बौद्ध धर्म पर लोगों के बढ़ते विश्वास से क्यों है ‘ब्राह्मणवाद’ को खतरा?

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 14 Sep 2023, 12:00 AM | Updated: 14 Sep 2023, 12:00 AM

हम सब जानते है कि ब्राह्मणवाद हिन्दू धर्म में वर्ण व्यवस्था के सहारे खड़ा हुआ है. चार वर्ण ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शुद्र. जिसके चलते ब्राह्मणों ने हिन्दू धर्म के साथ हिन्दुओं के पूरे जीवन पर खुद का कब्जा कर लिया है. उन्होंने ऐसे रीति रिवाज बनाए है, जिनके हिसाब से इंसान के जीवन के हर भाग में ब्राह्मणों की आवश्यकता होती है. ब्राह्मणों ने हिन्दुओं के जन्म से लेकर मृत्यु तक वह तुम्हारा सारा क्रिया कांड में खुद को जरूरी बना लिया है. उन्होंने इस तरह का जल बिछाया है कि तुम पैदा हो तो उसकी जरूरत, नामकरण हो तो उसकी जरूरत, विवाह हो तो उसकी जरूरत, फिर बच्चे पैदा हो तो उसकी जरूरत, उसने इंसान की पूरी जिंदगी को जकड लिया है. लेकिन क्या आप जानते है कि ब्राह्मण, बौद्ध धर्म से क्यों डरते है ?

दोस्तों, आईये आज हम आपको बताएंगे की ब्राह्मण बौद्ध धरण से क्यों डरते है , कैसे बौद्ध धर्म ने ब्राह्मणवाद का खुलासा किया. कैसे लोगों में बौद्ध धर्म ने युवकों को सत्य और तर्क दिया, पाखंड और पाखंडियो से आजादी दी. कैसे बौद्ध धर्म ने सदियों से ब्राह्मणवाद मे बनाया समाज को हिला दिया.

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ब्राह्मण बौद्ध धर्म से क्यों डरते है ? 

इतिहास से ही ब्राह्मणवाद ने हिन्दुओं को चारो तरफ से जकड़ा हुआ है. इन्होने हिन्दुओं के पूरे जीवन पर खुद का कब्जा कर लिया है. काफी लम्बे समय से हिन्दुओं को पाखंड, मुर्तिपूजन और अंधविश्वास से पागल बना रहे है. लेकिन बौद्ध धर्म ने युवकों को सत्य और तर्क दिया, जिससे पाखंड और पाखंडियो से उन्हें आजादी मिल रही है. धीरे धीरे युवक तर्कशील बनते जा रहे है. बौद्ध धर्म ने सिखाया है कि मुर्तिपूजन पाखंड के आलावा कुछ भी नहीं है. हम आपको बता दे कि बौद्ध धर्म में मुर्तिपूजन जैसे कोई चीज़ नहीं होती है. न ही बौद्ध धर्म में कोई जातिगत कुरतियां है. यह धर्म लोगों को पाखंडो से दूर रहने का ज्ञान देता है.

कुछ लोगों का मानना है कि बौद्ध धर्म का अर्थ ब्राह्मणों पंडित पुरोहितों से मुक्त होना है. बौद्ध धर्म में ब्राह्मणवाद की तरह कोई वर्ण व्यवस्था नहीं थी, जिसमे चार वर्ण ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शुद्र. व्यक्ति का बौद्ध होने से यह भी अभिप्राय है कि वह वर्ण से बाहर हो जाता है. फिर उस पर कोई पाखंड लागु नहीं होता. बौद्ध धर्म ने हिन्दू वर्ण व्यवस्था को इस कदर तोडा, फिर भी पंडितों के लिए उन्हें इंकार करना कोई साधारण बात नहीं थी. जिसके चलते ब्राह्मणों को बौद्ध धर्म से डर लगने लगा, कहीं बौद्ध धर्म उन्हें जड़ से न खत्म करदे.

विश्व में बौद्ध धर्म की वजह से भारत की प्रतिष्ठा

आज विश्व में बौद्ध धर्म की वजह से भारत की प्रतिष्ठा काफी बढ़ गयी है, पूरे विश्व में बौद्ध धर्म के अनुयायी है, बौद्ध धर्म की वजह से जाने कितने लोगों ने पाखंडो से विश्वास हटा कर, सत्य व तर्क को देखा है. आज इस धर्म की वजह से सारा विश्व भारत को सम्मान की दृष्टि से देखता है, यह केवल और केवल बुद्ध के कारण हुआ है. विश्व में भारत की पहचान बुद्ध और बुद्ध की धरती से भी होती है. ब्राह्मणों के लिए बुद्ध को सवीकार करने से मना नहीं कर सकते थे. और ब्राह्मणों को इससे बचने का रास्ता निकाला. रास्ता यह था, की हिंदुओं ने बुद्ध को विष्णु का नौंवा अवतार ही घोषित कर दिया. बौद्ध धर्म में कोई पाखंड न होने की वजह से ही बाबा साहेब ने अपने जीवन के अंतिम दिनों में बौद्ध धर्म को अपना लिया था. उनका जन्म बेसक हिन्दू धर्म में हुआ, लेकिन उनकी मृत्यु बौद्ध धर्म में हुई थी.

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