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मनुष्य के अंदर बहुत नकारात्मक विचार क्यों आते हैं? प्रेमानंद जी महाराज से जानिए

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 04 Jun 2024, 12:00 AM | Updated: 04 Jun 2024, 12:00 AM

हममें से कई लोग ऐसे हैं जो रोजाना मंदिर जाते हैं और धार्मिक किताबें पढ़ते हैं। फिर भी कहीं न कहीं उनके मन में नकारात्मक विचार बने ही रहते हैं। उन्हें हर समय हर चीज में सिर्फ खामियां ही नजर आती हैं। व्यक्ति कोशिश करता है कि उसके मन में किसी के बारे में नकारात्मक विचार न आएं, लेकिन हर कोशिश के बाद भी वो नकारात्मक विचार उसके मन से दूर नहीं होते। जिस वजह से वह अंदर ही अंदर जलता रहता है। अगर आप भी ऐसी ही स्थिति का सामना कर रहे हैं तो आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है क्योंकि वृंदावन के प्रेमानंद महाराज जी ने इस बारे में बात की है कि आखिर इंसान के मन में ऐसे नकारात्मक विचार क्यों आते हैं और इन नकारात्मक विचारों से छुटकारा पाने के लिए क्या करना चाहिए। आइए आपको बताते हैं नकारात्मक विचारों से छुटकारा पाने का उपाय।

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नकारात्मक विचार क्यों आते हैं?

प्रेमानंद महाराज जी कहते हैं कि जब भी हमारे भीतर से नकारात्मक विचार आते हैं और मन भीतर से जलने लगता है, तो इसका मतलब है कि हमने कहीं कोई गुप्त पाप किया है और हमें उस बुरे काम का पश्चाताप नहीं है। इस कारण से ऐसे नकारात्मक विचार आने लगते हैं। महाराज जी कहते हैं कि इस तरह से ये नकारात्मक विचार आपको भीतर से जला देते हैं। ऐसी स्थिति से छुटकारा पाने के लिए हमें नाम का जाप करना चाहिए। नाम का जाप करने से हम अपने अंदर जो भी नकारात्मक विचार रखते हैं, उनसे छुटकारा पा सकते हैं। इसलिए नाम का जाप करने से व्यक्ति ऐसी स्थिति से छुटकारा पा सकता है।

महाराज इसे समझाने के लिए एक कहानी सुनाते हैं जिसमें वो कहते हैं कि एक बार एक व्यक्ति दो साधुओं को भोजन के लिए अपने घर बुलाता है। साधु उस व्यक्ति के घर आते हैं और भोजन करते हैं। भोजन के बाद वह व्यक्ति साधुओं को 11-11 रुपए देता है। जिसके बाद एक साधु बहुत खुश होता है और दूसरा साधु बहुत दुखी होता है। वह व्यक्ति दोनों साधुओं को देखता है और खुश साधु से पूछता है कि आप इतने खुश क्यों हो तो साधु कहता है कि मैं खुश हूं क्योंकि आज मेरे भोजन की कोई व्यवस्था नहीं थी लेकिन भगवान की कृपा देखो मुझे भोजन भी मिल गया और 11 रुपए भी। वह व्यक्ति दूसरे साधु से पूछता है कि तुम दुखी क्यों हो तो साधु कहता है कि मैंने सोचा था कि आज मुझे 111 रुपए दान में मिलेंगे लेकिन यहां तो मुझे सिर्फ 11 ही मिले हैं और 100 का नुकसान हो गया। महाराज जी कहते हैं कि इस तरह से ये इंसान पर निर्भर करता है कि वो किसी परिस्थिति में कैसी प्रतिक्रिया करता है। महाराज जी कहते हैं कि जो सकारात्मक सोचता है वो हर चीज में सकारात्मकता देखता है और हमेशा खुश रहता है।

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