ईरान को मिला रूस-चीन का समर्थन… पाकिस्तान ने मारी पलटी! अमेरिका की बड़ी चाल फेल | Russia China veto Hormuz

Nandani | Nedrick News Iran Published: 08 Apr 2026, 11:59 AM | Updated: 08 Apr 2026, 11:59 AM

Russia China veto Hormuz: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर चल रही वैश्विक तनातनी के बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक बड़ा ड्रामा देखने को मिला। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने ईरान को घेरने और इस अहम समुद्री रास्ते को खुलवाने के लिए एक रणनीति बनाई थी, लेकिन आखिरी वक्त पर रूस और चीन ने पूरा खेल पलट दिया।

दरअसल, बहरीन ने यूएन सुरक्षा परिषद में एक प्रस्ताव पेश किया था, जिसका मकसद होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना था। इसे ‘गल्फ ड्राफ्ट रिजॉल्यूशन’ कहा गया। लेकिन जब इस पर वोटिंग हुई, तो रूस और चीन ने अपने वीटो पावर का इस्तेमाल करते हुए इसे खारिज कर दिया।

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वोटिंग में मिला बहुमत लेकिन फिर भी गिरा प्रस्ताव | Russia China veto Hormuz

हफ्तों तक चली बहस और कूटनीतिक खींचतान के बाद जब वोटिंग हुई, तो 15 में से 11 देशों ने प्रस्ताव के पक्ष में वोट दिया। पाकिस्तान और कोलंबिया ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया। अमेरिका को उम्मीद थी कि इतने बड़े समर्थन के बाद रूस और चीन दबाव में आ जाएंगे, लेकिन हुआ इसके उलट। दोनों देशों ने साफ तौर पर वीटो का इस्तेमाल कर प्रस्ताव को गिरा दिया। इस फैसले के बाद साफ हो गया कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी ईरान को मजबूत समर्थन मिल रहा है।

खाड़ी देशों की नाराजगी खुलकर सामने आई

प्रस्ताव गिरते ही खाड़ी देशों ने तीखी प्रतिक्रिया दी। बहरीन के विदेश मंत्री अब्दुल्लतीफ बिन राशिद अल जयानी ने यूएन में बहरीन, यूएई, सऊदी अरब, कतर, कुवैत और जॉर्डन की तरफ से बयान पढ़ा। उन्होंने कहा कि यह बेहद निराशाजनक है कि परिषद एक गंभीर मुद्दे पर अपनी जिम्मेदारी निभाने में नाकाम रही। उनका साफ कहना था कि होर्मुज को लेकर तुरंत ठोस कार्रवाई की जरूरत थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। खाड़ी देशों का मानना है कि ईरान इस अहम समुद्री रास्ते का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए कर रहा है।

चैप्टर 7 का डर बना सबसे बड़ा मुद्दा

इस पूरे प्रस्ताव के पीछे असली विवाद ‘चैप्टर 7’ को लेकर था। संयुक्त राष्ट्र के नियमों में चैप्टर 7 का मतलब होता है—जरूरत पड़ने पर सैन्य कार्रवाई की अनुमति। शुरुआत में अमेरिका और उसके सहयोगी चाहते थे कि इस प्रस्ताव में सीधे सैन्य हस्तक्षेप की छूट दी जाए। लेकिन रूस और चीन के विरोध के बाद भाषा को नरम किया गया।

पहले इसे ‘रक्षात्मक साधनों के इस्तेमाल’ तक सीमित किया गया और बाद में सिर्फ ‘रक्षात्मक प्रयासों को बढ़ावा देने’ तक कर दिया गया। इसके बावजूद रूस और चीन संतुष्ट नहीं हुए। उन्हें डर था कि अगर एक बार इस तरह का प्रस्ताव पास हो गया, तो अमेरिका इसका इस्तेमाल ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के लिए कर सकता है।

बहरीन की चेतावनी भी बेअसर

वोटिंग से पहले बहरीन ने माहौल बनाने की पूरी कोशिश की। विदेश मंत्री अल जयानी ने कहा कि ईरान ने होर्मुज जैसे अहम जलमार्ग को “हथियार” बना लिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर आज इसे नहीं रोका गया, तो भविष्य में दुनिया के अन्य समुद्री रास्तों पर भी यही स्थिति बन सकती है। लेकिन उनकी यह दलील रूस और चीन को प्रभावित नहीं कर पाई।

रूस और चीन ने क्यों दिया ईरान का साथ?

इस फैसले के पीछे दोनों देशों के अपने-अपने रणनीतिक कारण हैं। रूस, जो पहले से ही यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों के खिलाफ खड़ा है, ईरान को अपना अहम सहयोगी मानता है। वह नहीं चाहता कि ईरान पर किसी तरह का सैन्य दबाव बने।

वहीं चीन की ऊर्जा जरूरतें काफी हद तक मिडिल ईस्ट पर निर्भर हैं। अगर होर्मुज में अमेरिका का दबदबा बढ़ता है, तो चीन के व्यापार और तेल सप्लाई पर असर पड़ सकता है। दोनों देश यह भी चाहते हैं कि मिडिल ईस्ट में अमेरिका का प्रभाव कम हो और ईरान एक मजबूत क्षेत्रीय शक्ति बना रहे।

अब आगे क्या?

रूस और चीन के वीटो के बाद अमेरिका और उसके सहयोगियों के पास ईरान के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र के जरिए कार्रवाई का रास्ता लगभग बंद हो गया है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अमेरिका और इजरायल बिना यूएन की मंजूरी के कोई सैन्य कदम उठाएंगे?

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Nandani

nandani@nedricknews.com

नंदनी एक अनुभवी कंटेंट राइटर और करंट अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में चार वर्षों का सक्रिय अनुभव है। उन्होंने चितकारा यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में की, जहां स्क्रिप्ट लेखन के दौरान कंटेंट राइटिंग और स्टोरीटेलिंग में उनकी विशेष रुचि विकसित हुई। वर्तमान में वह नेड्रिक न्यूज़ से जुड़ी हैं और राजनीति, क्राइम तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर मज़बूत पकड़ रखती हैं। इसके साथ ही उन्हें बॉलीवुड-हॉलीवुड और लाइफस्टाइल विषयों पर भी व्यापक अनुभव है।

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