भारत के तेजी से बढ़ते टेक इकोसिस्टम में छोटे शहरों की प्रतिभा अब वैश्विक सीमाओं को चुनौती दे रही है। इसी गौरवशाली बदलाव का एक जीवंत उदाहरण है AppSquadz। मथुरा के चंद्रकांत अग्रवाल और प्रियंका अग्रवाल द्वारा एक छोटे से कमरे से शुरू किया गया यह सफर आज 30 से अधिक देशों में फैली एक 500 करोड़ की ग्लोबल टेक जाइंट बन चुका है।
शून्य से उठकर 500 करोड़ तक
इस कहानी की शुरुआत किसी बड़े निवेश या संसाधनों से नहीं, बल्कि एक स्पष्ट सोच और मजबूत इरादों से हुई थी। साल 2014 में नोएडा के एक छोटे से किराए के कमरे से कंपनी की नींव रखी गई, जहां चंद्रकांत और प्रियंका खुद ही डेवलपमेंट से लेकर ऑपरेशंस तक हर जिम्मेदारी संभालते थे। दिन-रात की कोडिंग और क्लाइंट्स के साथ लंबी मीटिंग्स के बीच, संसाधन भले ही सीमित थे, लेकिन सीखने का जुनून और आगे बढ़ने की जिद ने उन्हें शून्य से उठाकर 500 करोड़ की ग्लोबल कंपनी, AppSquadz, खड़ी करने तक पहुंचा दिया। आज यह कंपनी सिर्फ ऐप ही नहीं, बल्कि AWS और AI के क्षेत्र में दुनिया भर में अपनी धाक जमा चुकी है।
इस सफर को चंद्रकांत की कहानी और भी खास बनाती है। एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाले चंद्रकांत ने बहुत कम उम्र में ही अपने पिता के प्रिंटिंग प्रेस में काम करना शुरू कर दिया था। वहीं से उन्होंने मेहनत, अनुशासन और जिम्मेदारी उठाने की सीख ली। बचपन से ही उनमें एक अलग तरह की ऊर्जा और कुछ बड़ा करने का जज्बा था। तकनीक के प्रति उनकी रुचि उन्हें मथुरा से कोटा तक ले गई, जहां उन्होंने UPTU परीक्षा पास कर इंजीनियरिंग की राह चुनी।
वैश्विक बाजार में धाक
इंजीनियरिंग के दौरान ही उनकी मुलाकात प्रियंका अग्रवाल से हुई, जो न केवल उनकी जीवनसंगिनी बनीं बल्कि AppSquadz की सह-संस्थापक (Co-founder) के रूप में इस सफर की मजबूत स्तंभ भी साबित हुईं। प्रियंका के मैनेजमेंट कौशल और चंद्रकांत की तकनीकी सूझबूझ ने मिलकर एक ऐसी टीम बनाई, जिसने नोएडा के एक छोटे से कमरे को अपना ऑफिस बना लिया।
शुरुआती दिनों में जब संसाधन कम थे, तब प्रियंका ने न केवल ऑपरेशंस संभाले, बल्कि महिलाओं को आईटी क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए एक विजन भी तैयार किया। इन दोनों की साझा मेहनत का ही नतीजा था कि मथुरा के इन दो युवाओं ने वैश्विक बाजार में अपनी धाक जमाना शुरू कर दिया।
2014 में AppSquadz की शुरुआत
वहीं इस सफर के दौरान आर्थिक कठिनाइयां भी लगातार सामने आती रहीं, लेकिन उन्होंने इन्हें कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। कॉलेज के दौरान वे बच्चों को पढ़ाकर अपना खर्च निकालते थे। यही दौर उनके व्यक्तित्व को और मजबूत बनाता गया, जहां उन्होंने आत्मनिर्भरता और संघर्ष से आगे बढ़ने का रास्ता खुद तैयार किया।
यही आत्मनिर्भरता बाद में कंपनी चलाने के काम आई। जब 2014 में उन्होंने AppSquadz की शुरुआत की, तो उनके पास कोई बड़ा इन्वेस्टर नहीं था, लेकिन ट्यूशन पढ़ाकर और छोटे-मोटे काम करके जो ‘मैनेजमेंट’ उन्होंने सीखा था, उसने कंपनी को बूटस्ट्रैप (बिना बाहरी निवेश) करने में मदद की।
इसी साहस के साथ उन्होंने अपनी जमी-जमाई नौकरी को अलविदा कहा और नोएडा के एक छोटे से किराए के कमरे में AppSquadz की नींव रखी। यहाँ से शुरू हुआ वह सफर जहाँ दिन कोडिंग में और रातें ग्लोबल क्लाइंट्स ढूंढने में बीतती थीं। धीरे-धीरे उनकी मेहनत रंग लाने लगी और छोटे प्रोजेक्ट्स से शुरू हुआ यह कारवां बड़े ब्रांड्स और फिर अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पार पहुँच गया।
500+ करोड़ के टर्नओवर
इसी सोच के साथ आगे बढ़ते हुए उन्होंने अपनी सुरक्षित नौकरी को छोड़ने का कड़ा फैसला लिया। यह फैसला केवल एक नौकरी छोड़ने का नहीं, बल्कि अपने वर्षों के सपने को हकीकत में बदलने का था। उन्होंने एक स्टार्टअप के रूप में अपने विजन को आकार देने की दिशा में कदम बढ़ाया, और यहीं से AppSquadz के उस ऐतिहासिक सफर की शुरुआत हुई जिसने आगे चलकर टेक जगत में हलचल मचा दी।
आज उसी अटूट भरोसे का नतीजा सबके सामने है। जो सफर नोएडा के एक छोटे से किराए के कमरे से शुरू हुआ था, वह आज 30 से अधिक देशों में फैल चुका है। 500+ करोड़ के टर्नओवर और 350 से ज्यादा विशेषज्ञों की टीम के साथ AppSquadz आज ग्लोबल टेक जगत में एक बड़ा नाम है। मथुरा के इस कपल ने यह साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो छोटे शहरों से निकलकर भी दुनिया जीती जा सकती है।
छोटे से अपार्टमेंट से की शुरुआत
शुरुआती दिन आसान नहीं थे लेकिन एक किराए के छोटे से अपार्टमेंट से शुरुआत करते हुए उन्होंने सफाई से लेकर ऑपरेशन्स तक हर जिम्मेदारी खुद निभाई, यह सोच रखते हुए कि एक सच्चे उद्यमी के लिए कोई भी काम छोटा नहीं होता, और यही जज़्बा उनकी सफलता की नींव बना।
कंपनी के शुरुआती दौर में सबसे बड़ी चुनौती एक मजबूत टीम तैयार करना थी। सीमित संसाधनों और पहचान के बावजूद, दोनों ने अपने स्पष्ट विजन और मजबूत लीडरशिप के दम पर ऐसे लोगों को जोड़ा, जो सिर्फ नौकरी करने के लिए नहीं, बल्कि कंपनी के उद्देश्य को समझकर उसके साथ जुड़ना चाहते थे।
कंपनी का मास्टरस्ट्रोक
कंपनी ने अपने सफर की शुरुआत गेमिंग ऐप डेवलपमेंट से की, लेकिन बदलती टेक्नोलॉजी, नए ट्रेंड्स और उद्योग की चुनौतियों को समझते हुए समय के साथ अपनी दिशा को रणनीतिक रूप से बदल लिया। मार्केट रिसर्च और अनुभव के आधार पर कंपनी ने मोबाइल ऐप और वेबसाइट डेवलपमेंट में कदम रखा और कोविड-19 महामारी से ठीक पहले क्लाउड सर्विसेज में कदम रखना कंपनी के लिए ‘मास्टरस्ट्रोक’ साबित हुआ, जिसने न केवल उनकी ग्रोथ को रफ्तार दी बल्कि उन्हें ग्लोबल मार्केट में बड़े दिग्गजों के समकक्ष ला खड़ा किया।
‘राइजिंग स्टार पार्टनर ऑफ द ईयर’
Amazon Web Services के साथ कंसल्टिंग पार्टनर बनने के बाद कंपनी की ग्रोथ को नई दिशा मिली, वहीं भारत सरकार के ‘इंडियन AI मिशन’ में इम्पैनल होने से उसकी विश्वसनीयता और भी मजबूत हुई। इसी निरंतर विकास और दूरदर्शी रणनीति के चलते कंपनी को कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया, जिनमें वर्ष 2023 का ‘AWS राइजिंग स्टार पार्टनर ऑफ द ईयर’ अवॉर्ड भी शामिल है। इसी वैश्विक पहचान के दम पर आज AppSquadz 30 से अधिक देशों में अपनी सेवाओं का डंका बजा रही है।
30 से ज्यादा देशों में AppSquadz
आज AppSquadz 1200 से अधिक क्लाइंट्स को सेवाएं दे चुकी है, 30 से ज्यादा देशों में अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुकी है और 500 से अधिक प्रोफेशनल्स की टीम के साथ लगातार आगे बढ़ रही है। कंपनी ₹500+ करोड़ के स्तर तक पहुंच चुकी है। मथुरा के एक छोटे से कमरे से शुरू हुआ यह सफर आज दुनिया भर के उभरते उद्यमियों के लिए एक मिसाल बन गया है कि अगर इरादे बुलंद हों, तो कोई भी सपना बड़ा नहीं होता।
निरंतर प्रयास जरूरी
चंद्रकांत और प्रियंका की यह यात्रा सिर्फ एक कंपनी की सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह दिखाती है कि अगर सोच साफ हो, मेहनत लगातार हो और एक-दूसरे पर भरोसा मजबूत हो, तो छोटे शहर से निकलकर भी वैश्विक पहचान बनाई जा सकती है। उनका सफर आज के युवाओं के लिए यह संदेश देता है कि हर चुनौती को अवसर में बदला जा सकता है, बस हिम्मत और निरंतर प्रयास जरूरी है।




























