चली गई आंखों की रोशनी, फिर भी हौसला नहीं टूटा… ये महिला बनी पहली नेत्रहीन IAS!

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 19 Dec 2021, 12:00 AM | Updated: 19 Dec 2021, 12:00 AM

वो एक लड़की, जिसके सामने चुनौतियों का पहाड़ था। वो एक लड़की जिसकी आंखों की रोशनी जन्म के बाद से ही कमजोर थीं। वो एक लड़की जिसने चुनौतियों के पहाड़ को चीर डाला और बन गई IAS ऑफिसर। ये सुनने में एक फिल्मी कहानी सा भले ही लग रहा होगा आपको, लेकिन ये एक सच्ची स्टोरी है जो किसी को भी इंस्पायर कर सकती है। आज की कामयाबी की कहानी है प्रांजल पाटिल के नाम जिसे बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं…

चली गई आंखों की रोशनी 

प्रांजल पाटिल की आंखों की रोशनी जन्म के बाद से ही कमजोर थी। जब वो महज 6 साल की हुईं तो उनकी आखों की रोशनी पूरी तरह से जा चुकी थी। कम उम्र में प्रांजल की आंखों में रोशनी नहीं रही लेकिन उन्होंने अपनी जिंदगी को रोशनी से भर देने की ठान ली। उन्होंने अपनी लगन और हौसले को पस्त नहीं होने दिया और बन गई देश की पहली नेत्रहीन महिला IAS ऑफिसर।

प्रांजल पाटिल बेसिकली महाराष्ट्र के उल्लासनगर की रहने वाली हैं। जिन्होंने मुंबई के दादर स्थित श्रीमति कमला मेहता स्कूल से अपनी स्टडी की। ये स्कूल प्रांजल जैसे ही स्पेशल बच्चों के लिए था। यहां पर बच्चों को ब्रेल लिपि में पढ़ाया जाता था। यहीं से प्रांजल ने 10वीं तक की पढ़ाई पूरी की। फिर चंदाबाई कॉलेज से 12वीं की पढ़ाई आर्ट्स में पूरी की। जिसमें प्रांजल के 85 फीसदी मार्क्स आए। फिर बीए की पढ़ाई के लिए प्रांजल ने मुंबई के सेंट जेवियर कॉलेज गई।

जब प्रांजल ने UPSC देने की ठानी

कहते हैं कि जब ग्रेजुएशन में प्रांजल पाटिल थीं तब उन्होंने और उनके एक फ्रेंड ने पहली दफा एक लेख  पढ़ा था UPSC से संबंधित, जिसके बाद प्रांजल इससे इतनी प्रभावित हुईं कि उन्होंने इससे संबंधित हर एक इंफोर्मेशन को इकट्ठा करना शुरू कर दिया। प्रांजल ने मन बना लिया था UPSC इग्जाम देने का लेकिन किसी को भी इस संबंध में बताया नहीं।

ग्रेजुएशन के बाद दिल्ली पहुंचकर प्रांजल ने JNU से एमए कर लिया और इस दौरान उन्होंने आंखों से अक्षम लोगों के लिए बने एक खास सॉफ्टवेयर की हेल्प ली जिसका नाम जॉब ऐक्सेस विद स्पीच है। फिर क्या था वो एकीकृत MPhil और PhD प्रोग्राम के लिए चली गई।

सॉफ्टवेयर की मदद से की तैयारी 

इमरेस्टिंग तो ये हैं कि प्रांजल ने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी विशेष सॉफ्टवेयर की हेल्प से की थी। उन्होंने तैयारी के लिए कोई कोचिंग नहीं ली। ये खास तरह का सॉफ्टवेयर प्रांजल के लिए किताबें पढ़ सकता था और तो और मॉक टेस्ट पेपर भी प्रांजल ने हल किए, फिर डिस्कशन में भी उनकी भागीदारी रहती थी।

साल 2016 में अपनी पहली कोशिश में अखिल भारतीय रैंक यानि कि AIR में उनको 773वां पायदान हासिल हुआ। उन्हें अच्छी रैंक मिली लेकिन दृष्टिबाधित होने की वजह से भारतीय रेलवे लेखा सेवा में उनको नौकरी देने से इनकार कर दिया गया। 2017 की सिविल सेवा परीक्षा में प्रांजल ने बैठने का फैसला कर लिया और इस बार उन्होंने अपनी कोशिश दोगुनी की।

ये उनकी कड़ी मेहनत का ही तो असर था कि उन्होंने अपने दूसरी कोशिश में AIR-124 के साथ एग्जाम क्लेयर किया। वो भारतीय प्रशासनिक सेवा यानी कि IAS में शामिल हुई। IAS ऑफिसर प्रांजल ने तिरुवनंतपुरम के उप-कलेक्टर के तौर पर संभाला और उससे पहले केरल के एर्नाकुलम में उन्होंने सहायक कलेक्टर के तौर पर काम किया। 

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