सिखों की कारीगरी का कमाल वो ऐतिहासिक इमारतें जो आज दिल्ली की शान हैं – Sikh Architects of Delhi

Shikha Mishra | Nedrick News New Delhi Published: 11 Apr 2026, 08:21 AM | Updated: 11 Apr 2026, 08:21 AM

Sikh Architects of Delhi:  सिख धर्म को आप दुनिया का इकलौता ऐसा धर्म कह सकते है कि जो आज भी पूरी तरह से अपनी धार्मिक नीतियों और परंपराओं को पूरी शिद्दत से फॉलो कर रहा है.. सिखों के किये कारनामों का जिक्र केवल भारत तक ही सीमित नहीं है..बल्कि ये उनकी अनुशासन प्रिय होने और कर्मठ होने के कारण ही उनकी छवि आज दुनिया में सबसे तेजस्वी, मेहनती और साहसी लोगो की हो चुकी है। दुनिया में जहां भी सिख है वो सिक्खी के झंडे गाड़ रहे है। लेकिन क्या आप ये जानते है कि केवल युद्ध करने औऱ धर्म का पालन करने में ही सिख माहिर नहीं है, बल्कि सिखो ने देश की कई धरोहरो को खड़ा करने में अहम भूमिका निभाई है। अपने इस वीडियो में हम जानेंगे.. ऐसे सिखों के बारे में जिन्होंने भारत की राजधानी दिल्ली को आज के रंग रूप में ढालने में अपना खून पसीना एक कर दिया था। कौन थे वो सिख शिल्पकार.. और किन धरोहरो को किया था उन्होंने तैयार.. जानेंगे इस वीडियो में।

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साल 1911 में अंग्रेजो ने भारत की राजधानी को कलकत्ता से बदल कर दिल्ली स्थानांतरित कर दिया था, और तब बात आई कि भारत की राजधानी में कुछ प्रशासनिक स्थान होने चाहिए, कार्यलय होने चाहिए..जो सरकार के अधीन हो.. आज का रायसिना हिल जो इतनी कड़ी सुरक्षा में है.. वो तब एक खाली मैदान हुआ करता था। और तब ब्रिटिश प्रशासन ने दिल्ली को सजाने के लिए कुछ नामी सिखो की मदद ली। जिसमें सबसे पहले आते है सरदार शोभा सिहं, धर्म सिंह सेठी, बैशाखा सिंह, रंजीत सिंह, मोहन सिंह।।

1, बाबा बघेल सिंह- बाबा बघेल सिंह 1783 में भरतपुर के  राजा सूरजमल के पुत्र जवाहर सिंह जो कि गुरु नानक देव जी को ही अपना गुरु मानते थे औऱ खुद को नानकपंथी कहते थे, उनकी सहायता के लिए जत्थेदार जस्सा सिंह आहलूवालिया और सरदार बघेल सिंह आगे आये, और दिल्ली की तरफ कूच कर दिया था। उस वक्त मुगल कमजोर हो गए थे लेकिन तब भी उनका शासन था। सरदार बघेल सिंह की कमान में 30,000 सिख सैनिक थे, और दिल्ली में जिस स्थान पर उन्होंने अपनी छावनी बनाई थी, उसे ही आज तीस हजारी कहा जाता है, जहां तीस हजारी कोर्ट मौजूद है। सिख सैनिक आगे बढ़ते हुए विशाल दीवार को तोड़ा जिसे आज मोरी गेट कहा जाता है। जीत के बाद सरदार बघेल सिंह 4000 सिखो के साथ दिल्ली में रहे, इस दौरान मुगल शासक शाह आलम ने उन्हें 1200 एकड़ जमीन दी थी, जिसपर आज  इंडिया गेट, संसद भवन, केंद्रीय सचिवालय, राष्ट्रपति भवन और पालिका बाजार स्थित है, रायसीना हिल का हिस्सा भी इन्ही का था। इसके अलावा सरदार बघेल सिंह ने दिल्ली के कई बड़े गुरुद्वारों वाले स्थानों की पहचान की और वहां उसका निर्माण कराया जिसमें गुरुद्वारा बंगला साहिब, सीसगंज साहिब और रकाबगंज साहिब शामिल है। उन्होंने ही लालकिले पर पहली बार निशान साहिब फहराया था। आज ये स्थान दिल्ली के एलीट स्थानों में जाने जाते है। जिनका क्रेडिट सरदार बघेल सिंह को ही जाता है।

2, सरदार शोभा सिहं- बहुत लोग ये नहीं जानते है कि सर शोभा सिंह ने शहीदे आजम भगत सिंह के खिलाफ गवाही दी थी, लेकिन बाद में ये मशहूर बिल्डर बन गए। इनका पूरा नाम सरदार बहादुर सप शोभा सिंह है। उन्हें दिल्ली के रियल एस्टेट डेवलपर के रूप में जाना था, जो कि ‘काउंसिल ऑफ़ स्टेट्स’ का हिस्सा थे, सर शोभा को 1930 के आसपास “आधी दिल्ली का मालिक” कहा जाता था, क्योंकि लुटियंस की दिल्ली के आधे हिस्से पर सर शोभा की ही मिल्कियत थी। दिल्ली में पश्चिमीकरण और आधुनिक रंग लाने का श्रैय उन्हें ही जाता है। उन्होंने 1945 में दिल्ली का पहला अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स सुजान सिंह पार्क’ बनवाया था.. ये पहला अपार्टमेंट थे, क्योंकि उससे पहले दिल्ली में केवल बंग्ले होते थे, जहां अलग अलग परिवार रह थे, लेकिन अपार्टमेंट के कॉंसेप्ट के कारण जमीन के एक ही टुकड़े पर एक साथ सैकड़ो लोग रह सकती है। इसके अलावा उन्होने क्नॉट प्लेस बसाया, मशहूर डांसिक गर्ल वाला राष्ट्रीय संग्रहालय, सेंट कोलम्बा स्कूल, राष्ट्रपति भवन, इंडिया गेट, सचिवालय की इमारतों का निर्माण के दौरान भी उन्होंने ही कराया था। इतनी ही नहीं एक बिल्डर के तौर पर ऑल इंडिया फ़ाइन आर्ट्स एंड क्राफ़्ट्स सोसाइटी हॉल’, कस्तूरबा गांधी मार्ग पर ‘बड़ौदा हाउस’, दिल्ली में ‘दयाल सिंह कॉलेज’ का निर्माण कराया। सर शोभा सिंह ‘ब्रॉडकास्टिंग हाउस’ (ऑल इंडिया रेडियो) का भी निर्माण कराया था। आपको जानकर हैरानी होगी कि भारत का सबसे बड़े डैम भाखड़ा-नांगल बांध को भले ही अमेरिकी  हार्वे स्लोकम ने डिजाइन किया था लेकिन इसे सर शोभा सिंह ने पूरा करवाया था.. यहां तक कि उन्होंने पैसा भी लगाया था। सर शोभा सिंह के बनाई धरोहरो ने आज भारत की प्रगति में बड़ा योगदान दिया है।

सरदार मोहन सिंह- सरदार मोहन सिंह खालसा के पहले पंज प्यारो रके रूप में जाना जाता है। उन्हें आज के दिल्ली का शिल्पकार भी कहा जाता है।   उन्होंने शोभा सिंह, बखाना सिंह, धर्म सिंह सेठी जैसे दिग्गत शिल्पकारो के साथ मिलकर दिल्ली को सजाने में अहम भूमिका निभाई.. दिल्ली में मोहन सिंह प्लेस, संयुक्त राज्य अमेरिका का दूतावास और फ्रेंड्स कॉलोनी बनाया था। मोहन सिंह को मोहन सिंह कोका कोला के नाम से जाना जाता है।

ऐसे कई दिग्गज सिख शिल्पकार हुए, जिन्होंने एक खाली मैदान को खूबसूरत शहर बनाया है। ये असल में वो सिख शिल्पकार है जिन्होंने दिल्ली को भारत की राजधानी के अनुरूप बनाया था। इनका योगदान दिल्ली की सुंदरता में कभी नहीं भुलाया जा सकता है।

Shikha Mishra

shikha@nedricknews.com

शिखा मिश्रा, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत फोटोग्राफी से की थी, अभी नेड्रिक न्यूज़ में कंटेंट राइटर और रिसर्चर हैं, जहाँ वह ब्रेकिंग न्यूज़ और वेब स्टोरीज़ कवर करती हैं। राजनीति, क्राइम और एंटरटेनमेंट की अच्छी समझ रखने वाली शिखा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और पब्लिक रिलेशन्स की पढ़ाई की है, लेकिन डिजिटल मीडिया के प्रति अपने जुनून के कारण वह पिछले तीन सालों से पत्रकारिता में एक्टिव रूप से जुड़ी हुई हैं।

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