Sikhism in Dubai: 1970-80 का ये वो दौर था जब दुबई आज के हाइटेक नहीं था बल्कि सूखे बंजर रेगिस्तान का घर था। पर्यटन तो छोड़िये, यहां आम लोग भी आने से कतराते थे, दूर दूर तक केवल रेगिस्तान था, लेकिन केवल एक नीति ने दुबई को न केवल दुनिया के सबसे अमीर नगरो में शामिल कर दिया बल्कि दुबई पर्यटन के मामले में भी टॉप 10 नगरों में से एक है। आज के दुबई का संरचना तैयार करने का श्रैय जाता है यहां के वाइस प्रेसीडेंट और प्रधानमंत्री मुहम्म्द बिन शेख को। उनकी एक कोशिश ने दुबई की पूरी दशा ही बदल दी.. और जैसे ही यहां रोजगार के अवसर बढ़े, वैसे ही भारतीय सिखों की आबादी भी बढ़ी। सिखों ने यहां आकर न केवल खुद को स्थापित किया बल्कि वो भी दुबई की अर्थव्यवस्था में अहम रोल निभा रहे है। अपनो इस वीडियो में हम दुबई में सिखों के बढ़ते वर्चस्व की कहानी को जानेंगे, साथ ही कैसे आज सिख दुबई का अहम हिस्सा है।
दुबई के बारे में जानकारी
दुबई, जो कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की राजधानी है और सात अमीरातो में से एक है। ये एक इस्लामिक क्षेत्र है, और दुनिया के अमीर देशों में से एक है. दुबई के अबु धाबी, पूर्वोत्तर में शारजाह दक्षिण पूर्व में ओमान सल्तनत मौजूद है। दुबई अरेबियन रेगिस्तान के अंदर स्थित है। दुबई सरकार एक संवैधानिक राजशाही ढांचे के भीतर संचालित होती है, जिस पर 1833 के बाद से अल मकतौम परिवार शासन कर रहा है। दुनिया की सबसे उंची इमारत बुर्ज खलीफा दुबई में ही बनाई गई है।
वहीं दुबई का क्षेत्रफल 4114 वर्ग किलोमीटर है, तो वहीं दुबई की जनसंख्या की बात करें तो साल 2026 के अनुसार दुबई की जमसंख्य करीब 31 लाख 38 हजार 550 है। दुबई की अर्थव्यवस्था सबसे तेजी से मजबूत होने वाली अर्थव्यवस्था है, 2022 की रिपोर्ट के अनुसार प्रति व्यक्ति आय 46,665 अमेरिकी डॉलर थी। हालांकि दुबई की अर्थव्यवस्था के लिए यूएई में मौजूद कच्चे तेल के भंडार भी जिम्मेदार है। जिसके कारण य़े इतना अमीर देश है। दुबई संयुक्त अरब अमीरात का सबसे बड़ा और प्रमुख व्यापारिक केंद्र है।
दुबई में सिख धर्म की शुरुआत
जब हम दुबई में सिख धर्म के फलने फूलने के बारे में चर्चा करते है तो सिखों ने 1980 के बाद दुबई की तरफ ज्यादा रूख किया, खासकर इकोनोमिक बदलाव और मजबूती को देखते हुए दुबई में सिखो ने अपने लिए बेहतर अवसर देखें। हालांकि ज्यादातर सिख भारत से ही आये और उन्होंने यहां आकर व्यापार शुरू किया था, उसके अलावा कंस्ट्रक्शन, हॉस्पिटैलिटी और फाइनेंस जैसे सेक्टरों में काम करना शुरु किया। उनकी काम के प्रति लगन और मेहनत से स्तानीय लोग काफी प्रभावित हुए और सिखों को और ज्यादा अवसर मिलने लगे थे। जिससे उनकी जनसंख्या में तेजी से बढ़ौतरी हुई।
मौजूदा समय में दुबई में करीब 50 हजार सिख
साल 2000 के बाद भारत के अलावा यूनाइटेड किंगडम, यूनाइटेड स्टेट्स और कनाडा में रहने वाले सिखों ने भी दुबई की तरफ व्यापार करने के लिए रूख किया, जिससे सिखो की उपस्थिति काफी व्यापक रूप से बढ़ने लगी, औऱ वो एक छोटा लेकिन स्थापित समुदाय बन गया। मौजूदा समय में करीब 50 हजार सिख दुबई में रह रहे है। सिखो की एकता, उनकी ताकत और उनकी ईमानदार कोशिश को देखते हुए दुबई में पहली बार उनकी धार्मिक पहचान को महत्व दिया गया और आधिकारिक रूप से करीब 12 सालों तक कोशिष करने के बाद 2012 में यहां पहला सिख गुरुद्वारा गुरु नानक दरबार शुरु हुआ।
दुबई का सबसे भव्य और विशाल गुरुद्वारा
जिसके लिए खुद यहां के प्रधानमंत्री ने 25,400 sq ft जमीन दान में दी थी। करीब 20 मिलियन डॉलर की लागत से बना ये गुरुद्वारा दुबई का सबसे भव्य और विशाल गुरुद्वारा है, जहां रोजाना करीब 10 हजार लोग दर्शन करने आते है. यह बड़ा गुरुद्वारा, दुबई के जेबेल अली में है और यह पूरे गल्फ में पहला ‘ऑफिशियल’ सिख मंदिर है। इस गुरुद्वारे को बनवाले सिखों ने इसे अमृतसर के भव्य हरिमंदिर साहिब के बराबरी में बनाने की कोशिश की है।
इंटीरियर डिज़ाइनर पॉल बिशप ने लंदन के साउथॉल में गोल्डन टेम्पल और गुरुद्वारे दोनों की तरह बनाया है, जिसमें बड़ा प्रार्थना हॉल बना है, निजि फंक्शन करने के लिए तीन छोटे कमरे बने है, एक बड़ा मेडिटेशन रूम है, एक बड़ी लाइब्रेरी है जिसमें सिख धर्म से जुड़े सभी दस्तावेज मौजूद है और साथ ही एक बड़ा ‘लंगर’ या कॉमन किचन हॉल बना हुआ है। इसके अलावा हफ्ते में दो बार क्लासेज लगाई जाती है ताकि सिख बच्चों को अपने धर्म से जुड़ी परंपरा और संस्कृति का पता रहे।
अच्छी बात ये है कि इस्लामिक देश होते हुए भी यहां सिखों को अपनी धार्मिक परंपरा को मानने की पूरी आजादी है। सिख यहां केवल एक धर्म नहीं बल्कि सम्मान और ताकत का प्रतीक है। दुबई में सिखो ने कुछ ही दशक में मजबूत पहचान को स्थापित किया है। जो वाकई में ये दर्शाता है कि सिख जहां भी रहेंगे वहां अपनी छाप छोड़ेंगे ही। शायद यहीं कारण है कि सिखों की मांग हर देश में की जाती है।
