गुजरात की जनता कैद में है, उन्हें मुक्ति दिलाने के लिए उठाएंगे कदम…बोले राकेश टिकैत

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 19 Mar 2021, 12:00 AM | Updated: 19 Mar 2021, 12:00 AM

कृषि कानूनों के विरोध में किसान आंदोलन (Farmers Protest) के करीब 4 महीने पूरे होने वाले हैं। किसान लगातार केंद्र सरकार से इन कानूनों को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। अभी तक 250 से ज्यादा किसानों के मौत की खबर सामने आई है। किसान नेता अब चुनावी राज्यों का भी दौरा कर रहे हैं और किसान महापंचायतों का आयोजन भी हो रहा है। 

कई किसान नेताओं ने पिछले दिनों पश्चिम बंगाल का भी दौरा किया और जनसभा को संबोधित किया। इसी बीच किसान आंदोलन का केंद्र बन चुके भारतीय किसान यूनियन (BKU) के नेता और प्रवक्ता राकेश टिकैत (Rakesh Tikait) का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा है कि गुजरात की जनता कैद में है और वह उन्हें मुक्ति दिलाएंगे।

‘फोर्स के लोग और पेंशनभोगी हमसे जुड़ेंगे’

भारतीय किसान यूनियन (BKU) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश (Rakesh Tikait) टिकैत ने बीते दिन गुरुवार को मीडिया के सामने यह बात कही। उन्होंने कहा, ‘गुजरात में दो दिन का दौरा है, 4 अप्रैल और 5 अप्रैल का। वहां के लोग कैद में है। गुजराती…क्या बोल पा रहे हैं? संपर्क में हैं लोग, आएंगे लोग निकल कर। उनकी भी समस्या सुनी जाएगी, वे कब्जे में है। क्या कोई बोल रहा है?’ 

वहां के लोगों को कैसे आजाद कराएंगे वाले सवाल पर राकेश टिकैत ने जवाब दिया। उन्होंने कहा, ‘उन्हें बोलने की आजादी दिलाएंगे, उनसे कहेंगे कि बोल लो…धरना प्रदर्शन कर लो कुछ। अनाज बेचों…चूंकि उनपर केस बहुत सारे बन जाते हैं, इसलिए वे अधिक धरना प्रदर्शन नहीं करते।‘

राकेश टिकैत ने आगे कहा कि फोर्स के लोग और पेंशनभोगी भी आगे किसान आंदोलन से जुड़ेंगे। जितने भी विभाग और संस्थाएं बेची जा रही है सब हमसे जुड़ेगे। उन्होंने पश्चिम बंगाल में किसान नेताओं की एंट्री पर कहा कि वहां किसानों की एंट्री और महापंचायतों से बीजेपी के वोट पर असर पड़ेगा।

MSP पर कानून बनाने की मांग

बता दें, दिल्ली के बॉर्डरों पर कई किसान संगठन संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में लगातार आंदोलन कर रहे हैं। किसान केंद्र सरकार से इन कानूनों को रद्द करने और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर कानून बनाने की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर केंद्र सरकार की ओर से स्पष्ट रुप से कहा गया है कि किसी भी कीमत पर यह कानून वापस नहीं लिए जाएंगे। 

हालांकि, सरकार की ओर से इनमें संशोधन की बात कही गई है। अभी तक केंद्र सरकार के मंत्रियों और किसान नेताओं के बीच 11 दौरे की बातचीत हो चुकी है लेकिन अभी तक किसी भी तरह का समाधान निकल कर सामने नहीं आया है।

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