धारा 376 कब लगती है और क्या है इससे बचने का प्रावधान?

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Published: 26 Apr 2023, 12:00 AM | Updated: 26 Apr 2023, 12:00 AM

धारा 376 क्या है – अगर कोई शख्स किसी भी महिला के जबरदस्ती बलात्कार करता है तो इस मामले में भारतीय कानून के तहत उसे कड़ी सजा देने का प्रावधान है और इस अपराध के लिए दोषी पर धारा 375 के तहत केस दर्ज होता है लेकिन सजा उसे 376 की अलग-अलग केटेगरी के हिसाब से मिलती है. वहीं इस पोस्ट के जरिये हम आपको इस बात की जानकारी देने जा रहे हैं कि धारा 375 क्या है. धारा 375 और 376 में क्या अंतर है और धारा 376 के तहत आरोपी को क्या सजा मिलेगी साथ ही इससे बचने का प्रावधान क्या है.

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धारा 375 VS 376 ?

जानकारी के अनुसार, धारा 375 और 376 दोनों एक ही अपराध से निपटते हैं, दोनों धाराओं के बीच एकमात्र अंतर यह है कि धारा 375 अपराध की परिभाषा बताता है, जबकि धारा 376 आरोपी के खिलाफ आरोप साबित होने के बाद अपराध के लिए सजा प्रदान करती है. इसके बाद आरोपी को धारा 375 और 376 के तहत बलात्कार का दोषी ठहराया जाएगा और आरोपी को सजा धारा 376 के अलग-अलग केटेगरी के हिसाब से सजा मिलेगी.

धारा 376 क्या है?

अगर कोई शख्स किसी भी महिला के साथ बलात्कार करता है तो उसके खिलाफ धारा 375 के तहत मुकदमा चलाया जाता है। जिसमें अपराध सिद्ध होने की में दोषी कोर्ट द्वारा सजा मिलती है लेकिन सजा उसे 376 अलग-अलग केटेगरी के हिसाब से दी जाती है.

क्या है सजा का प्रवधान

इस अपराध को अलग-अलग हालात और श्रेणी के हिसाब से धारा 375, 376, 376क, 376ख, 376ग, 376घ के रूप में बाँट दिया गया है. 376(क) अलग रहने के दौरान किसी पुरुष द्वारा अपनी पत्नी के साथ संभोग करता है तो वो भी बलात्कार की श्रेणी में आता है. जिसके लिए दो वर्ष सजा और जुर्माना देना पड़ेगा. 376(ख) पब्लिक सेवा करने वाला कोई शख्स कस्टडी में किसी स्त्री के साथ संभोग करने और 376(ग) के तहत जेल में अधिकारी द्वारा किसी महिला बंदी से संभोग करने पर पांच साल की सजा और जुर्माना देना होगा. वहीं 376(घ) अस्पताल के प्रबंधक या कर्मचारी आदि से किसी सदस्य द्वारा उस अस्पताल में किसी स्त्री के साथ संभोग करेगा तो वह भी बलात्कार है और इस मामले में पांच साल की सजा मिलेगी.

सजा से बचने का प्रवधान

आरोप साबित होने के बाद कोर्ट कुछ मामलों में सजा कम कर सकता है. वहीं, इस IPC की धारा 376 गैर जमानती है यानि इस मामले में आपको जमानत नहीं मिलेगी. आई.पी.सी. की धारा 376 के मामले को कोर्ट सत्र न्यायालय में पेश किया जा सकता है और जज इस मामले पर फैसला देगा.

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