देश की आन-बान-शान का प्रतीक तिरंगा डिजाइन करने वाले कौन थे पिंगली वेंकैया?

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 14 Aug 2022, 12:00 AM | Updated: 14 Aug 2022, 12:00 AM
देश आज 75वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। इस मौके पर सभी देशवासियों के मन में प्रेम एकता और सम्मान है। स्वतंत्रता दिवस के दिन हम झंडा फहराकर तिंरगे को सलामी देते है। ये तिरंगा हमारे देश की आन बान और शान है। लेकिन क्या आप जानते है कि इस तिरंगे को किसने डिजाइन किया था। आज हम आपको हमारे तिरंगे के डिजाइनर के बारे में बताने जा रहे है। जिसने तिरंगे में रंगों के रूप में देश के भाव को दर्शाया। तो आइए बताते है कि कौन है तिरंगे को डिजाइन करने वाले पिंगली वेंकैया और क्या है तिरंगे में शामिल रंगों का मतलब।
पिंगली वेंकैया का जन्म 2 अगस्त 1876 को आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले के मचलीपट्टनम गांव में हुआ था। वेंकैया के माता-पिता का नाम हनुमंतारायुडु और वेंकटरत्नम्मा था। वेंकैया तेलुगु ब्राह्मण परिवार से ताल्लुक रखते थे। पिंगली वेंकैया ने प्रारंभिक शिक्षा भटाला पेनमरू और मछलीपट्टनम से की। उसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए 19 साल की उम्र में मुंबई चले गए थे। वहां जाने के बाद उन्होंने सेना में नौकरी की, जहां से उन्हें साउथ अफ्रीका भेज दिया गया। जिसके बाद वहां उनकी मुलाकात महात्मा गांधी से हुई।

पिंगली ने 30 देशों के राष्ट्रीय ध्वजों का किया अध्य्यन

महात्मा गांधी से मिलने के बाद पिंगली ने भारत में वापसी की। जिसके बाद पिंगली स्वतंत्रता संग्राम में शामिल हुए और ब्रिटिशों के खिलाफ उठाई। इस दौरान पिंगली ने भारत देश को पहचान दिलाने वाले एक झंडे को बनाने के बारे में सोचा। जिससे वो झंडा भारतवासियों को एकजुट कर के रखे। जिसके बाद पिंगली वेंकैया ने साल 1916 से 1921 तक करीब 30 देशों के राष्ट्रीय ध्वजों के बारें में जानकारी जुटाई और फिर 31 मार्च 1921 को उन्होंने भारत का राष्ट्रीय ध्वज डिजाइन किया था। 

तिरंगे में हुए ये बदलाव

हालांकि पिंगली के जरिये डिजाइन किए उस समय के तिरंगे और आज के तिरंगे में थोड़ा फर्क है। उस वक्त के तिरंगे में लाल, हरा और सफेद रंग हुआ करता था। तिंरगे में अशोक चक्र की जगह चरखे का चिन्ह हुआ करता था। लेकिन 1931 में लाल रंग को हटाकर उसकी जगह केसरिया रंग कर दिया गया। जिसके बाद 1931 में कांग्रेस ने कराची के अखिल भारतीय सम्मेलन में केसरिया, सफ़ेद और हरे तीन रंगों से बने इस ध्वज को सबकी सहमति से स्वीकार किया।

ध्वज में चरखे की जगह चक्र को दी गई

वहीं भारत को आजादी मिलने से पहले संविधान सभा ने जून 1947 में राजेंद्र प्रसाद की अध्यक्षता वाली समिति को राष्ट्रीय ध्वज की परिकल्पना प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी दी। इस समिति के सुझाव के मुताबिक, ध्वज में चरखे की जगह अशोक स्तम्भ के चक्र को दर्शाया गया। जिसके बाद तब से अब तक तिरंगे में कोई बदलाव नहीं किया गया है। 

तिरंगे में लाल के बदले केसरिया रंग किया गया

गौरतलब है कि जब देश का तिरंगा पिंगली द्वारा डिजाइन किया गया था, उस वक्त लाल रंग को हिंदू, हरे रंग को मुस्लिम और  सफेद रंग को अन्य धर्मों के प्रतीक के तौर पर दर्शाया गया था। जबकि तिरंगे में सफेद रंग पर नीले का भारत को आजादी मिलने से पहले संविधान सभा ने जून 1947 में राजेंद्र प्रसाद की अध्यक्षता वाली समिति को भारत के राष्ट्रीय ध्वज की परिकल्पना प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी दी। समिति के सुझाव के अनुसार चरखे की जगह अशोक स्तम्भ के धम्म चक्र को ध्वज पर जगह दी गई।

तिरंगे के रंगो का महत्व

तिरंगे में मौजूद तीनों रंगों का अपना विशेष महत्व है। केसरिया रंग साहस और बलिदान का प्रतीक है। सफेद रंग शांति और सच्चाई को दर्शाता है। वहीं हरा रंग संपन्नता का प्रतीक है। जब तिरंगा डिजाइन किया गया था, तब लाल और हरे रंग को हिंदू- मुस्लिम का प्रतीक और सफेद रंग को अन्य धर्मों के प्रतीक के तौर पर प्रस्तुत किया गया था। तिरंगे में सफेद रंग पर नीले रंग का चक्र, कर्तव्य का पहिया का प्रतीक माना गया।
वेंकैया पिंगली की मौत गरीबी में हुई
बता दें कि देश को तिरंगे के जरिये पहचान दिलाने वाले शख्स वेंकैया पिंगली की मौत बेहद गरीबी में हुई। पिंगली का निधन 4 जुलाई 1963 को एक झोपड़ी में हुआ था। सबसे ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण खबर तो ये रही कि देश के तिरंगे को डिजाइन करने वाले पिंगली को इस कदर भूला दिया गया कि उनकी जन्म तिथि और निधन को याद करते हुए कोई सरकारी अवकाश तक नहीं दिया जाता। देश की आन-बान-शान के प्रतीक तिरंगे को डिजाइन करने वाले वेंकैया पिंगली की याद लोगों को उनके निधन के 46 साल बाद 2009 में पहली बार आईं, जब उनके नाम पर डाक टिकट जारी करके उन्हें सम्मान दिया गया था। डाक टिकट जारी करने के बाद ही लोगों को पता चला कि पिंगली वेंकैया ही वो शख्स थे, जिन्होंने भारत का तिरंगा डिजाइन किया था।
पहली बार 2009 में दिया गया सम्मान
मालूम हो कि देश को तिरंगा देने वाले पिंगली की मौत बेहद गरीबी में हुई। मिली जानकारी के मुताबिक, देश के राष्ट्रध्वज की कल्पना को हकीकत में तब्दील करने वाले पिंगली का आखिरी पल एक छोटी सी झोपड़ी में गुजरा। उनका निधन इसी झोपड़ी में 4 जुलाई 1963 को हुआ था। दुर्भाग्य की बात तो ये है कि देश की आन-बान और शान के प्रतीक तिरंगे को डिजाइन करने वाले पिंगली को उनकी मौत के बाद लोगों ने भूला दिया। उनके निधन के 46 साल बाद 2009 में पहली बार उनके नाम पर डाक टिकट जारी करके उन्हें सम्मान दिया गया था। जिसके बाद लोगों को पता चला कि भारत का तिरंगा जिन्होंने डिजाइन किया था वो पिंगली वेंकैया ही थे। मालूम हो कि पिंगली वेंकैया के पिता हमेशा से ही चाहते थे कि पिंगली गांव के साथ-साथ देश का नाम भी रोशन करें। हालांकि लोगों ने देश के प्रति उनके प्रेमभाव को भूला दिया। लेकिन आज हम स्वतंत्रता दिवस के मौके पर उनके इस मूल्य योगदान को सलाम करते है।

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