जानिए 353 साल पुराने ज्ञानवापी केस की पूरी कहानी

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 24 Jul 2023, 12:00 AM | Updated: 24 Jul 2023, 12:00 AM

Gyanvapi Case full Details in Hindi – काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद का 32 साल पुराना केस एक बार फिर से चर्चा में आ गया है और इसके चर्चा में आने की वजह एक सर्वे हैं. दरअसल, कोर्ट ने काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद मामले में एक आदेश दिया है और इस आदेश के बाद सोमवार सुबह भारतीय पुरातत्व विभाग (ASI) ने ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में सर्वे शुरू कर दिया और इस वजह से काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद मामला फिर से चर्चा में आ गया हैं. वहीं इस पोस्ट के जरिए हम आपको 353 साल पुराने ज्ञानवापी केस की पूरी कहानी बताने जा रहे हैं.

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जानिए क्या है इतिहास

मिली जानकारी के अनुसार, 1585 में काशी विश्वनाथ मंदिर को अकबर के नौ रत्नों में से एक राजा टोडरमल ने बनवाया था लेकिन 1669 में औरंगजेब ने कई मंदिर तुड़वाकर मस्जिद बनवा दी तो वहीं काशी विश्वनाथ मंदिर को तोड़कर यहाँ पर ज्ञानवापी मस्जिद बना दी गयी. लेकिन 1735 में रानी अहिल्याबाई ने फिर यहां काशी विश्वनाथ मंदिर बनवा दिया और मंदिर के पीछे अभी भी ज्ञानवापी मस्जिद का भाग भी हैं, जहाँ आज के समय में मंदिर को लेकर गहरी आस्था है साथ हजारों की संख्या में लोग काशी विश्वनाथ के दर्शन करने जाते हैं. तो वहीं ज्ञानवापी मस्जिद में कोई भी नमाज पढ़ने नहीं आता है लेकिन कुछ समय पहले ये इन जगह ने विवाद का रूप ले लिया.

क्या है मामला

ये मामला साल 2021 में सामने आया है जब पांच महिलाओं ने वाराणसी के कोर्ट में एक केस दायर किया और इस केस के उन्होंने ज्ञानवापी मस्जिद के बगल में बने श्रृंगार गौरी मंदिर में रोज पूजा साथ ही दर्शन करने की अनुमति देने कि मांग की गयी थी जिसके बाद महिलाओं की याचिका पर जज रवि कुमार दिवाकर ने सुनवाई करते हुए मस्जिद परिसर का सर्वे कराने का आदेश दिया था. वहीं कोर्ट के आदेश पर पिछले साल तीन दिन तक सर्वे हुआ था. सर्वे के बाद हिंदू पक्ष ने यहां शिवलिंग मिलने का दावा किया था. जिसके बाद ये मामला चर्चा में आ गया है.

सर्वे के दौरान मिला शिवलिंग 

सर्वे एक दौरान मस्जिद के वजूखाने में शिवलिंग के आकार जैसी पत्थर था जहाँ  हिन्दू पक्ष ने इसे शिवलिंग कहा तो वहीं मुस्लिम पक्ष ने इस शिवलिंग के आकार जैसे पत्थर को लेकर कहा कि ये शिवलिंग नहीं, बल्कि फव्वारा है जो हर मस्जिद में होता है. वहीं इसके बाद अब ये मामला अयोध्या के राम मंदिर और बाबरी मस्जिद की जैसे विवाद बन गया है और ये मामला कोर्ट में हैं.

कोर्ट ने दिया ये आदेश – Gyanvapi Case full Details in Hindi

जहाँ इस कोर्ट के फैसले के बाद हिंदू पक्ष ने विवादित स्थल को सील करने की मांग की थी. तो मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को ले गयी और SC ने केस जिला जज को ट्रांसफर कर इस वाद की पोषणीयता पर नियमित सुनवाई कर फैसला सुनाने का निर्देश दिया था. वहीं मुस्लिम पक्ष की ओर से यह दलील दी गई थी कि ये प्रावधान के अनुसार और उपासना स्थल कानून 1991 के परिप्रेक्ष्य में यह वाद पोषणीय नहीं है, इसलिए इस पर सुनवाई नहीं नहीं हो सकती है.

हालांकि, कोर्ट ने इसे सुनवाई योग्य माना था. वहीं इसके बाद उन पांचो महिलाओं में से चार ने इसी साल मई में एक प्रार्थना पत्र दायर किया था. इसमें मांग की गई थी कि ज्ञानवापी मस्जिद के विवादित हिस्से को छोड़कर पूरे परिसर का ASI से सर्वे कराया जाए. इसी पर जिला जज एके विश्वेश ने अपना फैसला सुनाते हुए ASI सर्वे कराने का आदेश दिया था.

आपस में सटे हुए हैं मंदिर और मस्जिद 

दरअसल, काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद (Gyanvapi Case full Details in Hindi) दोनों बने हुए हैं और काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद आपस में सटे हुए हैं, लेकिन काशी विश्वनाथ मंदिर का रास्ता जहाँ अलग है तो वहीं ज्ञानवापी मस्जिद में जाने का रास्ता भी अलग है. वहीं जब ये मामला चर्चा में आया और इस मामले सुप्रीम कोर्ट की एंट्री हुई तो अब जज डॉ. अजय कृष्ण ने सील वजूखाने को छोड़कर ज्ञानवापी परिसर में सर्वे का आदेश दिया था. आज जो चार टीमें सर्वे कर रही है उमें 43 सदस्य हैं, जिनके साथ चार वकील भी हैं.

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