Maharashtra MVA alliance dispute: महाराष्ट्र की राजनीति में महाविकास आघाड़ी (MVA) के भीतर तनाव बढ़ता जा रहा है। उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) और कांग्रेस के बीच तल्खी अब सार्वजनिक हो गई है। ठाकरे गुट ने अपने मुखपत्र सामना में कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए उसे ‘कुढ़ने वाला’ और ‘मतलबी’ तक कह डाला। यह बयान राज्यसभा और विधान परिषद चुनावों के समीकरणों के बीच आया है।
सामना में उद्धव ठाकरे गुट ने साफ लिखा है कि विधान परिषद के आगामी चुनावों के लिए उद्धव जो नाम देंगे, उस पर उनका पूरा समर्थन रहेगा। लेकिन इस कदम से राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी (NCP) के नेतृत्व वाली शरद पवार की भूमिका के कारण महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल नाराज हो गए हैं। सामना में यह भी कहा गया कि प्रदेश अध्यक्ष को अपने हाईकमान से सवाल करने चाहिए क्योंकि राज्यसभा चुनाव के समय वह कोई निर्णायक स्थिति में नहीं थे।
सामना का कांग्रेस पर कटाक्ष | Maharashtra MVA alliance dispute
सामना में लिखा गया, ‘हां, यह सच है कि चर्चा होनी चाहिए, लेकिन कांग्रेस पार्टी में चर्चा किससे होनी चाहिए? राज्यसभा चुनाव के समय राज्य का कांग्रेस नेतृत्व कोई भी निर्णय लेने की स्थिति में नहीं था। वे भी शिवसेना की तरह राज्यसभा चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन हाईकमान ने शरद पवार की उम्मीदवारी को समर्थन दिया। इस स्थिति में प्रदेश अध्यक्ष को दिल्ली जाकर अपने हाईकमान से जवाब लेना चाहिए था।’
इस तरह सामना में स्पष्ट संदेश दिया गया कि कांग्रेस ने निर्णय प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी नहीं निभाई और उसी वजह से गठबंधन में खींचतान हुई।
छोटे दलों का सम्मान करने की सलाह
सामना में कांग्रेस को छोटे और क्षेत्रीय दलों को सम्मान देने की सलाह भी दी गई। इसमें लिखा गया कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को 100 सीटें मिलीं और राहुल गांधी विपक्ष के नेता बने। महाराष्ट्र ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। MVA ने 48 में से 30 सीटें जीतीं, जिसमें से कांग्रेस की हिस्सेदारी सिर्फ 13 सीटों की रही। सामना में कहा गया कि कांग्रेस ने क्षेत्रीय दलों का इस्तेमाल केवल सहयोगी बैसाखियों की तरह किया, जिससे गठबंधन को नुकसान उठाना पड़ा।
सामना में यह भी जोड़ा गया कि शिवसेना (UBT) हमेशा कांग्रेस का राष्ट्रीय स्तर पर समर्थन करेगी, लेकिन कांग्रेस को क्षेत्रीय दलों को समान भागीदार का दर्जा देना चाहिए। क्षेत्रीय दल स्थानीय मुद्दों को उठाने में अहम भूमिका निभाते हैं और उन्हें अवसर और सम्मान देने की जरूरत है।
राजनीतिक संदेश
सामना का यह रुख साफ संकेत है कि MVA के भीतर संबंध अभी भी संवेदनशील हैं। शिवसेना-यूबीटी ने कांग्रेस को स्पष्ट संदेश दिया कि गठबंधन में सहयोग और सम्मान दोनों जरूरी हैं, केवल सीटों और ताकत के खेल से काम नहीं चलेगा। यह बयान आगामी विधान परिषद चुनाव और विधानसभा स्तर की रणनीति पर भी असर डाल सकता है।
इस घटनाक्रम से यह स्पष्ट है कि महाराष्ट्र की सत्ता की बागडोर में साथी दलों के बीच तालमेल और सम्मान कितना अहम है। कांग्रेस और शिवसेना दोनों को अब रणनीति बदलनी होगी ताकि MVA का गठबंधन मजबूत बने और भविष्य की चुनावी लड़ाइयों में उनके लिए कोई झटका न बने।
और पढ़ें: कांग्रेस में झगड़ा खुला आम! राहुल गांधी की लाइन तोड़कर बोले ये 4 दिग्गज नेता | Congress dispute News





























