Stock Market Crash: कहते हैं शेयर बाजार में निवेश वित्तीय जोखिमों के अधीन है, यहाँ एक पल की हलचल किसी को ‘राजा से रंक’ तो किसी को ‘रंक से राजा’ बना सकती है। इस कहावत का असर आज सोमवार को हफ्ते की शुरुआत में ही देखने को मिल गया। भारतीय शेयर बाजार के लिए आज का दिन बेहद निराशाजनक रहा। बाजार खुलते ही सेंसेक्स करीब 1200 अंक तक गोता लगा गया, वहीं निफ्टी में भी चौतरफा बिकवाली दिखी। हालांकि, शुरुआती झटके के बाद बाजार ने संभलने की कोशिश जरूर की, लेकिन दबाव बरकरार रहा। सुबह 9:37 बजे तक सेंसेक्स करीब 500 अंकों की गिरावट के साथ 73,127 के स्तर पर संघर्ष करता नजर आया।
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निवेशकों को भारी नुकसान
बाजार की इस भारी गिरावट की सबसे बड़ी मार निवेशकों पर पड़ी है। शुरुआती कारोबार के कुछ ही मिनटों में निवेशकों की करीब 7 लाख करोड़ की संपत्ति स्वाहा हो गई। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) में लिस्टेड कंपनियों के कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन (M-cap) में भी बड़ी सेंध लगी है। पिछले सत्र में जहाँ यह 422 लाख करोड़ के करीब था, वहीं आज की बिकवाली के बाद यह लुढ़ककर लगभग 415 लाख करोड़ के स्तर पर आ गया है।
आखिर बाजार क्यों गिर रहा है?
बाजार में इस गिरावट के पीछे कई बड़े कारण हैं:
US-ईरान तनाव
अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा तनाव लगातार बढ़ रहा है। यह विवाद अब एक महीने से ज्यादा समय से जारी है और अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। ऊर्जा ठिकानों पर हमलों को लेकर भी स्थिति साफ नहीं है, जिससे निवेशकों में डर बना हुआ है।
विदेशी निवेशकों (FPI) की रिकॉर्ड बिकवाली
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) भारतीय बाजार से लगातार अपना पैसा निकाल रहे हैं। केवल मार्च महीने में ही उन्होंने अब तक करीब 1.23 लाख करोड़ रुपये की भारी निकासी की है, जिससे बाजार पर चौतरफा दबाव बढ़ गया है। यह भारतीय बाजार के इतिहास में किसी भी एक महीने में होने वाली सबसे बड़ी निकासी है। इससे पहले सबसे बड़ी बिकवाली का रिकॉर्ड अक्टूबर 2024 में था, जब विदेशी निवेशकों ने 94,017 करोड़ निकाले थे। आंकड़ों के मुताबिक, इस साल (जनवरी 2026 से अब तक) विदेशी निवेशक कुल 1.27 लाख करोड़ से ज्यादा की बिकवाली कर चुके हैं।
F&O एक्सपायरी और छुट्टी का असर
मार्च महीने के फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) कॉन्ट्रैक्ट्स की मंथली एक्सपायरी के कारण बाजार में भारी उतार-चढ़ाव (Volatility) देखा जा रहा है। ट्रेडर्स अपनी पोजीशन को ‘रोलओवर’ करने या काटने की जल्दबाजी में हैं। कल (31 मार्च) महावीर जयंती के उपलक्ष्य में शेयर बाजार बंद रहेगा। लंबी छुट्टी से पहले निवेशक अपनी रिस्क कम करने के लिए बिकवाली (Profit Booking) कर रहे हैं, जिससे बाजार पर दबाव और बढ़ गया है। मार्च महीना वित्तीय वर्ष (Financial Year 2025-26) का आखिरी महीना भी है, इस वजह से कई फंड हाउस और निवेशक अपनी ‘बैलेंस शीट’ दुरुस्त करने के लिए भी शेयरों की बिक्री कर रहे हैं।
ग्लोबल बाजारों में कमजोरी का असर
दुनिया भर के बाजारों में मंदी का असर साफ दिख रहा है। जापान का Nikkei 225, दक्षिण कोरिया का Kospi, ताइवान और हांगकांग के Hang Seng जैसे प्रमुख एशियाई बाजारों में 2% से 4% तक की भारी गिरावट दर्ज की गई। पिछले सत्र में अमेरिकी बाजार (Nasdaq और Dow Jones) और यूरोपीय बाजार भी लाल निशान में बंद हुए थे। वैश्विक अनिश्चितता के कारण विदेशी निवेशक ‘रिस्क’ लेने से बच रहे हैं, जिसका सीधा असर आज भारतीय बाजार की ओपनिंग पर पड़ा। निवेशकों के बीच यह डर है कि अगर ईरान-अमेरिका तनाव और बढ़ा, तो ग्लोबल सप्लाई चेन पूरी तरह बाधित हो सकती है।
कच्चे तेल (Crude Oil) की बढ़ती कीमतें
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में आग लग गई है। वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमतें आज $115 प्रति बैरल के स्तर को पार कर गई हैं। भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग 85-90% हिस्सा आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल के महंगा होने से न केवल देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ता है, बल्कि महंगाई (Inflation) बढ़ने का भी खतरा रहता है। तेल की इन ऊंची कीमतों ने निवेशकों के सेंटीमेंट को बुरी तरह प्रभावित किया है।
क्या आगे भी बनी रहेगी गिरावट?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक भू-राजनीतिक हालात (Global Geopolitical Situation) में सुधार नहीं होता, तब तक बाजार में अस्थिरता और उतार-चढ़ाव का दौर बना रह सकता है। हालांकि, निचले स्तरों पर खरीदारी आने से बीच-बीच में टेक्निकल रिकवरी भी देखने को मिल सकती है। फिलहाल अंतरराष्ट्रीय तनाव, विदेशी निवेशकों (FPI) की लगातार बिकवाली और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों जैसे कई दबाव एक साथ काम कर रहे हैं। ऐसे में निवेशकों को ‘वेट एंड वॉच’ (Wait and Watch) की रणनीति अपनानी चाहिए और किसी भी बड़े निवेश से पहले विशेषज्ञों की सलाह जरूर लेनी चाहिए।





























