IRCTC Scam: सीबीआई की विशेष अदालत ने आईआरसीटीसी घोटाले में नामजद प्रमुख आरोपियों—लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और बेटे तेजस्वी यादव—के खिलाफ आरोप तय करने को लेकर छह दिन की समय सीमा निर्धारित की है। यह मामला रेलवे के होटलों के आवंटन में अनियमितताओं से जुड़ा है, जिसे लेकर सीबीआई जांच कर रही है।
हर दिन होगी सुनवाई- IRCTC Scam
विशेष अदालत ने हाल ही में दिए अपने आदेश में कहा कि मामले में शामिल पक्षों की संख्या, रिकॉर्ड की विस्तृत जानकारी और सुप्रीम कोर्ट एवं दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए सुनवाई को तेज किया जाना आवश्यक है। इसी को देखते हुए अदालत ने 28 फरवरी से 7 मार्च तक रोजाना सुनवाई करने का निर्णय लिया है ताकि आरोप तय करने पर बहस पूरी की जा सके।

क्या हैं लालू परिवार पर आरोप?
सीबीआई का आरोप है कि जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे, तब उन्होंने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए रेलवे के होटलों के आवंटन में अनियमितताएं कीं और इसके बदले अपने परिवार के नाम संपत्ति स्थानांतरित करवाई। इस घोटाले में राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के शामिल होने का भी आरोप है। इस केस में सरकारी अधिकारियों और निजी कंपनियों को भी आरोपी बनाया गया है। मामला काफी लंबे समय से अदालत में लंबित था और अब आरोप तय करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।
वकीलों की अनुपस्थिति में भी चलेगी सुनवाई
अदालत ने निर्देश दिया है कि बचाव पक्ष के वकील अपनी दलीलें पहले से तैयार रखें और सभी पक्षों में समन्वय हो। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी वकील की अनुपस्थिति होती है, तो भी सुनवाई स्थगित नहीं होगी। अदालत ने कहा कि वह प्रत्येक निर्धारित तिथि पर उपलब्ध वकीलों की बहस सुनेगी और उसी के आधार पर मामले को आगे बढ़ाएगी।

क्या जल्द आएगा फैसला?
आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि सीबीआई पहले ही अपनी प्रारंभिक दलीलें पेश कर चुकी है, जबकि बचाव पक्ष की ओर से लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के वकीलों ने कानूनी पहलुओं पर बहस रखी थी। अब सीबीआई एक दिन में अन्य आरोपियों के खिलाफ अपनी बहस पूरी करेगी, जिसके बाद बचाव पक्ष को अपना पक्ष रखने का मौका मिलेगा। इसके बाद अदालत निर्णय लेगी कि आरोप तय किए जाएं या नहीं। यदि अदालत आरोप तय करने का फैसला करती है, तो यह मुकदमे की शुरुआत होगी।
अब तक क्या हुआ है?
यह मामला तब लंबित हो गया था जब एक सह-आरोपी विनोद अस्थाना (पूर्व सरकारी अधिकारी) ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने अपने खिलाफ आरोप तय करने पर रोक लगाने की मांग की थी, जिसे दिल्ली हाईकोर्ट ने 2022 में खारिज कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने भी 11 फरवरी को उनकी याचिका का निपटारा करते हुए कहा था कि आरोप तय करते समय सभी मुद्दे अदालत में उठाए जा सकते हैं। इसके बाद सीबीआई अदालत ने 20 फरवरी को मामले की सुनवाई शुरू करने का निर्णय लिया।





























