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Noida Minor Sexual Assault: नोएडा में 9 साल की बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न, पुलिस ने आंकड़ों के लिए अपराधियों को छोड़ा!

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 24 Jun 2025, 12:00 AM | Updated: 24 Jun 2025, 12:00 AM

Noida Minor Sexual Assault: नोएडा के सेक्टर-20 थाना क्षेत्र की एक सोसायटी में 9 साल की बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न का मामला सामने आया है। यह घटना तब उजागर हुई जब बच्ची की तबीयत अचानक खराब हो गई, और उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने यौन उत्पीड़न की आशंका जताई। इस मामले में पीड़िता के पिता के तीन दोस्तों को आरोपित कर पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया है। मामले की जांच जारी है और इसमें नए खुलासे हो रहे हैं, जो पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हैं।

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घटना का खुलासा और पीड़िता का बयान- Noida Minor Sexual Assault

9 साल की बच्ची के पिता के अनुसार, उनकी बेटी ने आरोपियों के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं। बच्ची ने बताया कि आरोपियों ने उसे उनके घर के क्वार्टर में गलत तरीके से छेड़ा। बच्ची ने यह भी कहा कि आरोपियों ने उसका मुँह टेप से बंद कर दिया था और हाथ बांधकर उसे शारीरिक रूप से शोषित किया। इसके अलावा, जब बच्ची का पिता उसे अनिल को बुलाने के लिए भेजता था, तो अनिल उसे गलत तरीके से छूता था। बच्ची ने यह भी बताया कि उनकी 8 साल की छोटी बहन ने भी आरोपियों को “गंदे अंकल” कहा, लेकिन पुलिस की जांच में छोटी बहन के साथ किसी भी प्रकार का शोषण नहीं पाया गया।

पीड़िता के पिता के अनुसार, 17 जून को मामले का खुलासा हुआ जब बच्ची की तबीयत बिगड़ने के बाद उसे अस्पताल ले जाया गया। बच्ची को रक्तस्राव और उल्टी की समस्या हो रही थी, जिसके बाद डॉक्टरों ने पुलिस को सूचित किया। डॉक्टरों के मेमो के आधार पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ छेड़छाड़ का मामला दर्ज किया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया। हालांकि, आरोपियों के खिलाफ रेप की धारा नहीं लगाई गई, जिससे मामले की गंभीरता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

पुलिस की कार्रवाई पर सवाल

इस मामले में पुलिस की कार्रवाई पर पत्रकार ममता त्रिपाठी ने ट्विटर के माध्यम से गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने लिखा कि नोएडा पुलिस ने यौन उत्पीड़न के मामले को हल्के में लिया और इसे सिर्फ छेड़छाड़ का मामला मान लिया, जबकि पीड़िता के साथ गंभीर शोषण हुआ था। ममता त्रिपाठी ने कहा कि पुलिस ने आंकड़ों को सही रखने के लिए मामले को हल्का किया और आरोपियों के खिलाफ रेप की धारा नहीं लगाई। उन्होंने इस मामले में पुलिस की “आंकड़ों की बाजीगरी” की आलोचना की और कहा कि यह घटना पुलिस की संवेदनहीनता को दर्शाती है।

पत्रकार ने यह भी कहा कि डॉक्टरों ने पुलिस को मेमो भेजा था, लेकिन पुलिस ने इसे नजरअंदाज कर दिया। इसके बजाय, पुलिस ने POCSO एक्ट (Protection of Children from Sexual Offenses Act) के तहत मामला दर्ज किया, जिससे आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया, लेकिन गंभीर अपराध की धारा नहीं लगाई गई।

बच्ची की स्वास्थ्य स्थिति और परिवार की स्थिति

बच्ची की स्वास्थ्य स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है। पीड़िता के पिता ने बताया कि बच्ची को तेज बुखार और शारीरिक दर्द हो रहा है। वह लगातार अस्पताल जा रही है, और उसकी हालत में सुधार नहीं हो रहा। पीड़िता के पिता के अनुसार, उनकी पत्नी पांच साल पहले उन्हें छोड़कर चली गई थीं, और अब बच्ची अपनी दो बहनों और एक भाई के साथ सर्वेंट क्वार्टर में रहती है। आसपास के लोग मानते हैं कि अगर बच्ची की मां घर पर होती, तो वह अपनी बेटी से खुलकर बात कर सकती थी और इस समस्या को समझने में मदद कर सकती थी।

पुलिस की संवेदनहीनता और प्रशासन पर सवाल

ममता त्रिपाठी ने ट्वीट में पुलिस की संवेदनहीनता पर भी सवाल उठाया और कहा कि महिला अपराधों को लेकर पुलिस का रवैया सही नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने अपराधियों को बचाने के लिए मामले को हल्का किया। उनका कहना था कि आंकड़ों को सुधारने की कोशिश में पुलिस ने बच्ची के साथ हुए अपराध को नज़रअंदाज़ कर दिया।

यह मामला अब प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है। क्या महिला अपराधों के मामलों में पुलिस को और अधिक संवेदनशीलता और जिम्मेदारी से काम करना चाहिए? क्या अपराधी महज़ आंकड़ों की बाजीगरी के चलते सजा से बच सकते हैं?

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