LPG Cylinder Weight Update: एलपीजी किल्लत की खबरें इतनी बढ़ गई हैं कि इन खबरों के बीच अफवाहों ने कब अपनी जगह बना ली, इसका लोगों को अंदाजा तक नहीं लगा। बता दें कि एलपीजी संकट की वास्तविक खबरों के बीच सोशल मीडिया पर अफवाहों का ऐसा बाजार गर्म हुआ कि आम जनता के लिए सच और झूठ का फर्क करना मुश्किल हो गया। जहां एक तरफ जमीन पर एलपीजी की किल्लत की तस्वीरें डरा रही हैं, तो दूसरी तरफ ‘सिलेंडर का वजन कम होने’ जैसी अफवाहें घबराहट पैदा कर रही हैं। लेकिन क्या वाकई सरकार सिलेंडर का वजन घटा रही है? तो चलिए लेख के जरिए जानते हैं इस बड़े अपडेट की हकीकत।
देश में एलपीजी (LPG) को लेकर इन दिनों कई तरह की खबरें सामने आ रही हैं। अफवाहों का बाजार इतना गर्म था कि यह कहा जाने लगा कि गैस की कमी के चलते कंपनियां 14.2 किलो वाले घरेलू सिलेंडर में कम गैस (करीब 10 किलो) भरकर सप्लाई कर सकती हैं, ताकि ज्यादा लोगों तक गैस पहुंच सके। लेकिन अब सरकार ने इन खबरों पर पूरी तरह से स्थिति साफ कर दी है और सच्चाई कुछ और ही है।
सरकार का क्या कहना है?
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा (Sujata Sharma) ने स्पष्ट किया है कि घरेलू गैस सिलेंडर के वजन को कम करने या कम गैस भरने की ऐसी कोई भी योजना लागू नहीं की जा रही है। उन्होंने इन खबरों को ‘पूरी तरह काल्पनिक और अटकलें’ बताया है। मंत्रालय ने जनता से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर चल रही ऐसी किसी भी भ्रामक जानकारी पर भरोसा न करें। सुजाता शर्मा के अनुसार बताया जा रहा है कि देश में एलपीजी का उत्पादन बढ़ा है और आपूर्ति को स्थिर रखने के लिए पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।
आखिर क्यों उठी LPG संकट की बात?
इस पूरे मामले की जड़ पश्चिम एशिया (Middle East) में चल रहा तनाव है, खासकर ईरान और लाल सागर (Red Sea) से जुड़े हालात। इस वजह से हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होने वाली तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ी है, जिसका सीधा असर भारत जैसे आयात करने वाले देशों पर पड़ता है। इन्ही अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण LPG आयात और घरेलू स्टॉक पर दबाव की खबरें आईं। सप्लाई को बेहतर तरीके से मैनेज करने के लिए सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं (Domestic Users) को प्राथमिकता देने और पैनिक बुकिंग रोकने के लिए नए नियम (जैसे बुकिंग अंतराल) लागू किए हैं। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि गैस की कोई वास्तविक कमी नहीं है, बस वितरण को सुव्यवस्थित किया जा रहा है।
गैस सप्लाई का क्या है हाल?
सरकार और तेल कंपनियों के मुताबिक, अभी घबराने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है। देश में LPG सप्लाई सामान्य बनी हुई है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि ‘ड्राई आउट’ (गैस पूरी तरह खत्म होना) जैसी कोई स्थिति नहीं है। राहत की बात यह है कि पिछले कुछ दिनों में पैनिक बुकिंग में भारी कमी आई है। दैनिक गैस बुकिंग का आंकड़ा घटकर करीब 50 लाख रह गया है, जिससे सप्लाई चेन पर बना अतिरिक्त दबाव काफी हद तक कम हुआ है। तेल कंपनियों ने रिफिलिंग और डिलीवरी की प्रक्रिया को तेज कर दिया है ताकि लंबित (Pending) ऑर्डर जल्द पूरे किए जा सकें।
घरेलू उत्पादन में बड़ी राहत
बता दें कि सरकार ने एक और महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है कि अब देश अपनी जरूरत का 50–60% LPG खुद उत्पादित कर रहा है। पहले यह आंकड़ा करीब 40% हुआ करता था। घरेलू उत्पादन में आई इस बढ़त का सीधा मतलब है कि अब अंतरराष्ट्रीय संकटों या आयात (Import) पर हमारी निर्भरता पहले के मुकाबले कम हुई है, जिससे सप्लाई चेन को स्थिर रखने में मदद मिल रही है।
PNG की ओर बढ़ा रुझान
गैस की किल्लत की खबरों के बीच लोग अब सुरक्षित विकल्पों की तलाश कर रहे हैं। यही कारण है कि पिछले 10 दिनों में करीब 2 लाख उपभोक्ता पारंपरिक सिलेंडर को छोड़कर PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस) पर शिफ्ट हुए हैं। साथ ही, पाइपलाइन बिछाने वाली कंपनियों ने रिकॉर्ड 3.5 लाख नए कनेक्शन जारी किए हैं। यह आंकड़ा साफ संकेत देता है कि लोग अब सिलेंडर की बुकिंग और डिलीवरी के झंझट से बचने के लिए पाइप वाली गैस को बेहतर मान रहे हैं।
क्या करें आम लोग?
भारत में इस समय करीब 33.2 करोड़ LPG कनेक्शन हैं। इससे साफ है कि देश में घरेलू गैस का इस्तेमाल कितना बड़ा और जरूरी है। फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है, अफवाहों पर भरोसा न करें, समय पर गैस बुक करें, अगर संभव हो तो PNG जैसे विकल्प पर भी विचार कर सकते हैं। कुल मिलाकर अंतरराष्ट्रीय तनाव के कारण LPG सप्लाई चेन पर कुछ दबाव जरूर है, लेकिन सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि सिलेंडर में गैस कम भरने की कोई योजना नहीं है। पेट्रोलियम मंत्रालय स्थिति पर पैनी नजर रख रहा है और घरेलू उत्पादन में भी तेजी आई है। ऐसे में आम लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। बस सतर्क रहें, समय पर बुकिंग करें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें।
