India-Us Trade Deal: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के साथ व्यापार में बड़ा बदलाव किया है। उन्होंने भारत पर लगे 50% टैरिफ को घटाकर 18% कर दिया है। इसमें रूस से तेल की खरीद पर लागू 25% टैरिफ हटाना भी शामिल है। ट्रंप ने दावा किया कि भारत ने अब रूस से तेल की खरीद बंद करने का निर्णय लिया है। हालांकि, मोदी सरकार ने इस मामले में अभी तक कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया है। वहीं, रूस लगातार कह रहा है कि भारत किसी भी देश से तेल खरीदने के लिए स्वतंत्र है।
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रूस की रणनीति: भारत को अपने पाले में रखना
फरवरी 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद रूस भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बन गया। जाहिर है, रूस अपने इस बड़े ग्राहक को खोना नहीं चाहता। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, रूस ने भारतीय रिफाइनरियों के लिए तेल पर छूट बढ़ा दी है ताकि अमेरिका के साथ भारत की ट्रेड डील के बावजूद भारत रूसी तेल खरीदता रहे।
पिछले 10 दिनों में भारत को दी जाने वाली छूट और बढ़ गई है। रूस का प्रमुख कच्चा तेल यूराल्स ग्रेड अब ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड के मुकाबले प्रति बैरल 10 डॉलर से भी ज्यादा सस्ता ऑफर किया जा रहा है, जिसमें शिपिंग और अन्य लागतें भी शामिल हैं। एनालिटिक्स फर्म आर्गस के अनुसार यह छूट अब लगभग 11 डॉलर प्रति बैरल हो गई है, जबकि 22 जनवरी से पहले यह 9.15 डॉलर थी।
अमेरिका ने अक्टूबर 2025 में रूस की दो प्रमुख तेल कंपनियों रोसनेफ्ट और लुकोइल पर प्रतिबंध लगाए थे। इसके बाद भारत की रूस से तेल खरीद में कमी आई थी, लेकिन रूस ने भारत को दी जाने वाली छूट को तीन गुना बढ़ाकर भारत को आकर्षित किया।
क्यों रूस से तेल खरीद रहा है भारत?
भारत और रूस के लंबे समय से ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंध रहे हैं। दोनों देशों का दोस्ताना रिश्ता गहरा है और रूस भारत का सबसे बड़ा रक्षा हथियार सप्लायर भी है। हालांकि, भारत कभी पारंपरिक रूप से रूस से तेल नहीं खरीदता था।
फरवरी 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद तेल की कीमतें बढ़ गईं। पश्चिमी प्रतिबंधों के चलते रूस ने भारत और चीन जैसे एशियाई देशों को रियायती दरों पर तेल की पेशकश की। इसके बाद भारत ने रूसी तेल की खरीद शुरू की और कुछ ही महीनों में रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल सप्लायर बन गया। भारत हर दिन करीब 20 लाख बैरल तेल रूस से खरीदने लगा।
हाल के महीनों में अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण भारत की रूस से तेल खरीद में थोड़ी कमी आई, लेकिन जनवरी 2026 में यह औसतन 12 लाख बैरल प्रतिदिन रही। डेटा फर्म केप्लर का कहना है कि भारत की रूस से तेल खरीद बंद करने की संभावना बहुत कम है।
रूसी तेल पर मिलने वाली छूट
केप्लर के अनुसार, भारत को यूराल्स ग्रेड पर ब्रेंट क्रूड के मुकाबले लगभग 9 डॉलर प्रति बैरल की छूट मिल रही है। इस हिसाब से भारत के लिए रूसी तेल वेनेजुएला के तेल से 4-5 डॉलर सस्ता है। इस वजह से भारत ने अभी भी रूस से तेल खरीदना जारी रखा है।
अमेरिकी प्रेशर के बावजूद भारत ने नहीं बनाई दूरी
वित्तीय विश्लेषक नीरज शाह का कहना है कि ट्रंप के दावों के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी तेल से दूरी नहीं बनाई है। शाह के मुताबिक, 2026 में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में मोदी और पुतिन दोनों देशों की मुद्राओं में पेमेंट के मुद्दे पर चर्चा कर सकते हैं।
नीरज शाह ने रूसी मीडिया URA.RU को बताया कि भारत पहले ही अमेरिका की उस मांग को ठुकरा चुका है जिसमें रूस से तेल न खरीदने को कहा गया था। बदले में अमेरिका ने वेनेजुएला का तेल लेने का प्रस्ताव दिया था। शाह ने कहा, “ट्रंप की बातें हमेशा भरोसेमंद नहीं होतीं। भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए निर्णय स्वतंत्र रूप से लिया है।”
भारत का रुख: ऊर्जा सुरक्षा सर्वोपरि
रूसी तेल की खरीद बंद करने के ट्रंप दावे पर विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत की प्राथमिकता अपनी 1.4 अरब आबादी की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना है। प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया, “जहां तक ऊर्जा सुरक्षा और स्रोतों का सवाल है, सरकार कई बार सार्वजनिक रूप से कह चुकी है कि देश की ऊर्जा की मांग को पूरा करना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।”
वेनेजुएला से तेल खरीदने की शुरुआत
इस बीच, भारत की सबसे बड़ी रिफाइनरी रिलायंस इंडस्ट्रीज ने वेनेजुएला से तेल की खरीद शुरू कर दी है। ट्रेड सूत्रों के अनुसार, रिलायंस ने ट्रेडर विटोल से 20 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा। यह पिछले एक साल में पहली बार है जब दक्षिण अमेरिकी देश से तेल खरीदा गया है।
अमेरिका ने विटोल और ट्रैफिगुरा को वेनेजुएला के तेल की मार्केटिंग और बिक्री का लाइसेंस दिया है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक ऑपरेशन के तहत वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उनके निवास से उठाया था। इसके बाद अमेरिका ने वेनेजुएला के तेल पर नियंत्रण स्थापित किया और देश की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज के साथ सप्लाई समझौता किया।
