वरिष्ठ पत्रकार Vineeta Yadav की किताब “Wife Swapping” 17 जनवरी को लॉन्च होने जा रही है। यह किताब सिर्फ एक किताब नहीं, बल्कि भारतीय समाज के उस कड़वे सच की दस्तावेज़ है, जिसे सामने लाने के लिए विनीता ने करीब 20 साल पहले अपनी जान तक जोखिम में डाल दी थी। यह कहानी है एक ऐसी अंडरकवर रिपोर्ट की, जिसे उस वक्त चैनल पर दिखाने की इजाज़त तक नहीं मिली।
11 महीने अंडरकवर, एक खतरनाक सच की तलाश| Vineeta Yadav
साल 2006 की बात है, जब एक युवा पत्रकार विनीता यादव को यह जानकारी मिली कि ‘वाइफ स्वैपिंग’ जैसी घिनौनी प्रथा सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। यह छोटे कस्बों और गाँवों में भी चुपचाप फैल चुकी थी। इस सच्चाई तक पहुँचने के लिए विनीता ने 11 महीने तक अंडरकवर रहते हुए अलग-अलग शहरों और इलाकों में काम किया। अगर जरा सा भी शक होता, तो उनकी जान खतरे में पड़ सकती थी।
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महीने का जोखिम और 20 साल का इंतजार, जानिए डिजिटल दुनिया की लोकप्रिय पत्रकार Vineeta Yadav की किताब “Wife Swapping” की कहानी
20 साल की पत्रकारिता की… pic.twitter.com/Sen4bcl7VI— Vineeta Yadav (@vineetanews) January 15, 2026
समाज के आईने में झाँकती रिपोर्ट
अपनी स्टोरी के दौरान विनीता ने कई ऐसी महिलाओं से मुलाकात की, जिनकी हालत अंदर तक झकझोर देने वाली थी। हरियाणा की एक टीचर, सात महीने की गर्भवती महिला, दिल्ली की 48 साल की विधवा और मेरठ की एक शिक्षिका…ये सिर्फ कुछ उदाहरण हैं। विनीता ने बताया कि कैसे कई महिलाएं अपने पति के दबाव, मजबूरी और सामाजिक हालात के चलते इस दलदल में धकेल दी जाती हैं।
खुफिया कैमरों से रिकॉर्ड हुई हकीकत
इस स्टोरी को खुले तौर पर रिकॉर्ड करना नामुमकिन था। विनीता ने खुफिया कैमरों का इस्तेमाल किया और हर कदम बेहद सावधानी से उठाया। 11 महीनों की मेहनत के बाद जो फुटेज सामने आया, वह इतना संवेदनशील था कि चैनल ने इसे ऑन एयर करने से रोक दिया।
न्यूजरूम में सालभर छिपी रही स्टोरी
यह रिपोर्ट चैनल के एडिट बे में काले पर्दों के पीछे रखी गई थी, ताकि किसी की नजर उस पर न पड़े। इस पूरी स्टोरी की सच्चाई सिर्फ विनीता और चैनल हेड को ही पता थी। करीब एक साल तक यह रिपोर्ट दबाकर रखी गई और दर्शकों तक कभी नहीं पहुंच पाई।
OTT और फिल्म ऑफर भी किया गया ठुकरा
कुछ समय बाद विनीता को इस स्टोरी पर फिल्म या OTT प्रोजेक्ट बनाने के ऑफर मिले, लेकिन उन्होंने साफ इनकार कर दिया। उनका मानना था कि ऐसे प्लेटफॉर्म पर यह कहानी अपनी संवेदनशीलता खो सकती है और सिर्फ सनसनी बनकर रह जाएगी। विनीता शुरू से चाहती थीं कि यह सच जिम्मेदारी के साथ सामने आए।
संघर्ष, इस्तीफा और बिना क्रेडिट के स्टोरी
चैनल से इस्तीफा देने के बाद भी विनीता अपने सच पर डटी रहीं। बाद में चैनल ने स्टोरी प्रकाशित तो की, लेकिन विनीता को उसका श्रेय नहीं दिया गया। यह उनके लिए एक बड़ा झटका था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
20 साल बाद किताब के रूप में सामने आई सच्चाई
आज दो दशक बाद वही स्टोरी “Wife Swapping” किताब के रूप में सामने आ रही है। Vineeta Yadav की यह किताब भारत के गाँवों और कस्बों से आई असली रिपोर्ट पर आधारित है। यह न सिर्फ समाज को आईना दिखाती है, बल्कि उस पत्रकारिता की मिसाल भी है, जिसमें सच्चाई के लिए जोखिम उठाया जाता है।






























