Electric vehicle fire accidents: सड़क पर बिना आवाज़ के दौड़ती इलेक्ट्रिक कार आज नए दौर की पहचान बन चुकी है। न इंजन की तेज गड़गड़ाहट, न धुएं का गुबारा…. सब कुछ शांत और आधुनिक। पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों के बीच लोग इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को सस्ता और पर्यावरण के लिहाज से बेहतर विकल्प मान रहे हैं। सरकार भी साफ तौर पर इस बदलाव को बढ़ावा दे रही है, ताकि पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम हो सके।
लेकिन इसी तेजी से बढ़ते ट्रेंड के बीच एक सवाल अब खुलकर सामने आने लगा है… क्या ये गाड़ियां उतनी सुरक्षित हैं, जितना दावा किया जाता है?
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तीन साल में 23 हजार से ज्यादा हादसे (Electric vehicle fire accidents)
केंद्रीय भारी उद्योग मंत्रालय द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, पिछले तीन वर्षों में देशभर में इलेक्ट्रिक वाहनों से जुड़े 23,865 सड़क हादसे दर्ज किए गए हैं। इनमें 26 मामलों में वाहन में आग लगने की घटनाएं सामने आईं। यह जानकारी भारी उद्योग राज्य मंत्री भूपतिराजू श्रीनिवास वर्मा ने लोकसभा में लिखित जवाब के जरिए दी।
आंकड़ों पर नजर डालें तो 2023 में EV से जुड़े 5,594 हादसे हुए, जिनमें 8 मामलों में आग लगी। 2024 में हादसों की संख्या बढ़कर 7,817 हो गई और 9 आग की घटनाएं दर्ज की गईं। वहीं 2025 में यह आंकड़ा और बढ़कर 10,454 तक पहुंच गया, जिनमें 9 मामलों में आग लगने की पुष्टि हुई। कुल मिलाकर तीन साल में 26 फायर केस सामने आए हैं। ध्यान देने वाली बात यह है कि ये आंकड़े मौजूदा साल की ताजा घटनाओं को शामिल नहीं करते।
डेटा कहां से आया?
यह पूरी जानकारी सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के इलेक्ट्रॉनिक डिटेल्ड एक्सीडेंट रिपोर्ट (e-DAR) पोर्टल से ली गई है। 14 नवंबर 2022 से इस पोर्टल पर इलेक्ट्रिक वाहनों के हादसों का अलग से रिकॉर्ड रखा जाने लगा। यानी सरकार अब EV से जुड़े मामलों की अलग निगरानी कर रही है।
हाल ही में महिंद्रा की एक इलेक्ट्रिक कार में आग लगने की घटना भी चर्चा में रही, जिसने बैटरी सेफ्टी को लेकर चिंताओं को और बढ़ा दिया।
जांच के लिए बनाई गई एक्सपर्ट टीम
इन घटनाओं की असली वजह समझने के लिए सरकार ने विशेषज्ञों की एक जांच कमेटी गठित की। इस टीम में DRDO, IISc बेंगलुरु और नेवल साइंस एंड टेक्नोलॉजिकल लैबोरेटरी, विशाखापत्तनम के स्वतंत्र विशेषज्ञ शामिल थे।
टीम ने बैटरी डिजाइन, थर्मल मैनेजमेंट सिस्टम, चार्जिंग प्रोसेस और मैन्युफैक्चरिंग क्वालिटी की बारीकी से जांच की। मकसद साफ था… यह पता लगाना कि आग की घटनाएं तकनीकी खामी, निर्माण दोष या किसी और कारण से हो रही हैं।
बैटरी सेफ्टी नियमों में सख्ती
विशेषज्ञों की सिफारिशों के बाद सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए सुरक्षा मानकों में अहम बदलाव किए। 28 सितंबर 2022 को ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड में संशोधन करते हुए ट्रैक्शन बैटरी के लिए नए और सख्त तकनीकी नियम जारी किए गए।
ये नियम दो पहिया, चार पहिया, पैसेंजर और मालवाहक सभी तरह के इलेक्ट्रिक वाहनों पर लागू होते हैं। 1 दिसंबर 2022 से ये मानक प्रभाव में आ चुके हैं।
इसके अलावा 19 दिसंबर 2022 को सरकार ने “कंफॉर्मिटी ऑफ प्रोडक्शन” को अनिवार्य कर दिया। इसका मतलब यह है कि कंपनियों को सिर्फ एक मॉडल की टेस्टिंग करवा लेना काफी नहीं होगा, बल्कि हर यूनिट को तय सुरक्षा मानकों के अनुरूप बनाना होगा। ई-रिक्शा से लेकर क्वाड्रिसाइकिल और इलेक्ट्रिक कार तक, सभी निर्माताओं पर यह नियम लागू है।
आगे की राह क्या?
सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण या उपयोग पर रोक लगाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। फोकस सिर्फ एक है… सेफ्टी को और मजबूत बनाना।
EV भविष्य की जरूरत माने जा रहे हैं। वे प्रदूषण कम करने और पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता घटाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। लेकिन साथ ही यह भी जरूरी है कि तकनीक के साथ सुरक्षा के मानक भी उतनी ही तेजी से आगे बढ़ें।
फिलहाल तस्वीर यही कहती है कि रफ्तार बढ़ रही है, लेकिन सुरक्षा पर बहस भी उतनी ही तेज हो चुकी है।





























