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Farmers Protest: बाबा लक्खा सिंह के इस फॉर्मूले से सुलझ सकता है सरकार और किसानों के बीच का गतिरोध! जानें…

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 08 Jan 2021, 12:00 AM | Updated: 08 Jan 2021, 12:00 AM

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा लाए गए तीन नए कृषि कानून को लेकर किसानों का आंदोलन बीते करीब डेढ़ महीने से जारी है। किसानों की ये ही सबसे बड़ी मांग है कि सरकार तीनों नए कृषि कानून को वापस ले और तब ही वो इस आंदोलन को खत्म करेंगे। वहीं दूसरी तरफ सरकार कानून में संशोधन को तैयार है, लेकिन कानून वापस लेने को नहीं।

सरकार किसानों में 9वें दौर की बातचीत

इस मसले को सुलझाने के लिए किसान नेताओं और सरकार के लिए कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन दोनों ही अपनी बात पर अड़े हैं। आज 9वें दौर की बातचीत हो रही है। इस बैठक से पहले कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने ये उम्मीद जताई थी कि आज होने बैठक  सकरात्मक होगी और इसमें मसला सुलझने के आसार है।

बाबा लक्खा सिंह ने बताया ये फॉर्मूला

इस बैठक से पहले गुरुवार को कृषि मंत्री ने नानकसर के प्रमुख बाबा लक्खा सिंह से मुलाकात भी की थी। जिसके बाद ये विवाद सुलझने के आसार बढ़ गए है। दरअसल, बाबा लक्खा सिंह ने इस विवाद को सुलझाने के लिए एक फॉर्मूला दिया है, जिसको लेकर दोनों पक्षों के बीच सहमति बनने के आसार है।

गुरुवार को करीब दो घंटें तक कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और बाबा लक्खा सिंह मुलाकात हुई। जिसमें उन्होनें कहा कि वो विवाद सुलझाने के लिए दोनों पक्षों में समझौता कराने के लिए तैयार है। उन्होनें सुझाव दिया कि केंद्र सरकार कृषि कानून को लागू करने की ताकत राज्य सरकारों को दे दें। बाबा ने कहा कि कृषि का मसला वैसे भी राज्य सूची में ही आता है। इस फॉर्मूले को लेकर दोनों पक्ष तैयार हो सकते हैं।

जानें कौन हैं बाबा लक्खा सिंह?

बाबा लक्खा सिंह कोई राजनीतिक शख्सियत नहीं है। पंजाब, हरियाणा समेत देश के कई राज्यों में नानकसर गुरुद्वारे हैं। इन गुरुद्वारों की प्रबंधन कमेटी के प्रमुख बाबा लक्खा सिंह ही हैं। उनकी सिख समुदाय में काफी अच्छी पकड़ है। सिख समुदाय को उन पर काफी भरोसा भी है। ऐसे में वो इस पूरे विवाद को सुलझाने के लिए सरकार और किसानों के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं।

गौरतलब है कि किसानों का आंदोलन दिन पर दिन तेज होता जा रहा है। गुरुवार को किसानों ने ट्रैक्टर रैली के जरिए शक्ति प्रदर्शन किया था। वहीं 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के मौके पर भी किसानों ने बड़ी ट्रैक्टर रैली निकालने की बात कही है। ऐसे में अगर विवाद आज बैठक में नहीं सुलझता तो ये आंदोलन और तेज हो सकता है। देखना होगा कि जो किसानों और सरकार 9वें दौर की बातचीत हो रही है, उसमें कोई नतीजा निकल पाता है या फिर नहीं…?

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