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Mamata Banerjee at Supreme Court: ‘इलेक्शन कमीशन नहीं, व्हाट्सएप कमीशन कर रहा काम’,सुप्रीम कोर्ट में ममता का खुलासा! जानिए 10 बड़ी बातें

Nandani | Nedrick News

Published: 04 Feb 2026, 03:05 PM | Updated: 04 Feb 2026, 03:05 PM

Mamata Banerjee at Supreme Court: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची को लेकर चल रहे विवाद ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में नया मोड़ ले लिया। इस दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद अदालत में मौजूद रहीं और उन्होंने अपने बयान में राज्य में बड़े पैमाने पर वोटर्स के नाम सूची से हटाए जाने का आरोप लगाया। ममता ने कहा कि चुनाव आयोग की प्रक्रिया जानबूझकर बंगाल को निशाना बना रही है और लोगों के अधिकारों पर असर डाल रही है। उन्होंने यहां तक कहा कि चुनाव आयोग को ‘व्हाट्सऐप कमीशन’ कहकर आलोचना की।

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सीएम ममता बनर्जी ने अदालत में रखी अपनी दलील (Mamata Banerjee at Supreme Court)

ममता ने सुप्रीम कोर्ट में जोर देकर कहा कि राज्य में मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया लोकतंत्र के लिए खतरनाक है। उन्होंने बताया कि उन्होंने चुनाव आयोग को कई बार इस मुद्दे पर पत्र लिखे, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई। उन्होंने यह भी कहा कि अन्य राज्यों में ऐसी कड़ी प्रक्रिया नहीं अपनाई जा रही है।

मुख्य बिंदु: ममता बनर्जी की दलील के 10 अहम पहलू

  1. बंगाल को निशाना: ममता ने आरोप लगाया कि चुनाव से ठीक पहले पश्चिम बंगाल को विशेष रूप से टारगेट किया गया है और राज्य में बड़े पैमाने पर वोटर्स के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं।
  2. चुनाव आयोग पर आरोप: उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों में चुनाव आयोग दस्तावेजों को स्वीकार कर रहा है, लेकिन बंगाल में उन्हें खारिज किया जा रहा है।
  3. व्हाट्सऐप आयोग: ममता ने चुनाव आयोग की तुलना ‘व्हाट्सऐप कमीशन’ से की और कहा कि लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं।
  4. वकील तब लड़ते हैं: उन्होंने बताया कि वकील तब दलील देते हैं, जब सब कुछ खत्म हो चुका होता है। उन्होंने कहा कि छह पत्र लिखने के बावजूद चुनाव आयोग की ओर से कोई जवाब नहीं मिला।
  5. स्वयं को साधारण नागरिक बताया: ममता ने कहा, “मैं कोई खास व्यक्ति नहीं हूं, मैं एक बंधुआ मजदूर जैसी हूं। मैं अपनी पार्टी के लिए नहीं, बल्कि आम नागरिकों के अधिकारों के लिए लड़ रही हूं।”
  6. प्रक्रिया सिर्फ डिलीशन की: उन्होंने उदाहरण देकर बताया कि शादी के बाद महिलाओं के नाम बदलने या पता बदलने वालों को ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी’ दिखाकर हटाया जा रहा है।
  7. डिस्क्रिपेंसी मैपिंग: ममता ने कहा कि बंगाल में नोटिसों के जरिए लोगों के नाम हटाना सिर्फ ‘डिलीशन’ नहीं, बल्कि लक्षित टारगेटिंग है।
  8. अचानक क्यों किया गया: उन्होंने सवाल उठाया कि 24 साल बाद अचानक चार महीने में इतनी बड़ी प्रक्रिया क्यों लागू की गई, जबकि यह समय फसल कटाई और पूजा का मौसम था।
  9. महिलाओं के नाम हटाना: ममता ने कहा कि 58 लाख नाम सूची से हटाए गए, जिनमें ज्यादातर महिलाएं थीं। उन्होंने इसे एंटी-वूमन कदम बताया।
  10. लोकतंत्र की रक्षा का आह्वान: ममता ने अदालत से विनम्र अनुरोध किया कि लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की रक्षा की जाए।

अगली सुनवाई की तिथि

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 9 फरवरी, सोमवार को होगी, जिसमें ममता बनर्जी फिर से अदालत में अपनी दलील पेश करेंगी। बता दें, सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी का बयान पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची विवाद को नई संवेदनशीलता दे गया है। सीएम ने न केवल राजनीतिक आरोप लगाए, बल्कि लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए अदालत से हस्तक्षेप की अपील भी की। इस सुनवाई पर न सिर्फ बंगाल, बल्कि पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं।

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Nandani

nandani@nedricknews.com

नंदनी एक अनुभवी कंटेंट राइटर और करंट अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में चार वर्षों का सक्रिय अनुभव है। उन्होंने चितकारा यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में की, जहां स्क्रिप्ट लेखन के दौरान कंटेंट राइटिंग और स्टोरीटेलिंग में उनकी विशेष रुचि विकसित हुई। वर्तमान में वह नेड्रिक न्यूज़ से जुड़ी हैं और राजनीति, क्राइम तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर मज़बूत पकड़ रखती हैं। इसके साथ ही उन्हें बॉलीवुड-हॉलीवुड और लाइफस्टाइल विषयों पर भी व्यापक अनुभव है।

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