What is CIBIL score: सिबिल स्कोर पर उठते सवाल: क्या एक निजी कंपनी तय करेगी आपकी नौकरी और लोन की किस्मत?

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 19 Aug 2025, 12:00 AM | Updated: 19 Aug 2025, 12:00 AM

What is CIBIL score: सिर्फ 3 अंकों का एक स्कोर – जिसे कहते हैं CIBIL स्कोर – तय करता है कि आपको लोन मिलेगा या नहीं, क्रेडिट कार्ड जारी होगा या नहीं, और अब तो नौकरी भी इसी पर टिकी हो सकती है। मगर सवाल यह है कि जिस स्कोर पर इतना कुछ निर्भर है, उसकी प्रक्रिया कितनी पारदर्शी है? क्या जनता को इसका हिसाब-किताब समझ में आता है? क्या कोई गड़बड़ी होने पर इसकी शिकायत सुनी जाती है?

इन्हीं सवालों को संसद में खुलकर उठाया कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने। दिसंबर 2024 में संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान कार्ति ने CIBIL स्कोर की वैधता, पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर गहरी चिंता जताई और बैंकिंग सिस्टम की जड़ों को हिलाने वाले सवाल खड़े कर दिए। उनका कहना था कि ये एक प्राइवेट कंपनी है, जो देश के 60 करोड़ लोगों की क्रेडिट हिस्ट्री को मैनेज कर रही है, लेकिन किसी को नहीं पता कि ये काम कैसे हो रहा है।

और पढ़ें: Indian Army Soldier Beaten: ऑपरेशन सिंदूर के फौजी को पीटना पड़ा महंगा, टोल कंपनी पर 20 लाख जुर्माना, ब्लैकलिस्ट की तैयारी

 “सिबिल स्कोर” – एक स्कोर जो बना सकता है या बिगाड़ सकता है जिंदगी (What is CIBIL score)

पहले समझते हैं ये सिबिल  है क्या। CIBIL (Credit Information Bureau India Limited) स्कोर एक तीन अंकों की संख्या होती है, जो आमतौर पर 300 से 900 के बीच होता है। ये स्कोर आपकी वित्तीय साख यानी आपने अतीत में लोन, EMI या क्रेडिट कार्ड का भुगतान कैसे किया है, उसी के आधार पर तय होता है। स्कोर जितना ऊंचा होता है, आपकी क्रेडिट हिस्ट्री उतनी बेहतर मानी जाती है। 750 से ऊपर का स्कोर अच्छा माना जाता है और इसके आधार पर ही बैंक या वित्तीय संस्थाएं किसी व्यक्ति को लोन देने या ना देने का फैसला करती हैं।

कार्ति चिदंबरम का सवाल: पारदर्शिता कहां है?

इसी सिबिल को लेकर पिछले साल दिसंबर में संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान कार्ति चिदंबरम ने CIBIL की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा था कि यह पूरी प्रक्रिया न सिर्फ़ अपारदर्शी है बल्कि इसमें कोई असरदार शिकायत निवारण प्रणाली भी नहीं है। उन्होंने अपने भाषण में एक मज़ाकिया लेकिन काफ़ी गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा – “जैसे चित्रगुप्त यमराज के लिए हमारे कर्मों का हिसाब रखते हैं, वैसे ही सिबिल नाम की संस्था हमारे हर लेन-देन का रिकॉर्ड रखती है। लेकिन कोई नहीं जानता कि वो कैसे काम करती है।”

उनका ये बयान बहुत से लोगों को चुभा भी और सोचने पर भी मजबूर कर गया। आखिर एक प्राइवेट कंपनी, जो अमेरिका की ट्रांसयूनियन के अंतर्गत आती है, वह देश के 60 करोड़ से ज़्यादा लोगों की क्रेडिट हिस्ट्री का मालिक कैसे बन गई?

शिकायत करें तो कहां?

कार्ति का एक और बड़ा मुद्दा था कि अगर किसी व्यक्ति का CIBIL स्कोर गलती से खराब दिखा दिया जाए, तो वह बैंक में सफाई देने जाए तो भी कोई असर नहीं होता। बैंक सीधा कहता है – “आपका स्कोर खराब है, हम लोन नहीं दे सकते।” अब व्यक्ति जाए तो जाए कहां? CIBIL से संपर्क का कोई आसान तरीका नहीं, न ही कोई स्पष्ट प्रक्रिया कि गलती सुधारने के लिए आप कहां जाएं।

किसानों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि सरकार से सब्सिडी मिलने के बावजूद अगर किसान बैंक का लोन चुकाता है, तब भी CIBIL उसका स्कोर अपडेट नहीं करता। ऐसे में लाखों लोगों का क्रेडिट स्कोर गलत बना रहता है, और उन्हें लोन नहीं मिल पाता।

सिर्फ लोन नहीं, अब नौकरी पर भी असर!

इस साल जुलाई में CIBIL से जुड़ा एक और बड़ा मामला सामने आया। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने एक कैंडिडेट की नौकरी केवल इसलिए कैंसिल कर दी क्योंकि उसकी CIBIL रिपोर्ट में लोन चुकाने को लेकर कुछ गड़बड़ियां थीं। मामला अदालत तक पहुंचा और मद्रास हाई कोर्ट ने भी SBI के फैसले को सही ठहराया। कोर्ट ने कहा कि बैंकिंग जैसे संवेदनशील क्षेत्र में काम करने वालों से वित्तीय अनुशासन की उम्मीद की जाती है।

लेकिन यहीं पर फिर से सवाल उठते हैं। क्या किसी व्यक्ति की नौकरी केवल एक प्राइवेट संस्था की रिपोर्ट के आधार पर छीनी जा सकती है, जब उस संस्था की पारदर्शिता खुद संदिग्ध हो? क्या कोई सरकारी प्रणाली नहीं होनी चाहिए जो ऐसी एजेंसियों पर नजर रखे?

कार्ति चिदंबरम की मांग: CIBIL को जवाबदेह बनाया जाए

कार्ति का साफ कहना है कि CIBIL जैसी संस्थाएं कोई न्यायिक संस्था नहीं हैं। वो चाहते हैं कि या तो इसे सरकारी नियंत्रण में लाया जाए या फिर इसके ऊपर निगरानी के लिए कोई स्वतंत्र सरकारी संस्था बने। उन्होंने ये भी मांग की कि अगर CIBIL स्कोर के आधार पर किसी को लोन या नौकरी से वंचित किया जाता है, तो व्यक्ति को उसका स्पष्ट कारण बताया जाए और स्कोर सुधारने का उचित मौका दिया जाए।

क्या करें सरकार?

सरकार के पास ये मौका था कि बैंकिंग कानून (Banking Laws Amendment Bill, 2024) के जरिए ऐसी संस्थाओं पर कड़ा नियंत्रण लाया जाता, लेकिन कार्ति के अनुसार सरकार ने इस मौके को गंवा दिया और सिर्फ सतही सुधार किए।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

इस मुद्दे पर जनता की राय भी बंटी नजर आई। कुछ लोगों ने कहा कि CIBIL जैसी एजेंसियां लोगों को वित्तीय रूप से जिम्मेदार बनाती हैं। लेकिन ज़्यादातर यूज़र्स का मानना था कि एक प्राइवेट संस्था के पास इतने बड़े अधिकार नहीं होने चाहिए।

एक यूज़र ने लिखा – “मैंने अपना हाउसिंग लोन फोरक्लोज किया लेकिन मेरा CIBIL स्कोर अचानक गिर गया। अब मुझे कोई लोन नहीं मिल रहा और CIBIL से संपर्क करने का कोई तरीका नहीं समझ आ रहा।”

एक और यूज़र ने लिखा – “बहुत सही कहा। सिर्फ एक संस्था पर निर्भर रहना गलत है, कई एजेंसियों को विकल्प के तौर पर होना चाहिए।”

कैसे सुधारे अपना CIBIL स्कोर?

अगर किसी का CIBIL स्कोर खराब हो, तो उसे सुधारा जा सकता है। कुछ उपाय नीचे दिए जा रहे हैं:

  • हर महीने की EMI और क्रेडिट कार्ड बिल समय पर चुकाएं।
  • क्रेडिट कार्ड की लिमिट का 30% से कम ही उपयोग करें।
  • पुराने क्रेडिट कार्ड बंद न करें क्योंकि पुराना क्रेडिट इतिहास स्कोर सुधारने में मदद करता है।
  • एक साथ कई लोन अप्लाई न करें, इससे आपका स्कोर और गिर सकता है।

और पढ़ें: Yamuna Pushta Road Noida: अब सेक्टर-94 से 150 की दूरी पलों में तय – नोएडा में बन रही है 4000 करोड़ लागत वाली सुपर एलिवेटेड रोड!

vickynedrick@gmail.com

vickynedrick@gmail.com https://nedricknews.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Editor's Picks

Latest News

©2026- All Right Reserved. Manage By Marketing Sheds