उम्मीदवार की घोषणा से नाराज उद्धव गुट ने कांग्रेस को कहा मतलबी और दे डाली बड़ी सलाह | Maharashtra MVA alliance dispute

Nandani | Nedrick News Maharashtra Published: 06 Apr 2026, 12:51 PM | Updated: 06 Apr 2026, 12:51 PM

Maharashtra MVA alliance dispute: महाराष्ट्र की राजनीति में महाविकास आघाड़ी (MVA) के भीतर तनाव बढ़ता जा रहा है। उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) और कांग्रेस के बीच तल्खी अब सार्वजनिक हो गई है। ठाकरे गुट ने अपने मुखपत्र सामना में कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए उसे ‘कुढ़ने वाला’ और ‘मतलबी’ तक कह डाला। यह बयान राज्यसभा और विधान परिषद चुनावों के समीकरणों के बीच आया है।

सामना में उद्धव ठाकरे गुट ने साफ लिखा है कि विधान परिषद के आगामी चुनावों के लिए उद्धव जो नाम देंगे, उस पर उनका पूरा समर्थन रहेगा। लेकिन इस कदम से राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी (NCP) के नेतृत्व वाली शरद पवार की भूमिका के कारण महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल नाराज हो गए हैं। सामना में यह भी कहा गया कि प्रदेश अध्यक्ष को अपने हाईकमान से सवाल करने चाहिए क्योंकि राज्यसभा चुनाव के समय वह कोई निर्णायक स्थिति में नहीं थे।

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सामना का कांग्रेस पर कटाक्ष | Maharashtra MVA alliance dispute

सामना में लिखा गया, ‘हां, यह सच है कि चर्चा होनी चाहिए, लेकिन कांग्रेस पार्टी में चर्चा किससे होनी चाहिए? राज्यसभा चुनाव के समय राज्य का कांग्रेस नेतृत्व कोई भी निर्णय लेने की स्थिति में नहीं था। वे भी शिवसेना की तरह राज्यसभा चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन हाईकमान ने शरद पवार की उम्मीदवारी को समर्थन दिया। इस स्थिति में प्रदेश अध्यक्ष को दिल्ली जाकर अपने हाईकमान से जवाब लेना चाहिए था।’

इस तरह सामना में स्पष्ट संदेश दिया गया कि कांग्रेस ने निर्णय प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी नहीं निभाई और उसी वजह से गठबंधन में खींचतान हुई।

छोटे दलों का सम्मान करने की सलाह

सामना में कांग्रेस को छोटे और क्षेत्रीय दलों को सम्मान देने की सलाह भी दी गई। इसमें लिखा गया कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को 100 सीटें मिलीं और राहुल गांधी विपक्ष के नेता बने। महाराष्ट्र ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। MVA ने 48 में से 30 सीटें जीतीं, जिसमें से कांग्रेस की हिस्सेदारी सिर्फ 13 सीटों की रही। सामना में कहा गया कि कांग्रेस ने क्षेत्रीय दलों का इस्तेमाल केवल सहयोगी बैसाखियों की तरह किया, जिससे गठबंधन को नुकसान उठाना पड़ा।

सामना में यह भी जोड़ा गया कि शिवसेना (UBT) हमेशा कांग्रेस का राष्ट्रीय स्तर पर समर्थन करेगी, लेकिन कांग्रेस को क्षेत्रीय दलों को समान भागीदार का दर्जा देना चाहिए। क्षेत्रीय दल स्थानीय मुद्दों को उठाने में अहम भूमिका निभाते हैं और उन्हें अवसर और सम्मान देने की जरूरत है।

राजनीतिक संदेश

सामना का यह रुख साफ संकेत है कि MVA के भीतर संबंध अभी भी संवेदनशील हैं। शिवसेना-यूबीटी ने कांग्रेस को स्पष्ट संदेश दिया कि गठबंधन में सहयोग और सम्मान दोनों जरूरी हैं, केवल सीटों और ताकत के खेल से काम नहीं चलेगा। यह बयान आगामी विधान परिषद चुनाव और विधानसभा स्तर की रणनीति पर भी असर डाल सकता है।

इस घटनाक्रम से यह स्पष्ट है कि महाराष्ट्र की सत्ता की बागडोर में साथी दलों के बीच तालमेल और सम्मान कितना अहम है। कांग्रेस और शिवसेना दोनों को अब रणनीति बदलनी होगी ताकि MVA का गठबंधन मजबूत बने और भविष्य की चुनावी लड़ाइयों में उनके लिए कोई झटका न बने।

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Nandani

nandani@nedricknews.com

नंदनी एक अनुभवी कंटेंट राइटर और करंट अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में चार वर्षों का सक्रिय अनुभव है। उन्होंने चितकारा यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में की, जहां स्क्रिप्ट लेखन के दौरान कंटेंट राइटिंग और स्टोरीटेलिंग में उनकी विशेष रुचि विकसित हुई। वर्तमान में वह नेड्रिक न्यूज़ से जुड़ी हैं और राजनीति, क्राइम तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर मज़बूत पकड़ रखती हैं। इसके साथ ही उन्हें बॉलीवुड-हॉलीवुड और लाइफस्टाइल विषयों पर भी व्यापक अनुभव है।

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