Tamil Nadu Chunav Opinion Poll: तमिलनाडु की राजनीति एक बार फिर दिलचस्प मोड़ पर खड़ी है। 23 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले आए ताजा ओपिनियन पोल ने मुकाबले को बेहद करीबी बना दिया है। इस सर्वे के मुताबिक इस बार राज्य में सीधी टक्कर देखने को मिल सकती है, जिसमें किसी भी पक्ष की जीत आसान नहीं दिख रही।
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NDA और DMK गठबंधन में कड़ी टक्कर | Tamil Nadu Chunav Opinion Poll
वोट ट्रैकर सर्वे (CNN-News18 पर जारी) के अनुसार, एआईएडीएमके-बीजेपी गठबंधन (एनडीए) को 115 से 125 सीटें मिलने का अनुमान है। वहीं, सत्तारूढ़ डीएमके-कांग्रेस गठबंधन (इंडिया ब्लॉक) को 104 से 114 सीटें मिल सकती हैं।
234 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 118 है, जिससे साफ है कि दोनों गठबंधन जीत के बेहद करीब हैं। यही वजह है कि इस बार चुनावी मुकाबला आखिरी तक रोमांचक रहने की उम्मीद है।
विजय की एंट्री से बदलेगा गेम?
इस चुनाव में अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके भी चर्चा में है। सर्वे के मुताबिक टीवीके को 2 से 8 सीटें मिल सकती हैं। भले ही यह संख्या कम लगे, लेकिन इसका असर बड़ा हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि टीवीके सीधे तौर पर बड़ी जीत नहीं हासिल करेगी, लेकिन यह वोट काटकर चुनावी समीकरण जरूर बदल सकती है। ऐसे में यह पार्टी किंगमेकर की भूमिका में भी नजर आ सकती है।
मुख्यमंत्री के चेहरे पर कांटे की टक्कर
सीएम पद की पसंद को लेकर भी मुकाबला दिलचस्प है। सर्वे में एम. के. स्टालिन को 39.8% लोगों का समर्थन मिला है, जबकि ई. के. पलानीस्वामी को 38.8% लोगों की पसंद बताया गया है। वहीं, विजय को भी 13.6% लोगों का समर्थन मिला है, जो यह दिखाता है कि नए चेहरे को भी मतदाता नजरअंदाज नहीं कर रहे।
अगर वोटिंग पैटर्न देखें तो महिलाएं और दलित वोटर स्टालिन के पक्ष में झुकते दिख रहे हैं, जबकि पुरुष और अपर कास्ट वोटर पलानीस्वामी को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। युवा वोटरों में विजय का असर साफ नजर आ रहा है।
सरकार के कामकाज पर मिली-जुली राय
डीएमके सरकार के प्रदर्शन को लेकर जनता की राय बंटी हुई है। करीब 35.5% लोगों ने सरकार के काम को अच्छा बताया, जबकि 40.8% लोग इससे संतुष्ट नहीं हैं। महिलाओं और बुजुर्गों में सरकार को लेकर संतोष ज्यादा दिखता है, जबकि युवा और उच्च वर्ग के लोग ज्यादा आलोचनात्मक नजर आते हैं।
चुनाव में क्या हैं बड़े मुद्दे?
इस बार चुनाव में मतदाता सिर्फ वादों पर नहीं, बल्कि असली मुद्दों पर ध्यान दे रहे हैं।
सबसे बड़े मुद्दों में शामिल हैं:
- कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा (23.1%)
- शराब और नशीले पदार्थों की समस्या (20.8%)
- बेरोजगारी (17.3%)
इसके अलावा महंगाई, भ्रष्टाचार और विकास भी अहम मुद्दे बने हुए हैं।
फ्री योजनाओं का घटता असर
सर्वे में एक दिलचस्प बात सामने आई है कि अब फ्री योजनाओं का असर पहले जैसा नहीं रहा। 44.2% वोटरों ने कहा कि वे इनसे प्रभावित नहीं होते, जबकि 28.9% ने कहा कि वे इसके खिलाफ वोट कर सकते हैं। इससे साफ है कि अब मतदाता ज्यादा जागरूक हो रहे हैं और सरकार के प्रदर्शन को प्राथमिकता दे रहे हैं।
कुल मिलाकर तमिलनाडु का यह चुनाव बेहद करीबी और रोमांचक होने वाला है। एनडीए गठबंधन बहुमत के करीब दिख रहा है, लेकिन डीएमके गठबंधन भी मजबूत चुनौती दे रहा है। वहीं, विजय की पार्टी चुनावी गणित को बिगाड़ सकती है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि इस बार तमिलनाडु में आखिरी नतीजे तक सस्पेंस बना रहेगा।




























