तावेजों में ‘मृत’ तक घोषित करवा दिया ताकि कानून उसे कभी ढूंढ न पाए।
नई जिंदगी और शोहरत
अपनी मौत का झूठा ड्रामा रचने के बाद, फरारी के दौरान सलीम खान ने अपनी पूरी जिंदगी ही बदल ली। उसने ‘सलीम वास्तिक’ (Salim Vastik) के नाम से सोशल मीडिया पर नई पहचान बनाई और धर्म, इस्लाम व राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर वीडियो बनाकर एक चर्चित यूट्यूबर बन गया।
धीरे-धीरे उसे इतनी प्रसिद्धि मिली कि उसकी लोकप्रियता का आलम यह था कि उसे एक बॉलीवुड बायोपिक तक का ऑफर मिल गया, जिसमें उसने अभिनय भी किया।
कैसे खुला राज?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा मोड़ इसी साल फरवरी में आया, जब गाजियाबाद के लोनी इलाके में सलीम के ऑफिस पर दो लोगों ने जानलेवा हमला किया। इस हमले में उसका गला रेत दिया गया और वह गंभीर रूप से घायल हो गया।
जब यह खबर सुर्खियों में आई और वह पुलिस की सुरक्षा (PSO) के घेरे में आया, तो दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को शक हुआ। पुलिस ने जब पुराने रिकॉर्ड्स और फिंगरप्रिंट्स का मिलान किया, तो ‘यूट्यूबर सलीम वास्तिक’ का असली चेहरा बेनकाब हो गया।
सलीम से सख्ती से की पूछताछ
यहीं से पुलिस को शक हुआ कि यह वही फरार आरोपी है। पुलिस ने उसके ठीक होने का इंतजार किया और फिर पुराने रिकॉर्ड और सबूतों के आधार पर उसे गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि सलीम खान (Salim Vastik) उस वक्त एक स्कूल में मार्शल आर्ट्स सिखाता था और बच्चे उसे ‘मास्टरजी’ कहकर पुकारते थे। यही वजह थी कि 13 साल के संदीप बंसल ने उस पर भरोसा किया और उसके साथ चला गया।
जब बच्चा घर नहीं लौटा, तो एक पड़ोसी ने पुलिस को बताया कि उसने बच्चे को ‘मास्टरजी’ यानी सलीम के साथ जाते देखा था। इसी सुराग के बाद जब पुलिस ने सलीम से सख्ती से पूछताछ की, तो उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया और उस जगह की निशानदेही की जहाँ उसने बच्चे का शव फेंका था।
सलीम की असली पहचान आई सामने
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की टीम लंबे समय से ऐसे शातिर और फरार अपराधियों को पकड़ने के लिए एक विशेष अभियान चला रही थी।
आखिरकार, आधुनिक तकनीक, पुराने रिकॉर्ड्स के फिंगरप्रिंट और दशकों पुरानी तस्वीरों के गहन मिलान (Matching) की मदद से सलीम की असली पहचान सामने आ ही गई।
24 सालों से फरार आरोपी गिरफ्तार
सलीम वास्तिक (Salim Vastik) की यह कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है, जिसने 24 सालों तक एक ‘मुर्दा’ बनकर कानून की आंखों में धूल झोंकी। लेकिन लोनी में हुए हमले और पुलिस की सतर्कता ने यह साबित कर दिया कि अपराधी चाहे अपनी पहचान कितनी भी क्यों न बदल ले, उसके गुनाह उसका पीछा कभी नहीं छोड़ते।
करीब तीन दशक तक कानून से बचने के बाद अब आरोपी पुलिस की गिरफ्त में है। फिंगरप्रिंट मैच होते ही पुलिस ने जाल बिछाया और 24-25 अप्रैल की रात को उसे गिरफ्तार कर लिया। 24 साल तक कानून की आंखों में धूल झोंकने वाला सलीम खान अब फिर से सलाखों के पीछे है, जहाँ उसे अपने किए की सजा भुगतनी होगी।






























