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ISRO PSLV-C62 mission fails: PSLV-C62 मिशन में अड़चन! तीसरे स्टेज की गड़बड़ी से ऑर्बिट तक नहीं पहुंच सका हाई-टेक ‘अन्वेषा’ सैटेलाइट

Nandani | Nedrick News

Published: 12 Jan 2026, 08:23 AM | Updated: 12 Jan 2026, 08:23 AM

ISRO PSLV-C62 mission fails: भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को उस समय हल्का झटका लगा, जब ISRO का PSLV-C62 मिशन अपने तय लक्ष्य को पूरी तरह हासिल नहीं कर पाया। रॉकेट ने तय समय पर श्रीहरिकोटा से उड़ान भरी और शुरुआती सभी चरण बिल्कुल सामान्य रहे। लॉन्च के शुरुआती पलों में सब कुछ योजना के मुताबिक चलता दिखा, हालांकि, मिशन का सबसे जरूरी मकसद: “सैटेलाइट को उसकी तय ऑर्बिट में पहुंचाना” पूरा नहीं हो पाया। इसी वजह से ISRO ने इस मिशन को “आंशिक सफलता” करार दिया है।

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तीसरे स्टेज में आई तकनीकी दिक्कत (ISRO PSLV-C62 mission fails)

ISRO की शुरुआती जांच में सामने आया है कि समस्या PSLV के तीसरे स्टेज में आई। इस चरण के दौरान रॉकेट की दिशा यानी ओरिएंटेशन में अनियंत्रित बदलाव हुआ। यही बदलाव मिशन के लिए निर्णायक साबित हुआ और सैटेलाइट को ऑर्बिट में स्थापित करने के लिए जरूरी परिस्थितियां पूरी नहीं हो सकीं। हालांकि राहत की बात यह रही कि रॉकेट सिस्टम का अधिकांश प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप रहा, जिसे ISRO एक सकारात्मक संकेत के तौर पर देख रहा है।

15 सैटेलाइट्स के साथ लॉन्च हुआ था मिशन

PSLV-C62 मिशन के तहत कुल 15 सैटेलाइट लॉन्च किए गए थे। इनमें सबसे प्रमुख था अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट ‘अन्वेषा’ (EOS N1)। इसके अलावा 14 को-पैसेंजर सैटेलाइट भी इस मिशन का हिस्सा थे। योजना के मुताबिक ‘अन्वेषा’ को करीब 600 किलोमीटर ऊंचाई पर सूर्य-समकालिक कक्षा (SSO) में स्थापित किया जाना था, लेकिन तकनीकी गड़बड़ी के कारण यह लक्ष्य पूरा नहीं हो सका।

DRDO का हाई-टेक स्पाई सैटेलाइट

‘अन्वेषा’ सैटेलाइट को DRDO ने विकसित किया था। यह एक अत्याधुनिक इमेजिंग और निगरानी सैटेलाइट है, जिसे रक्षा और रणनीतिक जरूरतों के लिए डिजाइन किया गया था। इसकी खासियत यह मानी जाती है कि यह घने जंगलों, झाड़ियों और यहां तक कि बंकरों में छिपी गतिविधियों की भी पहचान कर सकता है। ऐसे में इसका तय कक्षा में न पहुंच पाना सिर्फ तकनीकी नहीं, बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है।

ISRO चीफ का बयान

मिशन के बाद ISRO प्रमुख ने स्थिति को लेकर स्पष्ट बयान दिया। उन्होंने कहा कि तीसरे स्टेज में तकनीकी समस्या आई, जिससे रॉकेट की दिशा में अप्रत्याशित बदलाव हुआ। उन्होंने यह भी बताया कि पूरे फ्लाइट डेटा का बारीकी से विश्लेषण किया जा रहा है और जैसे ही जांच पूरी होगी, उसके नतीजे सार्वजनिक किए जाएंगे। ISRO ने भरोसा दिलाया है कि इस मामले में पूरी पारदर्शिता रखी जाएगी, जो भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की पहचान रही है।

झटका जरूर, लेकिन सीख भी अहम

हालांकि PSLV-C62 मिशन अपने पूरे लक्ष्य तक नहीं पहुंच सका, लेकिन इसे पूरी तरह असफलता के तौर पर नहीं देखा जा रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि ISRO पहले भी ऐसे तकनीकी झटकों से सीख लेकर और मजबूत होकर उभरा है। रॉकेट के अधिकांश सिस्टम का सफल प्रदर्शन भविष्य के मिशनों के लिए भरोसा देता है। माना जा रहा है कि इस अनुभव से मिली सीख आने वाले लॉन्च को और ज्यादा सुरक्षित और सटीक बनाने में मदद करेगी।

कुल मिलाकर, PSLV-C62 मिशन ने यह साफ कर दिया है कि अंतरिक्ष अभियानों में छोटी सी तकनीकी गड़बड़ी भी बड़ा असर डाल सकती है। लेकिन ISRO का ट्रैक रिकॉर्ड यही बताता है कि वह हर चुनौती से सीख लेकर आगे बढ़ता है, और आने वाले मिशनों में इस अनुभव का फायदा जरूर देखने को मिलेगा।

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Nandani

nandani@nedricknews.com

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