Daily habits for healthy sleep: आज की तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी में नींद न आना एक आम समस्या बन गई है। जिसके कारण चिड- चिडापन, थकावट आदि महसूस होती हैं। वही कई बार ये बीमारी ज्यादा स्ट्रेस लेने की वजह से भी हो जाती है। लेकिन आप कुछ बदलाव करके अपनी स्लीपिंग हैबिट को बदल सकते है। तो चलिए आपको इस लेख में उन सभी आदतों के बारे में बताते है जिनसे आप एक अच्छी नींद ले सकते हैं, और ये काफी असरदार तरीका है।
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नींद की गुणवत्ता सुधारने के लिए आप निम्नलिखित उपाय अपना सकते हैं:
सोने का नियम बनाएं (Sleep Schedule)
कुछ लोग समय पर बिस्तर पर नहीं जाते, जिससे उन्हें पूरे दिन सुस्ती महसूस होती है। इसलिए एक फिक्स्ड शेड्यूल बनाएं साथ ही हर दिन सोने और जागने का एक खास समय तय करें, यहां तक कि वीकेंड पर भी। इससे आपके शरीर की बायोलॉजिकल क्लॉक को रेगुलेट करने में मदद मिलती है। वही दोपहर की झपकी से बचें अगर आपको रात में सोने में परेशानी हो रही है, तो दिन में लंबी झपकी लेने से बचें।
खान-पान पर नियंत्रण – Control over diet
आज की समय में डाइट एक गंभीर समस्या बन गई है। कुछ लोग सही समय पर खाना नहीं खाते, और कुछ लोग भूख लगने पर सिर्फ चाय या कॉफी पीते हैं। इससे शरीर में कैफीन और निकोटीन की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे नींद न आने की समस्या हो सकती है। इसलिए, सोने से कम से कम 6 घंटे पहले चाय, कॉफी या सिगरेट पीना बंद कर दें। साथ ही, सोने से ठीक पहले बहुत ज़्यादा भारी या मसालेदार खाना खाने से बचें। हल्का खाना खाएं और सोने से कम से कम 2-3 घंटे पहले खाना खत्म कर लें। ऐसा करने से नींद भी समय पर आती है और शरीर में भी थकावट नहीं होती हैं।
सोने का माहौल (Sleep Environment)
अच्छी नींद के लिए अंधेरा और शांति बहुत ज़रूरी है। आपका कमरा ठंडा, शांत और पूरी तरह से अंधेरा होना चाहिए। सोने से कम से कम एक घंटा पहले अपना मोबाइल फोन, लैपटॉप और टीवी बंद कर दें। इन डिवाइस से निकलने वाली नीली रोशनी मेलाटोनिन के प्रोडक्शन को रोकती है, जो नींद को कंट्रोल करने वाला हार्मोन है।
Natural and home remedies
गुनगुना दूध – सोने से पहले एक गिलास गर्म दूध पिएं। इसमें मौजूद ट्रिप्टोफैन नींद लाने में मदद करता है। वही ये एक बेहतर विकल्प साबित हो सकता है।
पैरों की मालिश – सोने से पहले सरसों के तेल से पैरों के तलवों की मालिश करने से मन शांत होता है।
हर्बल चाय – कैमोमाइल चाय तनाव कम करने और बेहतर नींद लाने के लिए जानी जाती है।
मानसिक और शारीरिक सक्रियता
व्यायाम – दिन में शारीरिक गतिविधि करें, लेकिन सोने से ठीक पहले भारी वर्कआउट न करें।
तनाव प्रबंधन – सोने से पहले ब्रीदिंग एक्सरसाइज, ध्यान (Meditation) या कोई किताब पढ़ने की आदत डालें।
कब डॉक्टर से मिलें?
अगर इन तरीकों को आज़माने के बाद भी आपकी नींद में सुधार नहीं होता है और आपको ये लक्षण महसूस होते हैं, तो पक्का डॉक्टर (स्लीप स्पेशलिस्ट) से सलाह लें, क्योंकि यह कमज़ोरी या किसी दूसरी बीमारी की शुरुआत का संकेत हो सकता है। दिन भर बहुत ज़्यादा थकान और चिड़चिड़ापन नींद की कमी के कारण हो सकता है। दूसरे लक्षणों में काम पर ध्यान लगाने में दिक्कत, सांस लेने में दिक्कत, या बहुत ज़ोर से खर्राटे लेना (स्लीप एपनिया के लक्षण) वगैरह शामिल हैं।
Disclaimer: इसके अलवा आपको बता दें, बिना डॉक्टर की सलाह के नींद की गोलियां कभी न लें, क्योंकि इनकी आदत पड़ सकती है और इनके गंभीर दुष्प्रभाव हो सकते हैं।






























