भगवान गणेश की सूंड की कौन सी दिशा शुभ मानी जाती है? जानें कौनसी दिशा देती है शुभ संकेत

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 29 Aug 2025, 12:00 AM | Updated: 29 Aug 2025, 12:00 AM

Ganesh Chaturthi: गणेश चतुर्थी पर बाप्पा मोर्य का आगमन तो हर घर में लगभग हो गया है। कहते है भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और बुद्धि का देवता माना जाता है। उनकी पूजा से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं। जब हम गणपति जी की मूर्ति घर लाते हैं, तो अक्सर मन में उनकी सूंड की दिशा को लेकर कई सवाल उठते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि गणपति जी की सूंड की दिशा भी कई खास संकेत देती है और इसका हमारे जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है? अगर नहीं तो चलिए आपको इस लेख में गणपति जी की सूंड की दिशा से जुड़े इन रहस्यों के बारे में बताते हैं।

बाईं ओर मुड़ी हुई सूंड (वामवर्ती गणपति)

गणेश भगवन की मूर्ति को कई तरह की बातें कही जाति है लोगों का माना तो ये भी है कि बाईं ओर मुड़ी हुई सूंड वाले गणेश जी शांत और सौम्य माने जाते हैं। यह सूंड चंद्रमा की नाड़ी (इड़ा) से जुड़ी होती है, जो शांति, शीतलता और समृद्धि का प्रतीक है। दूसरी और घर में बाईं ओर मुड़ी हुई सूंड वाले गणेश जी की मूर्ति स्थापित करना शुभ माना जाता है। इनकी पूजा करने से घर में सुख, शांति, प्रेम और धन-संपत्ति बनी रहती है। इनकी पूजा के नियम भी अपेक्षाकृत सरल हैं।

दाईं ओर मुड़ी हुई सूंड (दक्षिणावर्ती गणपति)

कई जगह ये भी मान्यता है कि दाईं ओर मुड़ी हुई सूंड वाले गणेश जी को सिद्धि विनायक कहा जाता है। यह सूंड सूर्य की पिंगला नाड़ी से जुड़ी होती है, जो ऊर्जा, शक्ति और विजय का प्रतीक है। यह रूप अधिक शक्तिशाली और जागृत माना जाता है। इनकी पूजा विशेष अनुष्ठानों और शास्त्रीय नियमों से की जाती है। बड़े से बड़े संकट को दूर करने और तांत्रिक साधनाओं के लिए यह रूप विशेष रूप से शुभ माना जाता है। इसीलिए सिद्धि विनायक जैसे प्रसिद्ध मंदिरों में केवल दाहिनी सूंड वाले गणपति की ही पूजा की जाती है।

सीधी सूंड वाले गणपति

ऐसा माना जाता है कि सीधी सूंड वाले गणेश का स्वरूप अत्यंत दुर्लभ माना जाता है। यह सिद्धि, तपस्या और ध्यान का प्रतीक है। वही ऐसे गणपति को पूजा स्थल, योग केंद्र या पूजा स्थल पर स्थापित करने से साधक को मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति मिलती है।

गणेश चतुर्थी पर घर में बाईं सूंड वाली मूर्ति स्थापित करना अधिक उपयुक्त माना जाता है क्योंकि इससे सुख, शांति और समृद्धि आती है। दाहिनी सूंड वाली मूर्तियाँ शक्तिशाली मानी जाती हैं, लेकिन इनकी पूजा के लिए विशेष नियमों का पालन करना आवश्यक है। इसके अलवा गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की पूजा करते समय सूंड की दिशा का ध्यान रखना ज़रूरी है, क्योंकि यह आपके घर और जीवन में कई शुभ संकेत लाती है।

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